Monday, January 24, 2022

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राजा भैया की मुश्किलें बढ़ीं, सीबीआई ने दोबारा शुरू की डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड की जांच

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प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में साल 2013 में घटित डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है और सीबीआई ने दोबारा जाँच शुरू कर दी है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। कुंडा में साल 2013 में घटित डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब यह महज संयोग हो सकता है कि उधर योगी सरकार की एसआईटी ने लखीमपुर खीरी कांड में केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र को धारा बदलकर हत्या का मुल्जिम बना दिया तो इधर केंद्र सरकार के तोते सीबीआई ने अचानक सक्रियता दिखाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया के खिलाफ डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड की दोबारा जाँच शुरू कर दी है।       

इस केस में राजा भैया को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि, इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने रघुराज प्रताप सिंह को क्लीन चिट दे दी थी। दिवंगत पुलिस अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद ने इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ पीठ में चुनौती दी थी। परवीन आजाद की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था।

दरअसल जियाउल हक मर्डर केस के आरोपियों में शामिल पवन यादव ने उनकी पत्नी परवीन आजाद को जेल से एक लेटर लिखा था। इस लेटर में पवन ने कहा था कि तत्कालीन कुंडा सीओ का मर्डर राजा भैया के इशारे पर किया गया था। इसी लेटर को आधार बनाकर परवीन आजाद ने सीबीआई की उस क्लोजर रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें राजा भैया को क्लीन चिट दी गई थी।

अब सीबीआई ने दोबारा इस हत्याकांड की जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को डीएसपी जियाउल हक हत्याकांड में फिर से जांच का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि वह इस मामले में आरोपी हैं। जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद के पास पवन यादव के लेटर की कॉपी थी। उन्होंने इसे सार्वजनिक किया था, जिसमें लिखा था, “…राजा भैया का हत्या में हाथ है। सीओ साहब और सुरेश यादव (ग्राम प्रधान का भाई) को नन्हे सिंह ने ही गोली मारी है। नन्हें सिंह राजा भैया का मैनेजर और एक्स शूटर है। वह राजा भैया के इशारे पर लोगों को मारता है। सीओ साहब को भी इसी ने मारा है। यही सच है।”

दरअसल कुंडा के बलीपुर गांव में 2 मार्च 2013 की शाम 7:30 बजे प्रधान नन्हें सिंह यादव की उस समय हत्या कर दी गई, जब वह विवादित जमीन के सामने बनी एक झोपड़ी में मजदूरों से बात कर रहे थे। हत्यारे दो बाइक पर सवार थे। इस घटना की जानकारी मिलने पर ग्राम प्रधान नन्हें यादव के समर्थक बड़ी संख्या में उनके घर जुटने लगे। रात 8:15 बजे के करीब उग्र ग्रामीणों ने कामता पाल के घर में आग लगा दी। तत्कालीन कुंडा सीओ डीएसपी जियाउल हक अपनी टीम के साथ बलीपुर गांव पहुंचे। वह फोर्स के साथ पीछे के रास्ते से गांव में मृतक प्रधान नन्हें यादव के घर की तरफ बढ़े। ग्रामीणों ने फायरिंग शुरू कर दी।

सीओ जिलाउल के साथ मौजूद गनर इमरान और कुंडा एसएसआई विनय कुमार सिंह डरकर खेत में छिप गए। कुंडा के कोतवाल सर्वेश मिश्र भी आक्रोशित ग्रामीणों से घबराकर नन्हें सिंह के घर की तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। रात 8:30 बजे प्रधान नन्हें यादव के छोटे भाई 38 वर्षीय सुरेश यादव की भी हत्या कर दी गई। रात 11 बजे भारी पुलिस बल बलीपुर गांव पहुंचा और सीओ की तलाश शुरू हुई। रात 12 बजे के करीब जियाउल हक का शव मृतक प्रधान नन्हें यादव के घर के पीछे सड़क पर पड़ा मिला। वह देवरिया जिले के जुआफर गांव के रहने वाले थे।

सीओ हत्याकांड में तत्कालीन एसओ मनोज शुक्ला की ओर से दिवंगत प्रधान नन्हें यादव के भाइयों, बेटे समेत 10 लोगों को नामजद किया गया था, जबकि सीओ की पत्‍‌नी परवीन आजाद की तहरीर पर नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव, राजा भैया के प्रतिनिधि हरिओम श्रीवास्तव, चालक राजा भैया व गुड्डू सिंह के खिलाफ हत्या व राजा भैया के खिलाफ हत्या की साजिश रचने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस केस में राजा भैया का नाम आने के बाद ही उत्तर प्रदेश सरकार ने तिहरे हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की थी। इस केस की जांच कर रही सीबीआई ने अप्रैल 2013 में ग्राम प्रधान के बेटे पवन यादव, बबलू यादव, फूलचंद यादव और मंजीत यादव को डीएसपी हक के मर्डर के केस में अरेस्ट किया था।

आरोप है कि नन्हें सिंह नाम के शख्स ने डीएसपी हक पर गोली चलाई। नन्हें सिंह राजा भैया का मैनेजर और एक्स शूटर बताया जाता है।पवन यादव ने भी जेल से जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद को लिखी चिट्ठी में इसका दावा किया था। भीड़तंत्र का शिकार बने पुलिस अफसर की पत्नी परवीन आजाद को तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने पुलिस महानिदेशक कार्यालय में ओएसडी के पद पर नौकरी दे दी थी। जियाउल हक के छोटे भाई सोहराब को भी सिपाही पद पर नियुक्ति मिली थी। परवीन आजाद को सीधे डीएसपी रैंक की नौकरी देने की मांग उठ रही थी, लेकिन यह पद लोक सेवा आयोग से सृजित होने की वजह से उक्त पद पर सीधे तौर पर तैनाती नहीं दी जा सकती थी।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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