भारत जोड़ो न्याय यात्रा की अनदेखी

राहुल गांधी की लोकप्रियता आज सारी हदें पार कर चुकी है। जो कभी उनको पप्पू कहकर मजाक उड़ाते थे, वे आज उनके मुरीद हो चुके हैं, वहीं ढेरों लोग अब उन्हें भारत की आखिरी उम्मीद के रूप में देखने लगे हैं। बहरहाल राहुल गांधी के जितने भी प्रशंसक हैं, वे जब भी उनकी तारीफ में कुछ लिखते हैं ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का उल्लेख तो करते हैं लेकिन अक्सर वे ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की अनदेखी कर जाते हैं। जबकि भारतीय राजनीति पर भारत जोड़ो यात्रा के मुकाबले भारत जोड़ो न्याय यात्रा असर बहुत ज्यादा है।

आइये जरा दोनों यात्राओं के असर का आंकलन किया जाय! स्मरण रहे राहुल गांधी 7 सितम्बर, 2022 से कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर के लिए पदयात्रा पर निकले, जिसे ‘भारत जोड़ो’ यात्रा का नाम दिया गया। वह यात्रा 30 जनवरी, 2023 को श्रीनगर में समाप्त हुई थी। लगभग 145 दिनों तक चली उस यात्रा में उन्होंने 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होते हुए कुल 4,080 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की थी।

कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया भारत जोड़ो यात्रा एक जनांदोलन रहा, जिसका उद्देश्य भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ देश को एकजुट करना रहा। इस यात्रा की परिकल्पना मूल्यवृद्धि, बेरोजगारी, राजनीतिक केन्द्रीकरण और विशेष रूप से भय- कट्टरता की राजनीति और नफरत के खिलाफ लड़ने के लिए की गई थी। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने भाजपा के आईटी सेल और गोदी मीडिया द्वारा पप्पू के रूप में बनाई गई छवि में आमूल परिवर्वर्तन कर उन्हें जननायक के रूप में स्थापित कर दिया था!

भारत जोड़ों न्याय यात्रा की भारी सफलता के बाद राहुल गांधी ने 14 जनवरी, 2024 से भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा 6,713 किलोमीटर लम्बी रही, जिसमे बसों और पैदल यात्रा का मेल रहा। यह यात्रा 15 राज्यों और 110 जिलों से गुजरते हुए 20 मार्च, 2024 को मुंबई में समाप्त हुई थी।  

भारत जोड़ो न्याय यात्रा पूरी तरह आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय तथा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने पर केन्द्रित रही, जिसकी पृष्ठभूमि में रहे रायपुर अधिवेशन से निकले सामाजिक न्यायवादी विचार। भारत जोड़ो यात्रा के कुछ अन्तराल बाद 24 से 26 फरवरी, 2023 तक रायपुर में कांग्रेस का 85 वां अधिवेशन आयोजित हुआ। अतीत में कांग्रेस के अधिवेशनों से युगंतरकारी प्रस्ताव पास होते रहे हैं।

यदि राष्ट्र निर्माण में इसके अधिवेशनों की अहमियत का आकलन किया जाय तो 20वीं सदी में इसका सबसे महत्वपूर्ण 1931 का करांची अधिवेशन रहा, जहाँ से सरदार पटेल की अध्यक्षता में ‘मौलिक अधिकारों’ और ‘राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रमों‘ से सम्बंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पास हुए।

मौलिक अधिकारों के तहत नागरिकों को भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता, संघ बनाने का अधिकार, धर्म के मामले में तटस्थता और बिना भेदभाव के सभी को जीवन निर्वाह योग्य वेतन, काम के निश्चित घंटे, महिला मजदूरों के लिए विशेष सुरक्षा, मजदूरों और किसानों को यूनियन बनाने के अधिकार सहित प्रमुख उद्योगों, खदानों और परिवहन (जैसे: रेल) को सरकारी स्वामित्व में रखने का संकल्प लिया गया।

इन्हीं प्रस्तावों को आधार बनाकर पंडित जवाहरलाल देश के नवनिर्माण में आगे बढ़े और देश की शक्ल बदल डाली! अगर काग्रेस का करांची अधिवेशन 20वीं सदी का सबसे महत्त्वपूर्ण अधिवेशन रहा तो, 21वीं सदी का सबसे उल्लेखनीय अधिवेशन रायपुर रहा, जिसका आयोजन लोकसभा- 2024 को दृष्टिगत रख कर किया गया था। यहाँ से कांग्रेस के इतिहास में पहली बार सामाजिक न्याय से जुड़े ऐसे कई प्रस्ताव पारित हुए, जिसकी उम्मीद कट्टर सामाजिक न्यायवादी दलों तक से भी नहीं की जा सकती!

रायपुर से निकले विचार को ही आधार बनाकर कांग्रेस ने मई, 2023 में अनुष्ठित कर्णाटक विधानसभा चुनाव को सामाजिक न्याय पर केन्द्रित किया। कर्णाटक में रायपुर से निकले सामाजिक न्याय के एजेंडा के अप्रत्याशित रूप से कारगर होने के बाद उसे नवम्बर, 2023 में आयोजित राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के चुनावों में भी आजमाया गया हालांकि जब चुनाव परिणाम आया तो देखा गया कि तेलंगाना को छोड़कर पार्टी अन्य चार राज्यों में कर्णाटक का इतिहास दोहराने में विफल रही।

लेकिन हताश होने बजाय कांग्रेस ने अठारहवीं लोकसभा चुनाव को सामाजिक न्याय और संविधान बचाने पर केन्द्रित करने के लिए ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की परिकल्पना की!                 

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के सौजन्य से अठारहवीं लोकसभा चुनाव में आर्थिक और सामाजिक अन्याय और संविधान पर हमला सबसे बड़े मुद्दा बन गया। ‘जितनी आबादी – उतना हक’ सहित 90 प्रतिशत आबादी को न्याय दिलाना अपने जीवन का मिशन घोषित करने वाले राहुल गांधी 14 जनवरी, 2024 से लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान तक कहते रहे कि ‘आर्थिक और सामाजिक अन्याय सबसे बड़ी समस्या है और भारत को बेहतर बनाना है तो आर्थिक और सामाजिक न्याय  लागू करना होगा!’

इस क्रम में उन्होंने बार-बार दलित, आदिवासी, पिछड़ों को ललकारते हुए कहा था, “ऐ 73 प्रतिशत वालों! ये देश तुम्हारा है। उठो, जागो और आगे बढ़कर अपना हक ले लो!’ ऐसा लगता है मानों राहुल गांधी में बाबा साहब आंबेडकर, लोहिया और मान्यवर कांशीराम की आत्मा एकाकार हो गई थी। उनका आर्थिक और सामाजिक न्याय लागू करने का आह्वान आजाद भारत में डॉ. आंबेडकर के बाद संभवत: सबसे क्रांतिकारी घटना रही!

जहां तक सामाजिक न्याय का सवाल है राहुल गांधी से पूर्व अधिकांश नेताओं और बुद्धिजीवियों ने इसे सरकारी नौकरी, शिक्षा और प्रमोशन में आरक्षण इत्यादि तक सीमित रखा। किन्तु राहुल गांधी ने भारत जोड़ों न्याय यात्रा के दौरान इसे नौकारियों से आगे बढ़कर धन- संपदा और संस्थाओं के बंटवारे तक प्रसारित करने का प्रयास किया। वह आर्थिक और सामाजिक अन्याय के लिये टॉप की उस 3 से 5% आबादी को जिम्मेवार बताते रहे, जिसका धन-संपदा पर बेहिसाब कब्जा हों गया है।

वह सड़कों पर उमड़ी वंचित जनता से लगातार पूछते रहे कि देश में जो टॉप की 500 कंपनियां हैं उनमें कितनों के मालिक और मैनेजर दलित, आदिवासी और पिछड़े हैं? कितने हॉस्पिटल, अखबार और मीडिया संस्थान इत्यादि दलित, आदिवासी और पिछड़ों के हैं? यह सवाल उठाकर वह मोदी – राज में उभरी उस सापेक्षिक वंचना को लगातार तुंग पर पहुंचाने का प्रयास करते रहे, जो सापेक्षिक वंचना वंचितों की क्रांति की आग में घी का काम करती है।

आजाद भारत के इतिहास में जनता के बीच जाकर ऐसे सवाल उनसे पूर्व किसी ने नहीं उठाए थे। आर्थिक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित कराने के लिए भारत जोड़ों न्याय यात्रा के शेष होते-होते उनकी ओर से पांच  न्याय और 25 गारंटियों का विचार सामने आया, जिसका परिष्कृत रूप 5 अप्रैल को 5 न्याय, 25 गारंटी और 300 वादों से युक्त  ‘न्याय पत्र’ के नाम से जारी  कांग्रेस के 48  पृष्ठीय घोषणापत्र में सामने आया!   

जो लोग यह मानकर चल रहे थे कि लोकसभा चुनाव महज एक औपचारिकता है और मोदी के नेतृत्व में एनडीए 400 पार कर लेगा, ऐसे लोगों की धारणा में भी बदलाव आया और भले चुनावों में मोदी तंत्र हावी रहा तथा वह फिर सत्ता में आ गए, लेकिन कई जानकार लोगों ने भी माना कि न्याय पत्र के ज़रिए राहुल गांधी ने लगभग बाजी उलट दी थी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर के मुताबिक मोदी ने 79 सीटों पर केचुआ के जरिये धा धली की। 6 मई, 2026 को राहुल गांधी ने एक्स( X) पर लिखा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का लगभग हर छठा सांसद वोट चोरी के जरिये जीता है!  

बहरहाल भारत जोड़ो न्याय यात्रा में राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय को जो बुलंदी प्रदान की है। राहुल गांधी कहते रहे हैं कि बात सिर्फ़ आरक्षण से नहीं बनेगी, मुकम्मल सामाजिक न्याय के लिए वंचित वर्गों को ‘पॉवर स्ट्रक्चर में हिस्सेदारी’ देनी पड़ेगी। वह अब भी यह सवाल उछलते हैं, “देश को चलाता कौन है? किसी भी देश को उसकी उत्पादक शक्ति चलाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर उत्पादक शक्ति देश को कुछ दे रही है: भोजन देती है; औजार देती है; ये इमारतें देती है तो उस शक्ति के खून – पसीने के लिए देश क्या देता हैं? मेरा लक्ष्य है हिन्दुस्तान में उस उत्पादक शक्ति को रिस्पेक्ट और हिस्सेदारी मिले!”

2026 के नव वर्ष में उन्होंने बहुत ही दृढ़ता के साथ कहा है, “हम आपके साथ हैं और मैं ऐसा दिन देखना चाहता हूँ जब हिन्दुस्तान की हर संस्था और हर सिस्टम में, लीडरशिप में दलित, आदिवासी और पिछड़े हों: मैं वह दिन देखना चाहता हूँ जब हिन्दुस्तान की टॉप 10 कंपनियों का मालिक दलित, आदिवासी पिछड़े वर्ग से हों और मैं उसके लिए लड़ रहा हूँ और लड़ता रहूँगा!’ 

(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के प्रदेश अध्यक्ष हैं।)

Leave a Reply