नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के निहितार्थ

नितिन नबीन ने 20 जनवरी, 2026 को विधिवत रूप से भारतीय जनता पार्टी के 12 वें अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है। भाजपा के आंतरिक लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप ही इनका चयन भी निर्विरोध हुआ है। वे भाजपा की स्थापना के बाद पैदा हुए पीढ़ी से हैं, अर्थात सबसे युवा अध्यक्ष हैं जो 45 वर्ष 08 माह के हैं, इनके पूर्व अमित शाह 49 वर्ष में भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के सभी बड़े नेताओं की उपस्थिति में उन्होंने निवर्तमान अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से अपना कार्यभार ग्रहण किया। 

पिछले तीन वर्षों से आरएसएस तथा भाजपा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तलाश में सक्रिय थे। दोनों अपने स्तर पर अनेक नामों पर विचार कर रहे थे जहां कई स्तरों पर मतभेद भी थे पर उनमें इस बात की सहमति थी कि नया अध्यक्ष संघ की संस्कृति से आने वाला और अपेक्षाकृत युवा हो। ऐसे में उनकी तलाश पूरी हुई नितिन नबीन के नाम पर। यह तय है कि उनका मनोनयन आपसी सहमति से हुआ है पर यह भी उतना ही सच है कि यह नाम आरएसएस की तरफ से पहली पसंद नहीं था।

राजनैतिक फैसले लेने की अपनी चौंकाने वाली चिर परिचित शैली के अनुरूप ही मोदी-शाह की जोड़ी ने इतने अहम पद हेतु भी सभी को चौंका दिया। उन्होंने भारत के सबसे गरीब प्रदेश में शुमार बिहार से संबद्ध नितिन नबीन को विश्व की सबसे बड़ी और धनी राजनैतिक पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनवाकर यह सुनिश्चित कर लिया कि सरकार तथा संगठन पर उनकी एकछत्र पकड़ और मजबूती से जारी रहे। 

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में पदभार ग्रहण के भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में स्वयं को पार्टी का साधारण कार्यकर्ता एवं नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को अपना बॉस कहा। जो भी मोदी जी की राजनीति को करीब से या गहराई से समझते हैं उन्हें स्पष्ट है कि यह कोई सामान्य कथन नहीं है बल्कि इसके गहरे निहितार्थ हैं। मोदी जी अधिनायकवादी राजनीति के समर्थक हैं जो किसी से निर्देशित नहीं होते बल्कि हर किसी को निर्देशित करने के सिद्धांत पर काम करते हैं, सारी शक्तियां अपने में ही समाहित चाहते हैं।

2001 से बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर अब तक के प्रधानमंत्री पद के उनके कार्यकाल से यह स्वतः स्पष्ट है। यह तो साफ है कि मोदी जी की मंशानुरूप उनके राजनैतिक लेफ्टिनेंट अमित शाह ने पार्टी के कई गंभीर दावेदारों को पीछे करते हुए, संघ की पसंद को नज़रंदाज़ करते हुए राष्ट्रीय राजनीति से अनभिज्ञ, अनजान चेहरे जो बिहार की राजनीति में भी बहुत अधिक प्रभावी नहीं रहे नितिन नबीन को भाजपा अध्यक्ष के पद पर लेकर आए हैं। इनके जरिए ही मोदी-शाह की जोड़ी भाजपा के भीतर, आरएसएस के साथ, तथा देश की राजनीति में आगे बढ़ेंगे।

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भले ही इसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव कहा जा रहा है और उसके समर्थकों में उल्लास है पर शायद यही पूरा सत्य भी नहीं है। मेरी राजनीतिक समझ है कि इस नियुक्ति से संघ और भाजपा में नए सिरे से संबंधों का आगाज़ होगा जिसमें मोदी शाह मजबूत पोजीशन में होंगे वहीं भाजपा में राजनीति के कई नए प्रयोग होंगे। राष्ट्रीय से लेकर प्रादेशिक राजनीति में नितिन नबीन की आड़ में कई स्थापित चेहरों को कमज़ोर कर निष्क्रिय किया जाएगा। किसी को उम्र का हवाला दिया जाएगा, किसी को परफार्मेंस के आधार पर बैठाया जाएगा, किसी को सक्रिय राजनीति से विमुख कर राजभवन आदि में भेजा जाएगा।

यह सब मोदी-शाह द्वारा पार्टी की युवाओं में मजबूती के नाम पर स्वयं की मजबूत पैठ हेतु किया जाएगा। केंद्र की राजनीति से क्रमशः राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह, मनोहर लाल खट्टर, हरदीप सिंह पुरी, निर्मला सीतारमण आदि की छुट्टी की जाएगी। इसी तरह से राष्ट्रीय संगठन से भी येदियुरप्पा, वसुंधरा राजे आदि को राजभवन स्थानांतरित किया जाएगा। इस उठापटक से अन्य प्रदेशों की तरह ही छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं रहेगा, यहां भी बड़े बदलाव होंगे। मंत्रिमण्डल पुनर्गठन का वृहद स्वरूप, नए राज्यपाल, देखने को मिलेंगे। अनेक नेताओं का यह अंतिम चुनावी सफर होगा, अगले चुनाव में नए चेहरों को अवसर प्रदान किया जाएगा।

मेरे मतानुसार, भाजपा अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन की नियुक्ति कराकर मोदी शाह की जोड़ी ने अपने को और मजबूत कर लिया है। अब ये अपने हर राजनैतिक प्रयोग को खुलकर पूरा करने की स्थिति में हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जिस पीढ़ीगत बदलाव तथा पार्टी को युवाओं के और करीब लाने के तर्कों पर नितिन नबीन को लाया गया है उससे युवा तथा नई पीढ़ी कैसे और कितना जुड़ाव रखती है क्योंकि यही वर्ग आज सबसे ज्यादा तकलीफ में है, और भाजपा से शनै: शनै: उसका मोहभंग हो रहा है।

मुझे इस पर भी संदेह है कि मोदी शाह के होते हुए नितिन नबीन पार्टी में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सफल होंगे, इन्हें उनके ही दिशानिर्देश पर चलना पड़ेगा। इस नियुक्ति का एक सकारात्मक पहलू यह है कि भाजपा की राजनीति में कई नए चेहरों को मौका मिलेगा, वो आगे आएंगे। बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की सबसे बड़ी चुनौती अप्रैल में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं जहां उसे आसाम में अपनी सरकार बचानी है वहीं पश्चिम बंगाल में ममता सरकार को हराकर बंगाल जीतना है, तमिलनाडु तथा पुडुचेरी में अपने गठबंधन की सरकार बनवानी है और केरल में अब तक का अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन करना है।

इन राज्यों के चुनावी नतीजे बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके आगाज को रेखांकित करेंगे कि वह धमाकेदार रहा या कमजोर रहा। यह सही है कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति से भाजपा में नए युग का सूत्रपात हो गया है, जिसमें पुराने और स्थापित लोगों में एक भय का भाव है तो युवाओं में अपने लिए अवसर मिलने की आस का उल्लास है। यह भी सच है कि मोदी शाह ने अपने पसंद का राष्ट्रीय अध्यक्ष ज़रूर बनवा लिया है किंतु पार्टी पर आरएसएस का प्रभाव जारी रहेगा। 

                 (परमजीत बॉबी सलूजा लेखक और टिप्पणीकार हैं।)

Leave a Reply