रांची। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और इंकलाबी नौजवान सभा का कहना है कि न्यायालय के पाले में गेंद डालकर हेमंत सरकार निश्चिंत नहीं रह सकती। सरकार को छात्र-अभ्यर्थियों के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना होगा और इस मामले के न्यायपूर्ण समाधान के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने होंगे।
संगठनों ने शूरकवार, 21 अगस्त को महेंद्र सिंह भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में माँग की कि प्रतियोगी परीक्षाओं की धांधली की त्वरित जांच कर झारखंड सरकार अभ्यर्थियों को न्याय दे।
प्रेस को संबोधित करते हुए इंकलाबी नौजवान सभा के महासचिव नीरज कुमार ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी में धांधली, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ झारखंड के छात्र-नौजवान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने इसे रद्द तो किया, लेकिन उसके उचित होमवर्क के अभाव में हाईकोर्ट द्वारा इस पर स्टे लगा दिया गया। यह बात बिल्कुल सही है कि जेपीएससी-जेएसएससी शुरू से ही भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल और सीडीपीओ की परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। सरकार को चाहिए कि सीआईडी जांच के बाद जो परीक्षाएं शक के दायरे में हैं, उनकी एसआईटी जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद जिन लोगों ने धांधली कर परीक्षा में प्रवेश किया है, उन्हें चिन्हित कर बाहर किया जाना चाहिए। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके।
उन्होंने कहा कि जेपीएससी की 11वीं-13वीं परीक्षा को रद्द करने, उसके बाद एफएसओ और अब जेएसएससी-सीजीएल और सीडीपीओ के मामले सामने आए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। सरकार को छात्रों के पक्ष में खड़ा होकर पूरे मामले की जांच करानी चाहिए, ताकि सही लोगों को उनका हक मिल सके और अनियमित तरीके से आए लोगों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अलग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच का गठन इसलिए जरूरी है, क्योंकि 50 से ज्यादा मामले शक के दायरे में हैं।
वहीं, आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ ने कहा कि 24 अगस्त को धनबाद में छात्र-युवा संसद आयोजित की जा रही है। इस संसद में जंतर-मंतर आंदोलन से लेकर बिहार और झारखंड के आंदोलन में रहे चर्चित चेहरे शामिल होंगे। यहां छात्रों-नौजवानों के साथ पेपर लीक, धांधली, भ्रष्टाचार, रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर चर्चा होगी।
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार रोजगार के मुद्दे पर फेल हुई हैं। जंतर-मंतर और रांची के आंदोलन की दिशा तथा छात्र-नौजवानों के सवालों पर संघर्ष तेज करने को लेकर भी चर्चा होगी। झारखंड के छात्रवृत्ति, क्लस्टर सिस्टम रद्द करने, लेट सेशन जैसे छात्रों के सवालों और छात्र संघ के मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में भी नौकरियां नहीं, बल्कि जुमला मिला है। बैंक, रेलवे जैसे क्षेत्रों में केंद्र सरकार रोजगार देने के सवाल पर फेल हुई है।
वहीं भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि लंबे आंदोलनों के बाद जेपीएससी-जेएसएससी आदि परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ छात्र-नौजवानों को मिली जीत उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश से फिलहाल नए कानूनी पेच में फंस चुकी है।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय इस तरह के संवेदनशील मसलों को किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचा सकता है या नहीं, यह कहना मुश्किल है। ऐसे कई मामले पहले भी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन रहे हैं, लेकिन उनका कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में केवल न्यायालय के फैसले का इंतजार करने से छात्र-अभ्यर्थियों की समस्या का समाधान नहीं होगा।
मनोज भक्त ने कहा कि छात्रों-अभ्यर्थियों को इस दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए हेमंत सरकार को कानूनी तौर पर कारगर पहल करने की जरूरत है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए। लंबे समय से परीक्षा में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्र-नौजवान आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांगों और उनके भविष्य के साथ सरकार को गंभीरता से पेश आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के पाले में गेंद डालकर हेमंत सरकार निश्चिंत नहीं रह सकती। सरकार को छात्र-अभ्यर्थियों के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना होगा और इस मामले के न्यायपूर्ण समाधान के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने होंगे।
भाकपा माले राज्य सचिव ने कहा कि परीक्षा में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर रोक और समयबद्ध नियुक्ति छात्र-युवाओं का अधिकार है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का खामियाजा ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को न भुगतना पड़े। छात्र-नौजवानों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)