जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन उठाने और अस्पताल में भर्ती करवाने के विरोध में मुंबई में छात्रों-युवाओं ने प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने कइयों को हिरासत में लिया और बलप्रयोग भी किया।
मुंबई अगेंस्ट सप्रेशन ऑफ़ स्टूडेंट्स (मास) ने एक प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पीटा और घसीटकर वैन में डाला। एक छात्र को काफी चोटें आई थीं लेकिन पुलिस ने उसे जीटी अस्पताल ले जाने में एक घंटा लगाया। पुलिस हिरासत में लिए छात्रों-युवाओं को वैन में घुमाती रही। बाकियों को आज़ाद मैदान पर पाँच घंटे तक हिरासत में रखा गया।
पुलिस ने पाँच लोगों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज किया है।
मास ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है और कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि छात्रों और युवाओं में आक्रोश परीक्षा प्रणाली और शिक्षा प्रणाली की विफलता से उपजा है। नीट पेपर लीक के कारण पिछले दो महीनों में 22 छात्रों की जान जा चुकी है। यह एनटीए जैसी केंद्रीकृत एजेंसियों और नई शिक्षा नीति जैसी नीतियों के दुष्परिणाम स्कूलों के बंद होने में भी दिखते हैं। शिक्षा का बढ़ता निजीकरण, अभूतपूर्व बेरोजगारी, सार्वजनिक शिक्षा की बिगड़ती हालत, कोचिंग पूँजीपतियों के बढ़ते जाल ने युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है।
बयान के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग, जो जंतर-मंतर पर एक महीने से चल रहे आंदोलन के केंद्र में है, को सरकार से जवाबदेही मांगने वाली आम जनता का समर्थन मिल रहा है लेकिन सरकार ने इसे लेकर लोगों में बढ़ते असंतोष को दूर करने के बजाय प्रतिरोध और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में लगी है। हालांकि लोगों की आवाज़ दबाने की यह कोशिश सफल नहीं होगी।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)