2014 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर देश की जनता को 2013 से ही किस झूठे तरीके से भरमाने का कृत्य स्वयं मोदी जी के द्वारा किया जाता रहा है, उसका स्याह सच सामने आना अनवरत जारी है पर दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना है कि धर्म की अफीम चाटकर बेसुध पड़ी जनता को न सच से, न समाज से और न देश से कोई मतलब है। खैर, बतौर एक जागरूक नागरिक सच को सामने रखने का, हम तो अपने कर्तव्य का निर्वहन करते रहेंगे।
देश के नागरिकों से अच्छे दिनों का वायदा करने वाले प्रधानसेवक अपने कार्यकाल में दरअसल किनके अच्छे दिन लेकर आए, यह निम्नलिखित तुलनात्मक चार्ट से स्पष्ट है जो 2014 से 2026 के दरम्यान की कालावधि है, जब आत्ममुग्ध मोदी जी ने डॉ. मनमोहन सिंह जी से सत्ता अपने हाथों में संभाली थी, गौर करिए।
1. भारत के नंबर एक उद्योगपति मुकेश अंबानी की नेट वर्थ का ब्यौरा। 2014 में – 1.55 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में – 9.8 लाख करोड़। इनके इस रजत काल में कुल नेटवर्थ में बढ़ोत्तरी है, अद्भुत 540%!!
2. देश के दूसरे नंबर के उद्योगपति गौतम अदाणी की नेट वर्थ का ब्यौरा और भी चौंकाने वाला है, ध्यान दें। 2014 में – 45,000 करोड़, 2026 में – 7.6 लाख करोड़! बुद्धिहीन, अंधभक्त तथा गोदी मीडिया असल में जिसे मोदीयुग कहते हैं वह अदाणी युग है क्योंकि अपने सेवक के शासन में आकाश से पाताल तक सिर्फ अदाणी ही अदाणी है। इनके इस स्वर्ण काल में कुल नेटवर्थ बढ़ोत्तरी है, अविश्वसनीय 1535%!!
3. अब जरा विश्व की सबसे बड़ी मिसकॉल वाली राजनीतिक दल भाजपा की कुल नेट वर्थ पर भी गौर करना जरूरी है। इससे पहले एक ऐतिहासिक सत्य को स्मरण में रखिए, भाजपा की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 1925 में स्थापना से ही इस जहरीली विचारधारा को आर्थिक संसाधनों की कभी कमी नहीं रही है क्योंकि हमारे समाज के वैश्य समुदाय ने सदैव ही स्वस्फूर्त इस विचारधारा को आर्थिक मज़बूती प्रदान की है जिससे ये निर्बाध रूप से अपने एजेंडों को आगे बढ़ाने में सक्षम हुए, फिर भी तुलना देखें।
2014 में – 970 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026 में – 6,088 करोड़ रुपए। सत्ता के इस हीरक काल में भाजपा की कुल नेटवर्थ में बढ़ोत्तरी है, अकल्पनीय 630%!
4. अब ज़रा भारत देश पर कुल कर्ज़ की स्थिति को भी जान लीजिए। 1947 से 2014 के कालखंड अर्थात 67 वर्षों में विभिन्न सरकारों के समय तक हमारे देश पर कुल 55 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। यह क़र्ज़ बढ़कर 2026 में – 215 लाख करोड़ हो गया। गौरतलब है कि 2014 तक 12 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में कुल 55 लाख करोड़ रुपए का ही देश पर विदेशी क़र्ज़ था जबकि विकास के अनगिनत काम हुए थे।
फिर ‘बैलबुद्धि वाले भक्तों के पप्पा’ का कार्यकाल प्रारंभ हुआ जो तीसरे कार्यकाल के तौर पर अनवरत जारी है। जहां 12 पूर्व प्रधानमंत्रियों ने देश पर सही मायनों में विकास कार्य कराकर महज़ 55 लाख करोड़ रुपए का कर्ज छोड़ा था जिसे आसानी से चुकाया जा सकता था क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था फैल चुकी थी पर अकेले विश्व गुरु ने ही तमाम पूर्व प्रधानमंत्रियों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
2014 तक का 55 लाख करोड़ का कर्ज अब 215 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है, अर्थात नॉन बायोलॉजिकल मोदी जी ने अकेले ही देश पर विदेशी क़र्ज़ 160 लाख करोड़ रुपए बढ़ा दिया। राजनीति से परे होकर देश के प्रत्येक नागरिक को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि इस भरी भरकम कर्ज का उसे क्या लाभ मिला ? समाज और देश को कितना फायदा हुआ ? मोदी जी के चहेते उद्योगपतियों को कितना भयंकर लाभ हुआ? भारतीय जनता पार्टी को किस भयानक रूप से फायदा हुआ?
विचारधारा की तिलांजलि दे, मतदाताओं की भावनाओं को कुचलनेवाले दलबदलू नेताओं को किस विकराल रूप से लाभ हुआ? भ्रष्ट अधिकारियों, ठेकेदारों, सप्लायर्स को किस बेहिसाब रूप से लाभ हुआ? देश और समाज को बिना कोई लाभ दिए मोदी जी ने देश पर विदेशी क़र्ज़ 390% बढ़ा दिया है।
पूर्ववर्ती सरकारों ने देश को सही मायने में आत्मनिर्भर बनाने हेतु अपना अथक योगदान दिया पर मोदी जी के शासनकाल में देश विदेशों पर निर्भर होता जा रहा है। चीन से व्यापार असंतुलन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। वहीं पहले जिस अमेरिका से व्यापार संतुलन हमारे पक्ष में होता था वह अब अमेरिका की ओर झुका दिया गया है, जिसका खामियाजा देशवासियों को ही भुगतना पड़ेगा।
रूस और ईरान जैसे हमारे पुराने घनिष्ठ सहयोगी भी हमसे दूर छिटक गए हैं। दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों से भी बिगड़ते रिश्ते हमारे व्यापारिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं, देश में तनावपूर्ण माहौल के चलते हमारा पर्यटन उद्योग भी दम तोड़ रहा है, शेयर बाजार में बुनियादी खराबी के चलते विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों पर अविश्वास भी बड़ा संकट है।
देशवासियों से अपेक्षा है कि आप भले ही किसी भी विचारधारा या राजनीतिक दल के समर्थक हों पर देश के हितों को प्राथमिकता दें, सरकार से सवाल करें, उसे सचेत करें कि वह नागरिकों के हितों की अवहेलना न करे। सांप्रदायिक तनावरहित, भ्रष्टाचार मुक्त, आधुनिक समझयुक्त, अपने बुनियादी हकों के प्रति जागरूक समाज ही समय की आवश्यकता है। इन खूबियों के सहारे भी आप किसी विचारधारा या दल के समर्थक बन सकते हैं जैसा हमारे पूर्वजों का समाज था। आशा है, हम सकारत्मक बदलाव की ओर मिलकर बढ़ेंगे और सशक्त देश अपनी पीढ़ियों को सौपेंगे।
(परमजीत बॉबी सलूजा का लेख)