भीलवाड़ा। 16 सितंबर, 2025 को मंदसौर के ग्राम मुल्तान पूरा के शेरू सुसादिया अपने साथी के साथ राजस्थान के भीलवाड़ा के लाम्बिया रायला पशु मेले से पशु खरीद कर वापस मंदसौर लौट रहे थे, इस बात से बेख़बर कि पशु मेले से मंदसौर का सफर उनका अंतिम सफर बन जायेगा।
लाम्बिया कलां का मेला सांस्कृतिक उत्सव, मनोरंजन के साथ-साथ ऐतिहासिक रूप से मेलजोल और व्यापार का केंद्र भी रहा है। इस मेले में वर्षों से पारम्परिक पशु हाट के साथ-साथ कवि सम्मेलन, साइकिल रेस, घुड़दौड़ जैसे आयोजन होते आए हैं। मेले में दुधारू गाय, भैंस, कृषि में काम आने वाले पशु और घोड़ों के क्रय- विक्रय के लिए दूर-दूर से लोग शामिल होते हैं। इस मेले की भव्यता में पशु के क्रय विक्रय का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन 3-4 दिनों के लिए चारे और पानी का विशेष इंतजाम करता है।

जानकारी के अनुसार दिनांक 16 सितंबर को मेले से बैल खरीद कर शेरू सुसादिया अपने घर वापस लौट रहे थे। बीच रास्ते में गाड़ी रोक कर उन्होंने खाना भी खाया। रात को लगभग 3 बजे उन्हें लगा कि कोई गाड़ी का पीछा कर रहा है। पीछा करने वालों ने गाड़ी साइड लगवाई और जैसे ही गाड़ी रोकी गई कथित गौ रक्षकों ने हमला कर दिया।
लगभग पंद्रह सोलह लोगों ने गौ-तस्करी के शक में उन्हें लाठी डंडों से मारना चालू कर दिया। हमलावरों ने शेरू की एक न सुनी और उनका मोबाइल व जेब में रखा कैश भी छीन लिया। दोपहर के वक्त परिवार को पुलिस का फोन आया कि शेरू सुसादिया भीलवाड़ा अस्पताल में भर्ती हैं और फिर पता चला की गंभीर रूप से घायल शेरू को जयपुर रेफर कर दिया गया जहां उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

अस्पताल से मृतक की जो तस्वीरें सामने आईं वो खुद बयां कर रही हैं कि उसे किस तरह पीटा गया। फ़िलहाल भीलवाड़ा पुलिस ने मामला दर्ज कर 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं बाकी लोग अब भी फरार हैं। साथ ही गौ तस्करी का एक अलग मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा जांच के लिए SIT बनाई गई है। परिवार का कहना है कि पुलिस द्वारा उन्हें 5 लाख की सहायता का आश्वासन दिया गया है हांलाकि पूरे समय परिवार डरा-सहमा सा नज़र आया।
लगभग 32 वर्षीय शेरू के पिताजी का कोरोना काल में इंतकाल हो गया था तब से घर का एकमात्र कमाने वाला शेरू ही था। परिवार के पास छोटी सी खेती है और गोबर – मिट्टी से लीपा एक छोटा सा मकान है। परिवार का खर्च मुख्य रूप से शेरू की दिहाड़ी-मज़दूरी से ही चलता था। मृतक के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं लगभग 8 -10 महीने का बेटा और लगभग 3 साल की बेटी, परिवार में बुजुर्ग माताजी, विधवा पत्नी, 15 वर्षीय भाई और दो बहनें भी हैं जो सभी मृतक पर निर्भर थे।

घटना की खबर मिलते ही जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय, खुदाई खिदमतगार व सीपीआई (एम) की फैक्ट फाइंडिंग टीम के रूप में सामाजिक कार्यकर्त्ता कृपाल सिंह मंडलोई की अध्यक्षता में कॉमरेड शैलेन्द्र ठाकुर, विजय बैरागी, यश लोहार व अन्य सदस्य मृतक के गांव सुल्तानपुरा (मंदसौर) पहुंचे और परिवार, पास पड़ोसी व मौजूद रिश्तेदारों से मिले।
फैक्ट टीम के सदस्यों ने अपील की
-दोषियों पर सख़्त से सख़्त कार्यवाही की जाए
-2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दंडात्मक पहल करने व अन्य निर्देशों का पालन करते हुए परिवार को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट से न्याय दिलाया जाए

-परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
-मृतक के परिवार को 50 लाख मुआवजा दिया जाए।
-परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
-इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति और सामान्यीकरण न हो इसके लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन किया जाए।
(फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट।)