Tuesday, January 18, 2022

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सुभाष चंद्र कुशवाहा

एक बार फिर मण्डल बनाम कमण्डल!

उत्तर प्रदेश में हर रोज राजनैतिक भूचाल के झटके लग रहे हैं। बहुजन विमर्श, जिसे विगत वर्षों में आखेट कर लिया गया था, एक बार फिर चर्चा में आ चुका है। मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफे आ रहे हैं।...

‘भील विद्रोहः संघर्ष के सवा सौ सवाल’ यानि जुल्म और प्रतिकार का पहला दस्तावेज

(देश में भीलों की अलग-अलग रूपों में चर्चा होती रही है। इस बात में कोई शक नहीं कि वो जेहनी तौर पर विद्रोही और लड़ाके थे। लेकिन उनके इस पक्ष पर न तो अलग से कोई शोध हुआ और...

मेरी रूस यात्रा-3: शहर ही नहीं रूस के गांव भी हैं बेहद समृद्ध

हमारा अगला पड़ाव मॉस्को से 220 किलोमीटर पूरब, रूस का लगभग 1000 साल पुराना शहर व्लादीमिर था। यहां तक की यात्रा 3 घंटे 30 मिनट में पूरी हुई। यहां पेट्रोल 50.19 रुपये प्रति लीटर है इसलिए टैक्सी उतनी महंगी...

मेरी रूस यात्रा-2: मानो उठ खड़े होंगे सामने लेटे लेनिन

हमारी यात्रा का अगला पड़ाव पीटर द ग्रेट महल पर था जो सेंट पीटर्सबर्ग से 40 किलोमीटर दूर, समुद्र के किनारे बेहद खूबसूरत और रमणीक स्थान पर बना है। इसे रूसी भाषा में पीटरहॉफ पैलेस कहा जाता है। देखा...

मेरी रूस यात्रा-1: संस्कृति और इतिहास संजोयी धरती का दर्शन

सोवियत संघ को देखने की तमन्ना अधूरी रह जाने के बावजूद, रूस को देखने की चाह बहुत दिनों से थी। मन के कोने-अतरे में यह सोच उमड़ती कि शायद इतिहास के अवशेषों से धरती पर स्थापित पहली समाजवादी सत्ता...

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने बढ़ा दिया बैंकों के एनपीए का संकट

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की शुरुआत छोटे कारोबारियों के कारोबार हेतु कर्ज उपलब्ध कराने से हुई है। इसके अंतर्गत शिशु लोन, पचास हजार तक, किशोर लोन 5 लाख तक और तरुण लोन 10 लाख तक विभिन्न ब्याज दरों पर...

पूर्वांचल में बढ़ता आत्महत्याओं का ग्राफ

भूख, गरीबी, कर्ज और अपराध की गिरफ्त में पूर्वांचल का समाज, अवसाद की अंधेरी कोठरी में समाने लगा है। स्थिति नियंत्रण से बाहर दिख रही है और जागरुक लोग चिंतित हैं कि आखिर इसका समाधान क्या है? किसान और...

राजनैतिक हलवाही के खिलाफ

बाबू जगदेव प्रसाद जी का समय और समाज, दोनों जिन विडंबनाओं से गुजरे हैं और उन्होंने जिस वैचारिकी की नींव आजादी के बीस साल बाद ही रख दी, उनके निहितार्थ और प्रयोग के साधनों पर विमर्श किया जाना जरूरी...

अमेरिकी पतवार के हवाले भारतीय विदेशी नीति की नाव

आजादी के बाद भारतीय विदेशी नीति पंचशील सिद्धांतों के सहारे बुनी गयी थी और गुटनिरपेक्षता उसके केन्द्र में थी। एक-दूजे की क्षेत्रीय अखण्डता और संप्रभुता का आदर, पारस्परिक आक्रमण या हस्तक्षेप रहित समता, आपसी लाभ के लिए शांतिपूर्ण सह...

जातिगणना पर हायतौबा क्यों?

जातिगणना की मांग जोर पकड़ने लगी है। पक्ष और विपक्ष में दावे अपनी जगह हैं और जनगणना जैसी जरूरी और वैज्ञानिक प्रक्रिया से समाजिक संदर्भों का अध्ययन, अपनी जगह है। ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता द्वारा संग्रहीत गजेटियर आज भी भारत...

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भारत के 98 अरबपतियों के पास 55.5 करोड़ लोगों के बराबर संपत्ति, 84 प्रतिशत परिवारों की आय घटी: ऑक्सफैम रिपोर्ट

जहां एक ओर आरएसएस-भाजपा ने पूरे देश में एक धार्मिक उन्मादी माहौल खड़ा करके लोगों को हिंदू-मुसलमान में बुरी...