लखनऊ। भाकपा (माले) ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल को बहाल करने संबंधी दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक अधिकारों और डिजिटल स्पेस में असहमति की आवाज़ की महत्वपूर्ण जीत बताया है।
पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि यह फैसला खासकर जेन-जी की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि सरकार सीजेपी के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का कोई ठोस और वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं कर सकी। वास्तविकता यह है कि डिजिटल व्यंग्य मंच सीजेपी और उसके द्वारा उठाए जा रहे जनसरोकारों के मुद्दों को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन से सरकार असहज और भयभीत हो गई थी।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार को अदालत में अपने कदम पीछे खींचने पड़े, उसी तरह उसे लोकतांत्रिक संवेदनशीलता दिखाते हुए जंतर-मंतर पर आंदोलनरत युवाओं की मांगें भी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि युवाओं का आंदोलन आज 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक तथा आइसा नेताओं की भूख हड़ताल का आज 10वां दिन है। जेएनयू छात्रसंघ की संयुक्त सचिव दानिश, जो भूख हड़ताल पर थीं, उनका स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
सुधाकर यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन को देशभर से लगातार व्यापक समर्थन मिल रहा है। इससे भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं का मनोबल और मजबूत हुआ है, क्योंकि उनकी मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को बिना किसी और देरी के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग कर परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार युवाओं की आवाज़ सुनने के बजाय आखिर उनसे और कितनी कुर्बानी लेना चाहती है?
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)