अपील पेंडिंग रहने तक दोषी को सालों तक जेल में रखना न्याय का मज़ाक: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की सुनवाई लंबित रहने तक वर्षों जेल में रखना न्याय का मज़ाक है।

यह मानते हुए कि सज़ा के खिलाफ अपील की सुनवाई में बहुत ज़्यादा देरी होने पर दोषी को सज़ा निलंबित करने का फ़ायदा मिलता है, सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें हत्या के एक दोषी की उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने से मना कर दिया गया। वर्ष 2016 में दायर सज़ा के खिलाफ अपील का ओडिशा हाई कोर्ट द्वारा अभी तक निपटारा नहीं किया गया था।

न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश एससी शर्मा की बेंच ने साफ़ किया कि भले ही किसी व्यक्ति को हत्या जैसे जघन्य अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, लेकिन सज़ा निलंबित करने की मांग करने के उसके अधिकार को खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब सज़ा के खिलाफ अपील की सुनवाई में बहुत ज़्यादा देरी हो रही हो। इसके अलावा कोई फ़ैसला लेने के लिए कोई ठोस आधार न दिया जा रहा हो।

लाइव लॉ के अनुसार अपील करने वाले मुना बिसोई को सत्र न्यायालय ने आईपीसी की धारा 302/34 और शास्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया। उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।

उसने 2016 में अपनी सज़ा के खिलाफ उड़ीसा हा कोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने 22 अक्टूबर, 2025 को जब सज़ा सस्पेंड करने की उसकी अर्ज़ी पर विचार किया, तब तक अपीलकर्ता 11 साल से ज़्यादा समय से कस्टडी में बीता चुका था। हाईकोर्ट ने सज़ा को पूरी तरह निलंबित करने से मना किया, लेकिन ज़्यादा देरी के कारण उसे तीन महीने (22 जनवरी, 2026 को खत्म हो रही) के लिए अंतरिम ज़मानत दी।

इस अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने से ठीक पहले अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और अपील के पेंडिंग रहने के दौरान उसकी सज़ा को हमेशा के लिए सस्पेंड करने से हाई कोर्ट के इनकार को चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कश्मीरा सिंह बनाम पंजाब राज्य, (1977) 4 SCC 291 का ज़िक्र किया, जहां कोर्ट ने दोषियों को जमानत पर रिहा न करने के तरीके की बुराई की, जबकि सज़ा के खिलाफ उनकी अपील सालों तक पेंडिंग रखी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील मंज़ूर कर ली और साथ ही हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया, “बेहतर होगा कि इस आदेश की कॉपी मिलने की तारीख से छह महीने के अंदर अपील पर फैसला किया जाए।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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