“महाराष्ट्र का प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून महिलाओं, युवाओं के अधिकारों पर हमला है!”

तीस से ज़्यादा नारीवादी, छात्र, जनवादी और धार्मिक, सामाजिक संगठनों ने बुधवार को महाराष्ट्र के प्रस्तावित जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून को महिलाओं और युवाओं के अपनी पसंद के जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता के अधिकार और निजता के अधिकार पर सीधा हमला करार दिया।

मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कान्फ्रन्स में पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) की लारा जेसानी ने कहा कि कानून कथित “लव जिहाद” को लेकर लाया जा रहा है, जिसके बारे में पिछले कुछ वर्षों से केवल भ्रामक प्रोपोगंडा चल रहा है लेकिन कोई डाटा नहीं है।

एडवोकेट जेसानी ने कहा कि प्रस्तावित कानून के प्रावधानों के बारे में कोई जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है जबकि बिना पब्लिक स्क्रुटनी के कोई कानून नहीं लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को, यदि चालू विधेयक बजट सत्र में पेश किया जाता है, तो इसका विरोध करना चाहिए।

सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस की तीस्ता सेतलवाड ने कहा कि अन्य भाजपा शासित राज्यों में पारित इस तरह के कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और नोटिस जारी हो चुके हैं तो महाराष्ट्र सरकार को ऐसा कोई कानून लाने से पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।

नारीवादी, क्वीर अधिकार कार्यकर्ता और शिक्षिका चयनिका शाह ने कहा कि कहने को लव जिहाद के नाम पर कानून अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिमों को प्रताड़ित करने के लिए लाया जा रहा है लेकिन वास्तव में यह महिलाओं और युवाओं के खिलाफ है क्योंकि यह एक वयस्क व्यक्ति के अपनी पसंद से जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला है। यह मानकर चला जा रहा है कि महिलाओं, युवाओं को अपने जीवन के बारे में सही फैसला लेने की समझ या क्षमता नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून उन असामाजिक विजिलेंट तत्वों को ताकत देगा जो अंतरधर्मीय विवाह का निर्णय लेने वाले युवाओं, उनके परिवारों को प्रताड़ित करते हैं। 

वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने का मामला हो या धोखे से, दबाव डालकर धर्मांतरण करने का मामला, उसके लिए मौजूदा कानूनों में प्रावधान हैं और नया कानून लाने की ज़रूरत नहीं है। प्रस्तावित कानून का वास्तविक उद्देश्य भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है।

प्रेस कान्फ्रन्स में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, फोरम अगैन्स्ट ऑपरेशन ऑफ वुमन, बॉम्बे कैथ्लिक सभा, दलित वुमन राइट्स डिफेंडर्स, इंडिया लव प्रोजेक्ट, मुंबई फॉर पीस, समेत 35 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित कानून के मसौदे को मंजूरी दी और चालू बजट सत्र में इसे विधान मण्डल में प्रस्तुत करने की बात काही थी।

(जनचौक ब्युरो)

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