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Friday, September 24, 2021

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अरुंधति रॉय

हम खुद एक ऐसे बीमार समाज में रहते हैं, जिसमें भाईचारे और एकजुटता की भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है: अरुंधति

(विश्व प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय ने दलित कैमरा पोर्टल को एक लंबा साक्षात्कार दिया है। इसमें उन्होंने अमेरिका और यूरोप में चल रहे नस्लभेद विरोधी आंदोलन से लेकर भारत में कोरोना की स्थित तक पर अपने विचार जाहिर किए...

राज करने वाले मर चुके हैं, जो चाहिए छीन कर लेना होगा: अरुंधति

(विश्व-प्रसिद्ध लेखिका, प्रखर विचारक और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर के सत्ता वर्ग द्वारा रचे गए षड्यंत्रों के ख़िलाफ़ लगातार मुखर हैं। वे लगातार लिख रही हैं, बोल रही हैं और सच्चाई को सीधे...

लॉक डाउन के बाद हमें जवाबदेही का पूरा हिसाब-किताब चाहिए: अरुंधति रॉय

लॉकडाउन के बाद मुझे सबसे ज्यादा किस चीज़ की उम्मीद होनी चाहिए? सबसे पहले मुझे बहुत बारीकी से तैयार किया गया जवाबदेही का एक बहीखाता चाहिए। 24 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर 138 करोड़ इंसानों...

पूंजीवाद के इंजन को हमेशा के लिए बंद करना ही हमारा काम: अरुंधति रॉय

कोरोनावायरस की महामारी ने पूंजीवाद के इंजन को रोक दिया है। परन्तु यह एक अस्थाई स्थिति है। आज जब पूरी मनुष्य जाति कुछ समय के लिए अपने घरों में कैद है तब धरती ने खुद ही अपने ज़ख्म भरने...

दिखावे बहुत हो चुके ! अब ज़रूरत है दिल, दिमाग और जवाबदेही से योजना बनाने की: अरुंधति रॉय

भारतीय अभिजात मीडिया और सत्ता-प्रतिष्ठान की बेनाम प्रवासी मजदूरों की  आकस्मिक और हृदय को छू जाने वाली त्रासदी की खोज के बारे में मैं रोज़ पढ़-सुन रही हूँ। ऐसा लगता हैं ये सब टीकाकार समकालीन इतिहास के साथ-साथ अनेक...

यह वैश्विक महामारी एक नई दुनिया का प्रवेश द्वार है: अरुंधति रॉय

अंग्रेजी में “वायरल होना" (किसी वीडियो, संदेश आदि का फैलना) शब्द को सुनते ही अब किसको थोड़ी सिहरन नहीं होगी? दरवाजे के हैंडल, गत्ते का डिब्बा या सब्जी का थैला देखते ही किसकी कल्पना में उन अदृश्य छींटों के...

लोगों से पटी हिंदुस्तान की सड़कें ही दे सकती हैं सब कुछ खत्म न होने का भरोसा

भारत सरकार को बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध में अपनी भूमिका पर बहुत फख्र है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के सहयोगी देश चीन और अमेरिका की धमकियों की परवाह नहीं की और नरसंहार को रोकने के लिए भारतीय सेना भेजी...

‘ह्यूस्टन स्टेडियम में 60 हजार लोगों के कान के परदे फाड़ देने वाला हल्ला भी नहीं दबा सका कश्मीर का सन्नाटा’

धार्मिक अल्पसंख्यकों पर खुले हमलों के अतिरिक्त आज हम जिससे गुजर रहे हैं वह यह है कि वर्ग और जाति युद्ध विकराल रूप ले रहा है। 26 सितम्बर 2019 को भारत नियंत्रित कश्मीर के श्रीनगर में कश्मीरी पुरुषों ने मशाल जुलूस निकाला।...

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