सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए में सुधार, फुलप्रूफ परीक्षा और राधाकृष्णन समिति के सुझावों पर नया हलफनामा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के लिए एक मज़बूत और असरदार संस्था की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।नीट परीक्षाओं में सुधारों को संस्थागत रूप देने की ज़रूरत को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से परीक्षा को फुलप्रूफ (पूरी तरह सुरक्षित) बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछा। कोर्ट ने राधाकृष्णन पैनल और नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के बारे में भी जानकारी मांगी।

सुप्रीम कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से वकील तन्वी दुबे द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में नया हलफनामा दाखिल करने को कहा। केंद्र को तीन हफ़्ते के भीतर हलफनामा जमा करना होगा।

पीठ ने कहा, “राधाकृष्णन समिति ने सही कहा है कि यह एक सिस्टम से जुड़ी समस्या है जिसे संस्थागत रूप देने की ज़रूरत है, और यही इसका सबसे अहम हिस्सा है। कागज़ पर तो यह प्रक्रिया अच्छी लगती है। लेकिन एक परीक्षा होती है और जब तक दूसरी परीक्षा होती है, तब तक स्थिति बिल्कुल बदल चुकी होती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और एनटीए से कहा कि मकसद टेस्टिंग एजेंसी के काम का माइक्रो-मैनेजमेंट (हर छोटी-छोटी बात पर दखल देना) करना नहीं है। हालांकि, उसने एनटीए को संस्थागत रूप देने की मांग की। कोर्ट ने कहा कि केवल ऐसा करके ही बार-बार होने वाले पेपर लीक को रोका जा सकता है।

पीठ के अनुसार, जल्दबाज़ी में किए गए अस्थायी समाधानों के बजाय एक स्थायी सिस्टम की ज़रूरत है। कोर्ट ने निरंतरता की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुधार और सिफारिशें केवल कागज़ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें असल में लागू किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने नीलेकणि समिति से राधाकृष्णन पैनल द्वारा सुझाए गए अच्छे सुधारों को अपनाने के लिए भी कहा। कोर्ट को बताया गया कि नीलेकणि कमिटी कई सुझावों पर विचार करने के लिए बैठक करने वाली है। इन सुझावों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाना और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना शामिल है।

मेहता ने कोर्ट को बताया कि नीट का प्रश्न पत्र छपने से लेकर छात्रों तक पहुँचने तक की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, नीटपरीक्षा के लिए जो सिस्टम बनाया गया है, वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें सेंध लगाना मुश्किल है।

मेहता ने बताया कि नीट के प्रश्न पत्र ले जाने वाली गाड़ियों में जीपीएस लगा होता है और उनकी छोटी-छोटी हलचल भी रिकॉर्ड होती है।इस मामले की अगली सुनवाई तीन हफ़्ते बाद होगी।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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