ऐपवा ने महिलाओं समेत 39 लोगों की रिहाई की मांग की

पटना। पिपरा थाना अंतर्गत बेहरावां चकिया गांव की 32 महिलाओं समेत 39 लोगों की बेऊर जेल से रिहाई और तीन महादलितों की मौत की जवाबदेही तय कर पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पीड़ित परिवार के सदस्य शामिल हुए।

प्रदर्शनकारे गेट पब्लिक लाइब्रेरी से मार्च निकालते हुए गर्दनीबाग धरनास्थल तक पहुँचे जहां प्रशासन ने गेट बंद कर दिया था। प्रदर्शनकारी धरनास्थल पर ही जमे रहे और नारेबाजी करते रहे और सभा का आयोजन किया। सभा को ऐपवा महासचिव मीना तिवारी, विधानपरिषद सदस्य शशि यादव, पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने संबोधित किया।

ऐपवा महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि पटना जिले के बेहरावां चकिया गांव में 4 अक्टूबर को पुलिस ने शराब खोजने के बहाने छापेमारी की और इस छापेमारी के नाम पर वहां मौजूद महिलाओं के साथ बुरा व्यवहार किया गया और 32 महिलाओं समेत 39 लोगों को गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार छापेमारी से डर कर कुछ लोग बगल की नदी में कूद गए थे, पुलिस ने पानी के भीतर ही पत्थर मारकर सबको डुबाए रखा जिससे रामू मांझी और अशोक मांझी की मृत्यु हो गई।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में दलितों महादलितों पर पुलिसिया उत्पीड़न चरम पर है।महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा है। भाजपा की सरकार और पुलिस महिलाओं पर जुल्म ढा रही हैं एवं फर्जी मुकदमे में जेल ढा रही हैं।

विधान परिषद सदस्य शशि यदव ने कहा कि आज पुरे बिहार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस और अपराधी दोनों महिलाओं का उत्पीड़न कर रहे हैं, महादलितों का उत्पीड़न कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में ऐपवा ने गिरफ्तार 39 लोगों की रिहाई, पूरे मामले की जांच करवाने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवज़े की माँग की।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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