बिड़ला आ गए जी, सब चंगा सी!

सब कुछ ठीक-ठाक है भाई, ओम बिड़ला जी के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया। ओम जी ने पद संभाल लिया है। ये उनकी दरिया दिली ही मानी जाएगी कि वे अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद सदन में नहीं आए। वरना वे आते रहते पद पर भी बैठ जाते तो कोई कुछ भी नहीं कर सकता था। बहरहाल ये दिन उनके लिए आराम के दिन बन गए। पद संभालते ही उनके वही तेवर थे विपक्ष की ओर क्रोध पूर्ण मुद्रा। किसी विपक्षी सांसद ने इस बीच उनकी सदन में फोटो खींच ली जो उन्हें उत्तेजित कर गया किंतु अपनी वापसी के पहले दिन, पहली बार की इस घटना पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

भाजपा के लिए माहौल खुशनुमा रहा।विपक्ष बिड़ला के नाम को अविश्वास में दर्ज़ करने पर खुश दिखा। परिणाम तो उनके मुताबिक ये तो आना ही था। हां, कुछ सांसद 2019 से सदन में उपाध्यक्ष की नियुक्ति ना होने की चर्चा करते हुए दुखी नज़र आए। संविधान के ख़िलाफ़ बताने पर उतर आए।जबकि वर्तमान सरकार ने संविधान के ख़िलाफ़ जाने कितने काम किए हैं। उन्हें बराबर तब टोका भी गया पर अपने बहुमत के दबाव में विपक्ष को कोई महत्व नहीं दिया गया। ये भारतीय लोकतंत्र की नई परिपाटी का विस्तार है। देश को खुश रखने के लिए विपक्ष को कुचल के रखना उनके संविधान की खासियत है।

बहरहाल, जब सब खुशहाल हैं, मालामाल हैं जी तो प्रभु श्रीराम जी के दरबार की राम रसोई क्यों बंद कर दी गई। कितनी गैस खपत होती इस रसोई में। अब रामजी कुछ तो कर नहीं सकते वे तो मौन धारण किए अपने कथित सरकारी भक्तों को देख रहे हैं। उनकी सेवा में लगे दरबारी भी क्या करें ऊपरी आदेश हैं। राम जी की रसोई कोई होटल तो नहीं थी। इस स्थिति को देखकर तो यही लगता है कि हमारे देश की हालत बहुत खराब हो गई है ईरान का विरोध करने से।

उसने आसपास के क्षेत्रों से आने वाले तेल, गैस के जहाजों के आने का रास्ता बंद कर दिया है। चीन और रुस जो ईरान के साथ हैं उनके लिए रास्ता खुला है। मतलब आज होटल और राम रसोई में ताला लगा है कल भारत के घर-घर की रसोई में ताला लग सकता है। लेकिन इससे हुक्मरानों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।निर्मला सीतारमण कह देंगी कुछ दिन कच्चा अनाज, सब्जी खाओ वह ज्यादा पोष्टिक होती है। बाहर का खाना अच्छा नहीं होता इसलिए स्वास्थ्य को देखते हुए गैस पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

उधर प्रधानमंत्री जी का नाली से गैस बनाने के फार्मूले पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है।वह जुमला नहीं है। प्रयोग कीजिए कामयाबी मिलेगी ही। प्रधानमंत्री झूठ नहीं बोल सकते हैं।

ऐप्सटीन फाइल  झूठी हो सकती है पर हमारे साहिब झूठे कतई नहीं। उन पर यकीन रखिए। देश चलाने के लिए सबके त्याग की ज़रूरत होती है आम लोग त्याग और सहयोग नहीं करेंगे तो देश कैसे आगे बढ़ेगा।

देश के लिए कुर्बानी देने का वक्त आ चुका है देश से बाहर हमारे प्रधानमंत्री पर जो आक्षेप लग रहे हैं। उनके खिलाफ खड़े होने का वक्त है।विपक्ष को भी इस काले समय में देश के महान नेता के साथ खड़ा होना चाहिए।

हम अमरीकी, इज़राइली नही हैं जो अपने विजित महान नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।हम महान देश के वासी हैं। इसका हमें गर्व है देश के नेताओं के साथ गद्दारी नहीं करेंगे। हमारा जो हाल हो जैसा हो। हम तो इन्हीं शब्दों को दोहराते रहेंगे। सब कुछ चंगा सी भाई सब कुछ चंगा सी। हमारे राम जी की रसोई बंद तो हम भी अपनी बंद कर देंगे। यही कहेंगे राम भरोसे जो रहे पर्वत पर हरियाएं। कभी कभी देश के लिए हमें भी झूठ-यज्ञ में शामिल होना चाहिए। गुरु जी की तरह गुरघंटाल बनिए। देश पुकार रहा है। दुनिया कुछ भी कहे हम अमन पसंद तटस्थ लोग हैं।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

Leave a Reply