वयोवृद्ध प्रोफेसर वी के त्रिपाठी को मुंबई के धारावी इलाके में पुलिस ने गज़ा नरसंहार को लेकर पर्चे बांटने से रोक दिया।
देश भर में घूम-घूम कर सांप्रदायिक राजनीति को चुनौती देते सामुदायिक सद्भावना, शांति और मानवीयता का संदेश लोगों के बीच पर्चों, संवाद के जरिए बांटने वाले प्रोफेसर त्रिपाठी शनिवार और रविवार को मुंबई में थे। शनिवार को वह धारावी इलाके में पर्चे बांटने पहुंचे।
उनकी बेटी राखी त्रिपाठी ने सोशल मीडिया “एक्स” पर अपने पिता का एक वीडियो जारी किया , जिसमें वह बता रहे हैं कि वह सुबह धारावी पहुंचे थे लेकिन आधे घंटे में पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
प्रोफेसर त्रिपाठी ने बताया कि इसीलिए नरीमन पॉइंट पर आज वह पर्चे नहीं बांटेंगे लेकिन लोगों से संवाद करेंगे। गज़ा को लेकर भी और देश के हालात पर भी।
फ़लस्तीन में दो वर्षों से जारी इस्राइल के दमन के बीच दुनिया भर में छात्र, आम मेहनतकश लोग, सिविल सोसाइटी के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रोफेसर त्रिपाठी भी “गज़ा भूख नरसंहार बंद हो”, “हिंसा सत्ता का औज़ार है, अहिंसा जनता का” और “दुनिया के आमजन एक हैं, उनका दर्द और शोषण एक है” जैसे नारे लिखे पर्चे बांटने का कार्य कर रहे हैं।
अगस्त में ही प्रोफेसर त्रिपाठी ने दिल्ली के राजघाट पर गज़ा के लोगों के समर्थन में अनशन किया था, पुलिस ने उन्हें वहाँ से भी हटाने की कोशिश की थी।
प्रोफेसर त्रिपाठी 1990 के भागलपुर दंगों के बाद अमरीका में अपना अध्यापन करिअर छोड़कर आए थे और नफरत की राजनीति के खिलाफ महात्मा गांधी के अहिंसा आधारित अभियान शुरू किया था।
वह विभिन्न मुद्दों पर पर्चे बांटते हैं, लोगों से संवाद करते हैं। कुछ उनसे संवाद करते हैं, कुछ उनकी अनदेखी करते हैं और कुछ उनसे बहस भी करते हैं लेकिन वह विचलित नहीं होते। उन्होंने न्यूजलॉन्ड्री से कहा था कि वह मानते हैं कि युवाओं में नफरत के बजाय संवेदना चुनने की क्षमता है। (जनचौक ब्युरो की रिपोर्ट)