Tuesday, March 5, 2024

सुभाष चंद्र कुशवाहा

मेरी रूस यात्रा-3: शहर ही नहीं रूस के गांव भी हैं बेहद समृद्ध

हमारा अगला पड़ाव मॉस्को से 220 किलोमीटर पूरब, रूस का लगभग 1000 साल पुराना शहर व्लादीमिर था। यहां तक की यात्रा 3 घंटे 30 मिनट में पूरी हुई। यहां पेट्रोल 50.19 रुपये प्रति लीटर है इसलिए टैक्सी उतनी महंगी...

मेरी रूस यात्रा-2: मानो उठ खड़े होंगे सामने लेटे लेनिन

हमारी यात्रा का अगला पड़ाव पीटर द ग्रेट महल पर था जो सेंट पीटर्सबर्ग से 40 किलोमीटर दूर, समुद्र के किनारे बेहद खूबसूरत और रमणीक स्थान पर बना है। इसे रूसी भाषा में पीटरहॉफ पैलेस कहा जाता है। देखा...

मेरी रूस यात्रा-1: संस्कृति और इतिहास संजोयी धरती का दर्शन

सोवियत संघ को देखने की तमन्ना अधूरी रह जाने के बावजूद, रूस को देखने की चाह बहुत दिनों से थी। मन के कोने-अतरे में यह सोच उमड़ती कि शायद इतिहास के अवशेषों से धरती पर स्थापित पहली समाजवादी सत्ता...

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने बढ़ा दिया बैंकों के एनपीए का संकट

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की शुरुआत छोटे कारोबारियों के कारोबार हेतु कर्ज उपलब्ध कराने से हुई है। इसके अंतर्गत शिशु लोन, पचास हजार तक, किशोर लोन 5 लाख तक और तरुण लोन 10 लाख तक विभिन्न ब्याज दरों पर...

पूर्वांचल में बढ़ता आत्महत्याओं का ग्राफ

भूख, गरीबी, कर्ज और अपराध की गिरफ्त में पूर्वांचल का समाज, अवसाद की अंधेरी कोठरी में समाने लगा है। स्थिति नियंत्रण से बाहर दिख रही है और जागरुक लोग चिंतित हैं कि आखिर इसका समाधान क्या है? किसान और...

राजनैतिक हलवाही के खिलाफ

बाबू जगदेव प्रसाद जी का समय और समाज, दोनों जिन विडंबनाओं से गुजरे हैं और उन्होंने जिस वैचारिकी की नींव आजादी के बीस साल बाद ही रख दी, उनके निहितार्थ और प्रयोग के साधनों पर विमर्श किया जाना जरूरी...

अमेरिकी पतवार के हवाले भारतीय विदेशी नीति की नाव

आजादी के बाद भारतीय विदेशी नीति पंचशील सिद्धांतों के सहारे बुनी गयी थी और गुटनिरपेक्षता उसके केन्द्र में थी। एक-दूजे की क्षेत्रीय अखण्डता और संप्रभुता का आदर, पारस्परिक आक्रमण या हस्तक्षेप रहित समता, आपसी लाभ के लिए शांतिपूर्ण सह...

जातिगणना पर हायतौबा क्यों?

जातिगणना की मांग जोर पकड़ने लगी है। पक्ष और विपक्ष में दावे अपनी जगह हैं और जनगणना जैसी जरूरी और वैज्ञानिक प्रक्रिया से समाजिक संदर्भों का अध्ययन, अपनी जगह है। ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता द्वारा संग्रहीत गजेटियर आज भी भारत...

वंचित समाज की राजनीतिः स्वार्थ और सत्ता से समझौते तक

भारत के जातिवादी समाज का निर्माण, धर्मसत्ता और सामंतशाही की सेवा और मेवा के लिए किया गया है। आज की धर्मसत्ता और सामंतशाही, जातिवाद को तानते, नाथते, फंदों में फंसाते, वंचितों को गुलाम बना रही है। गैर बराबरी की...

समाजवादी पार्टी की दावेदारी, अभी रोड़े हैं इस राह में

केन्द्रीय सत्ता की चाबी और राजनीति का ताला जैसा उत्तर प्रदेश, चुनावी दंगल के करीब है। बिसात बिछाने और गठबन्धन बनाने की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। ट्विटर से उलझन के बावजूद, ट्वीट के माध्यम से घात-प्रतिघात जारी है।...

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ग्रामीण अर्थतंत्र के बीच किसानों की जिजीविषा को बड़े परिदृश्य पर रखता हरियश राय का उपन्‍यास माटी-राग

वाणी प्रकाशन समूह द्वारा प्रकाशित हरियश राय के नये उपन्‍यास माटी- राग का लोकार्पण विश्व पुस्‍तक मेले में किया...