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Wednesday, September 29, 2021

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विमल कुमार

‘स्त्री दर्पण’ ने उठायी स्त्रियों की आवाज़

सोशल मीडिया में जहां रोज स्त्रियों को ट्रोल किया जा रहा है, वहीं स्त्रियों ने अपनी आवाज़  खुद बुलंद करनी शुरू कर दी है और इसके लिए अपना डिजिटल प्लेटफार्म बनाया है। इन  स्त्रियों ने कई डिजिटल प्लेटफार्म बनाकर ...

ढह गया हिंदी-उर्दू के बीच का एक पुल

हिंदी और उर्दू के बीच पुल बनाने वाले अब बहुत कम लेखक रह गए हैं। अली जावेद उन लेखकों की मानो अंतिम कड़ी थे। हिंदुस्तान की साझी विरासत और दो जुबान की आपसी दोस्ती को जिंदा रखने वाले लेखक...

इतिहास को बदलने की मोदी की नाकाम कोशिश

भारतीय जनता पार्टी जब भी सरकार में आती है, वह न केवल इतिहास से छेड़छाड़ करती है, बल्कि वह पाठ्यक्रमों में भी बदलाव करती है और दक्षिणपंथी मूल्यों की रचनाओं को उसमे घुसेड़ने का काम करती हैं। इसके एक नहीं...

हिंदी रंग आलोचना के शिखर पुरुष नेमिचन्द्र जैन की रचनावली का प्रकाशन एक ऐतिहासिक घटना

नेमि जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। कम्युनिस्ट पार्टी से लेकर इप्टा आंदोलन में सक्रिय रहे नेमि जी कवि, आलोचक  रंग चिंतक  संपादक  नाटक कार और अनुवादक  भी। साहित्य की हर विधा में योगदान दिया। 8 खण्डों में छपी...

दूरदर्शन पत्रकार सुधांशु ने तीस साल बाद जीती कानूनी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय पर लगाया एक लाख जुर्माना

(पत्रकारिता पेशे  के बारे में कई बार  कहा जाता है "यहां तो चराग तले अंधेरा है"। यानि जो  पत्रकार दिन रात दूसरों के हक के लिए लड़ते हैं वे खुद ही अन्याय के शिकार होते हैं, उन्हें उनका हक...

शब्दों की रौशनी से मिली आज़ादी कहां गई?

लाल किले के प्राचीर से हर साल देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त को इस बात का बखान करते हैं कि अब हम आज़ाद देश हैं और विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन हर साल...

सदन में किसी की हत्या हो जाए तो आश्चर्य मत कीजिएगा!

मीडिया बार-बार संसद की अराजकता का फुटेज दिखाता है पर वह यह नहीं बताता कि मोदी के कार्यकाल में यह क्यों हो रहा। क्या मोदी को कोई रिमोट से नियंत्रित कर रहा है जिसके कारण सदन की यह हालत...

जयंती पर विशेष: प्रेमचंद की परम्परा एक सामूहिक प्रगतिशील परम्परा थी

जिस प्रेमचन्द के निधन पर उनके मुहल्ले के लोगों ने कहा कि कोई मास्टर था जो मर गया, जिस प्रेमचन्द की  अत्येंष्टि  में दस बारह लोग ही मुश्किल से शामिल हुए थे, वह प्रेमचन्द अपने निधन के 85 साल...

महामहिम का दुखड़ा

इस संसार में सबका  दुखड़ा अलग-अलग है। एक गरीब आदमी के बेरोजगार का दुखड़ा तो समझ में आता है अगर महामहिम अपना दुखड़ा पेश करेंगे तो उस पर आश्चर्य होना, तीखी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। लगता है इस देश...

हिंदुत्ववादी ट्रोलरों की भेंट चढ़ गया एक पत्रिका का नवनियुक्त संपादक

अंग्रेजी के एक युवा पत्रकार और हिंदी के उभरते आलोचक आशुतोष भारद्वाज को भारतीय उच्च शोध संस्थान की पत्रिका "चेतना" के संपादक पद से  अलग होने का  निर्णय इसलिए दुखी मन से  लेना पड़ा कि कट्टर हिंदुत्ववादियों ने भारद्वाज...

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कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी कांग्रेस में शामिल

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