अब चुनाव आयोग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट हुआ सख्त, पंचायत चुनाव ड्यूटी में 135 लोगों की मौत पर पूछा- क्यों न चले मुकदमा

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पहले मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना संकट के लिए चुनाव आयोग को जमकर फटकार लगाई और यहां तक कह कि चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा क्यों न चलाया जाए, अब  उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के दौरान चुनावी ड्यूटी पर तैनात 135 लोगों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है कि क्यों न उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाए। यह आदेश न्यायाधीश सिद्धार्थ वर्मा और अजित कुमार की खंडपीठ ने परित किया है।

खंडपीठ ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए नोटिस जारी किया और कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान सरकारी गाइडलाइंस का पालन क्यों नहीं किया गया। अब ड्यूटी कर रहे 135 लोगों की मौत की खबर है। खंडपीठ ने आयोग से जवाब मांगा कि क्यों न उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए और आपराधिक अभियोग चलाया जाए। साथ ही खंडपीठ ने रह गए चुनाव में तुरंत कोरोना गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। खंडपीठ ने अवहेलना करने पर चुनाव करवा रहे अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

खंडपीठ ने इसके साथ ही कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए सरकारी रवैये की भी कड़ी आलोचना की है। खंडपीठ ने कहा है कि सरकार मनमानी का रवैया छोड़े और लोगों के सुझावों पर भी अमल करे। खंडपीठ ने अधिक संक्रमित नौ शहरों के लिए कई सुझाव दिए हैं, साथ ही उन पर अमल करने और सचिव स्तर के अधिकारी के हलफनामे के साथ 3 मई तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

खंडपीठ ने प्रदेश के नौ शहरों, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर नगर, आगरा, गोरखपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और झांसी के जिला जजों को आदेश दिया है कि सिविल जज सीनियर रैंक के न्यायिक अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप मे तैनात करें। ये शासन की ओर से बनाई गई कोरोना मरीजों की रिपोर्ट सप्ताहांत में महानिबंधक हाई कोर्ट को भेजें। मामले की अब अगली सुनवाई 3 मई को होगी।

खंडपीठ ने कोरोना मामले में कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की है कि कोरोना का भूत गली, सड़क पर दिन-रात मार्च कर रहा है। लोगों का जीवन भाग्य भरोसे है। कोरोना के भय से लोगों ने स्वयं को अपने घर में लॉकडाउन कर लिया है। सड़कें रेगिस्तान की तरह सुनसान हैं। भारी संख्या मे लोग संक्रमित हो रहे हैं और जीवन बचाने के लिए बेड की तलाश मे अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल मरीजों की जरूरत पूरी करने मे असमर्थ हैं। डॉक्टर, स्टाफ थक चुके हैं। जीवन रक्षक दवाएं, इंजेक्शन की मारामारी है। ऑक्सीजन, मांग और आपूर्ति के मानक पर खरी नहीं उतर रही। सरकार के उपाय नाकाफी हैं।

खंडपीठ ने सचिव गृह तरुण गुप्ता द्वारा उठाए गए कदमों और बनाई योजना को मानने से इंकार कर दिया और कुछ सुझाव देते हुए अमल करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कहा है कि बड़े शहरों में मरीजों का हेल्थ बुलेटिन जारी करें, ताकि मरीजों के परिजन का अस्पताल पर दबाव न बढ़े और अस्पताल की सफाई आदि आसानी से हो सके। यही नहीं, जिला पोर्टल पर अस्पतालों में बेड की स्थिति की जानकारी दी जाए।

खंडपीठ ने चेतावनी दी है कि पेपर वर्क बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन खंडपीठ ने सरकार के प्लान को खारिज करते हुए नये सिरे से प्लान तैयार करने का आदेश दिया है और कहा है कि अभी तक के प्लान सुरसा के मुंह की तरह फैले पेंडेमिक का सामना करने में सक्षम नहीं हैं। इसके साथ ही नए प्लान का ब्लू प्रिंट देने को कहा है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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