कारगिल युद्ध में सरहद पर जिसे पाक की गोली नहीं भेद पायी, उसे सुरक्षा बल के जवानों ने मार डाला

जो चार लोग लद्दाख में सुरक्षा बलों की गोलियों से मारे गए, उसमें एक 46 वर्षीय पूर्व सैनिक, कारगिल युद्ध के योद्धा त्सेवांग थारचिन (Tsewang Tharchin) भी हैं। उनके पिता (पूर्व सैनिक) स्टैनज़िन नामग्याल (Stanzin Namgyal) ने अपने बेटे की मौत पर कहा कि उनके बेटे की हत्या की गई है। उन्होंने भारत सरकार से सवाल किया है कि वह क्यों देशभक्तों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है?

उसकी मौत को “हत्या” बताते हुए, थारचिन के परिवार का आरोप है कि उसके शरीर पर डंडों के निशान हैं, जिससे पता चलता है कि मरने से पहले उसे पीटा भी गया था। (साफ है कि पहले गोली मारी गई, उसके बाद डंडों से पीटा गया)

त्सेवांग थारचिन का एक परिचय

यह 46 वर्षीय पूर्व सैनिक भी प्रदर्शनकारियों में शामिल होकर लद्दाख के लिए छठीं अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग कर रहा था। सीधे इनके सीने में गोली मारी गई है। 

थारचिन कारगिल युद्ध के एक अनुभवी सैनिक रहे हैं। जिन्होंने 1996 से लेकर 2017 तक भारत के एक सैनिक और लद्दाख स्काउट्स के हवलदार के रूप में अपने देश की सैन्य सेवा की। सेवा निवृत्ति के बाद वे लेह में एक कपड़े की दुकान चला रहे थे। उनके चार बच्चे हैं। दो बेटी और दो बेटा। 

सबसे बड़ा बच्चा 16 साल का है। जो सैनिक स्कूल में पढ़ता है और भारतीय सेना में शामिल होने का स्वप्न देख रहा है और उसकी तैयारी कर रहा है।

मैं कुछ कहूं इसे अच्छा है कि इस पूर्व सैनिक की सुरक्षा बलों के हाथों हत्या के बारे में उनके पिता, भाई और पत्नी क्या कह रही हैं, उसे पढ़ लीजिए- 

यहां यह तथ्य नोट कर लीजिए। कारगिल युद्ध में पिता और पुत्र एक साथ पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़े थे। 

थारचिन के पूर्व सैनिक पिता ने अपने पूर्व सैनिक बेटे की मौत के बारे में कहा कि,“ मेरे जिस वीर सैनिक बेटे को पाकिस्तानी सैनिक नहीं मार सके, लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने उसकी जान ले ली।”

उन्होंने आगे कहा- “मेरा बेटा देशभक्त था। उसने कारगिल युद्ध लड़ा और तीन महीने मोर्चे पर रहा। उसने दहटॉप और तोलोलिंग में पाकिस्तानियों से लड़ाई लड़ी। पाकिस्तानी उसे नहीं मार सके, लेकिन हमारे अपने सुरक्षा बलों ने उसकी जान ले ली,” 

थारचिन के पूर्व सैनिक पिता का स्टैनज़िन नामग्याल एक परिचय- 

एक कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक, नामग्याल 2002 में सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। कारगिल युद्ध में पिता-पुत्र एक साथ पाकिस्तान के खिलाफ लड़े थे। 

नामग्याल कहते हैं, “कारगिल युद्ध के दौरान मैं और मेरा बेटा साथ-साथ लड़े थे। मैं तीसरी इन्फैंट्री डिवीजन में था, जबकि थारचिन लद्दाख स्काउट्स में था। थारचिन ने चार बार सियाचिन में सेवा की है। मुझे अपनी सेवाओं के लिए सेना प्रमुख से प्रशंसा पत्र मिला है। सेना में शामिल होना हमारे खून में है। थारचिन के बच्चे भी आर्मी स्कूल में पढ़ रहे हैं और वह चाहते थे कि वे सेना में शामिल हों। क्या सरकार अपने देशभक्तों के साथ ऐसा ही व्यवहार करती है?”

पेशे से इंजीनियर थारचिन के छोटे भाई कहते हैं कि उन लद्दाखियों को देशद्रोही कहा जा रहा है जो, “जब भी कोई युद्ध होता है, हम लद्दाखी ही सेना को पूरा सहयोग देते हैं। हम अपने जवानों को सैनिक बनाने के अलावा उनके कुली और गाइड भी बनते हैं। हमारी महिलाएं खाना बनाती हैं और सैनिकों को खाना खिलाती हैं। और अब हमें देशद्रोही कहा जा रहा है।”

उनके भाई ने कहा कि सोनम वांचुक हमारी प्रमुख आवाज हैं, आप गोली मारकर और जेल भेजकर हमारी आवाज दबाकर हमें चुप कराना चाहते हैं- 

उन्होंने कहा कि लद्दाखियों की वास्तविक मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता ही उनके भाई की मौत का कारण बनी। “लोग क्या मांग रहे हैं? अपनी ज़मीन और अर्थव्यवस्था पर अधिकार? खुद को नियंत्रित करने का अधिकार, अपनी अनूठी संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार। लेकिन आप इसका जवाब कैसे देंगे, हम पर गोलियां चलाकर और हमारी सबसे प्रमुख आवाज़ सोनम वांगचुक को जेल में डालकर?”

थारचिन की पत्नी ने पूरी घटना की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि “निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। गोलीबारी का आदेश किसने दिया? गोलीबारी किसने की? वे भीड़ को आंसू गैस और रबर की गोलियों से क्यों नहीं नियंत्रित कर पाए? हम इस बात से हैरान हैं कि हमारे ही लोगों ने उसे मार डाला।”

अंत में थारचिन के पिता ने कहा कि, “ मेरे बेटे ने लद्दाख के लिए अपना बलिदान दिया है। हमें उम्मीद है कि सरकार हमारी बात सुनेगी।”

आज थारचिन को बौद्ध परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई दी जाएगी।

शहीद थारचिन को सलाम! अंतिम अलविदा!

( स्रोत द इंडियन एक्प्रेस, 28 सितंबर 2025, दिल्ली संस्करण, पेज-1, 2)

(लेखक डॉ. सिद्धार्थ लेखक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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