हरियाणा के सिरसा में डेरा सच्चा सौदा का मुखिया गुरमीत सिंह उर्फ़ राम रहीम संगीन अपराधियों के ‘गुड कंडक्ट’ का अनूठा उदाहरण बन गया है जिसको जेल से परोल या फर्लो की बार बार अस्थायी छूट किसी चुनाव की हलचलों के आसपास इत्तेफाकन ही जा मिलती है।
25 अगस्त 2026 को फिर से साल में तीसरी बार गुरमीत सिंह उर्फ़ राम रहीम को 21 दिन की फर्लो के तहत जेल से बाहर रहने की अस्थायी छूट मिली है। बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में सजायाफ्ता अपराधी को 17 वीं बार छूट मिलना अपने आप में सवाल खड़े करता है। 26 जून 2026 को ही गुरमीत सिंह उर्फ़ राम रहीम 30 दिन की पैरोल काट कर जेल वापिस आया था।
सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा अगस्त 2017 में गुरमीत सिंह को डेरा की दो साध्वियों से बलात्कार करने के अपराध में सजा मिली हुयी है । इसके साथ ही गुरमीत सिंह को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले भी सजा हुई थी (छत्रपति की हत्या के मामले से हालाँकि हाल में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने राम रहीम को बरी किया था, जिस फ़ैसले को पत्रकार के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है)।
डेरा सच्चा सौदा खुद को सामाजिक आध्यात्मिक संगठन के तौर पर प्रचारित करता है जो आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक कल्याण, मानवता और नैतिकता के प्रसार के लिए काम करता है।
डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी और मजबूत संगठन पंजाब के 8 मुख्य जिलों बठिंडा, मानसा, संगरूर, फाजिल्का, मुक्तसर, फरीदकोट बरनाला और मोगा में भी माने जाते हैं। डेरा सच्चा सौदा का एक अन्य बड़ा आश्रम पंजाब के मालवा क्षेत्र के सलाबत पुरा (जिला बठिंडा) में है। पंजाब में विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में होने हैं और प्रदेश में राजनीतिक समीकरण साधने की हलचल अब पूरी तरह शुरू हो चुकी है।
अगर 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव को रणनीतिक नजरिए से देखें, तो डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव पूरे पंजाब पर नहीं, बल्कि मालवा सहित 25–40 सीटों पर निर्णायक या अर्ध-निर्णायक हो सकता है। 2007 के विधानसभा चुनावों डेरा ने कथित तौर पर अकाली दल (बादल) को समर्थन दिया था, जिसका इनाम डेरा मुखी गुरमीत सिंह को दशम पातशाही गुरु गोबिंद सिंह की नकल करने की बेअदबी की माफ़ी के रूप में श्री अकाल तख्त से दिया गया था। मालवा क्षेत्र में 69 विधानसभा सीटें हैं।
2022 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को भारी बहुमत इस पूरे क्षेत्र में मिला और 66 सीटों पर जीत मिली थी। पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत को देखें तो आम आदमी पार्टी को 42 %, कांग्रेस को 22.98 %, शिअद को 18.38 % और भाजपा को 6.6 % वोट मिले थे।
वोटों की संख्या देखें तो 2022 में आम आदमी पार्टी को कुल 65, 38, 783 वोट मिले जबकि कांग्रेस को 35, 76, 684 मत मिले। शिअद को 28, 61, 286 वोट प्राप्त हुए और भाजपा को 10, 27, 143 वोट मिले थे। पहले स्थान पर रही आम आदमी पार्टी को 92 सीट मिली जबकि दूसरे स्थान की कांग्रेस को केवल 18 और अकाली दल केवल 3 सीट तक सीमित हो कर रह गया।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच 29, 62, 099 वोट का अंतर रहा। 2027 में चुनावी मुकाबले बहुत करीबी रहने वाले हैं क्योंकि अबकी बार बहुकोणीय मुकाबले में अकाली दल के असंतुष्ट नयी दिशा में ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ आगे बढ़ सकते हैं। करीबी मुकाबलों में 2–8% वोट का झुकाव परिणाम बदल सकता है।
शिअद ने मालवा में अपनी खोयी हुए राजनितिक जमीन की लड़ाई इन चुनावों में फिर से गुरु साहिबान की पंथक छाया के तले लड़ने की रणनीति को सार्वजनिक रूप से घोषित कर दिया है। सुखबीर सिंह बादल की सिख पंथ के पवित्र तख्त श्री हज़ूर साहेब नान्देड़ की यात्रा और अब तख्त श्री दमदमा साहेब तलवंडी साबो, बठिंडा की यात्रा इसके साफ संकेत हैं।
शिअद पर पंजाब में अकाली दल की सरकार के काल में हुयी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले में इंसाफ न किये जाने के दोष भी लगते रहे हैं। बेअदबी मामले में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की भूमिका का खुलासा भी साफ तौर पर हो चुका है। पूर्व आई जी रणबीर सिंह खटड़ा की अध्यक्षता में बनी एसआईटी ने सीधे तौर पर डेरा मुखी गुरमीत सिंह उर्फ़ राम रहीम को अपनी रिपोर्ट में बेअदबी घटना की साजिश का दोषी कर दिया है।
शिअद का गढ़ माने जाने वाले मालवा के क्षेत्र में पंथक मतदाताओं की ताकत में बिखराव पहले ही कई धड़ों के चलते होने लगा है। 2 दिसम्बर 2025 के श्री अकाल तख्त साहेब की फ़सील के फैसले के बाद नए अकाली दल (पुन सरजीत) का गठन हुआ।
समान्तर तौर पर दीप सिद्धू द्वारा बनाये गए संगठन वारिस पंजाब दे, जो कि अब तरनतारन से चुने गए सांसद अमृतपाल द्वारा पंजाब में राजनीतिक तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है, ने 2024 में लोकसभ चुनाव में 2 लोकसभा सीट जीत कर एक अलग पंथक राजनीतिक संगठन को स्थापित कर दिया। 2027 विधान सभा चुनावों में ‘वारिस पंजाब दे’ की रणनीति पूरे पंजाब में अपने प्रत्याशी उतारने की है।
पंथक राजनीति को वारिस पंजाब दे पुनः परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है और अपना प्रभाव स्थापित करने में लगा है। मालवा का यह क्षेत्र किसान संगठनों का गढ़ माना जाता है। आम आदमी पार्टी से किसानों के निरंतर टकराव की स्थितियों ने भी मतदाताओं में असंतोष को पिछले साढ़े चार साल में बढ़ाया ही है।
भाजपा पंजाब में अकले ही सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा को बार बार से पुख्ता करने के बयान लगातार दे रही है। मनप्रीत सिंह बादल को हाल ही में भाजपा ने पंजाब से पार्टी का महासचिव बना कर आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2026 में पंजाब के एक और बड़े डेरे सचखंड बल्लां जालंधर में स्वयं जा कर गुरु रविदास जयंती समारोह में शिरकत की थी।
2024 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधा स्वामी डेरा व्यास में जाकर डेरा प्रमुख संत गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की थी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सिख प्रतीक पगड़ी पहन कर निरंतर पंजाब में जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। भाजपा हालांकि अपनी पूरी पैठ पंजाब में अभी बना नहीं पायी ही लेकिन रणनीतिक तौर पर गभीर प्रयासों में अवश्य लगी हुयी है।
कांग्रेस और डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत सिंह का विरोध निरन्तर रहा है। 2017 में सज़ा सुनाये जाने वाले दिन पंचकुला में हुयी हिंसा में 38 लोगों ने जान गंवाई थी। कांग्रेस भाजपा पर संरक्षण देने के आरोप लगाती रही है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने गुरमीत सिंह राम रहीम की फर्लो पर सख्त आलोचना करते हुए सिखों के प्रति सरकार द्वारा दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
श्री अकाल तख्त साहेब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज ने कहा कि जो लोग बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के सजायाफ्ता हैं उनको परोल उतनी आसानी से मिल जा रही है जैसे वो पिकनिक पर हो और जो बंदी सिंह हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली उनको कोई राहत मिलती नहीं।
राजनीतिक तौर पर डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत सिंह राम रहीम की पैरोल के कई मायने हो सकते हैं। कांग्रेस की अंदरूनी कलह ने अभी से पंजाब में कांग्रेस की कोई लहर बनने की संभावनाओं को हाशिये पर डाल दिया है। डेरा का झुकाव कांग्रेस के तरफ होना मुमकिन नहीं लगता।
शिअद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में कोई समर्थन अब अपनी साख के सवाल पर गुरमीत सिंह राम रहीम से ले नहीं पायेगा। भाजपा अकेले पंजाब में इतनी सीट जीतने की स्थिति में फ़िलहाल दिखाई दे नहीं रही है की वो सरकार बना सके। आम आदमी पार्टी के प्रति असंतोष इस क्षेत्र में बहुत बढ़ा हुआ है। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान श्री अकाल तख्त साहिब से सीधे टकराव में काफी समय से हैं। डेरा किस किस राजनीतिक दल या विचारधारा को सीटों के मुताबिक समर्थन देगा या केवल एक तरफ निर्णय करेगा इस पर अभी अनुमान ही लगाए जा रहे हैं।
(जगदीप सिंह सिंधु वरिष्ठ पत्रकार हैं।)