बीच बहस

चुनाव प्रभावित करने का नया हथियार बनता आयकर विभाग

तमिलनाडु में 6 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक 10 दिन पहले विरोधी दल के नेताओं के दफ्तर और घर पर लगातार इनकम टैक्स के छापे पड़ रहे हैं। ये भाजपा की घृणित राजनीति का ट्रेड मार्क बन चुका है। इस तरह की चीजें पिछले कई वर्षों में उत्तर प्रदेश और दूसरे तमाम राज्यों में भी देखा गया है। दरअसल इस तरह के कृत्य से भाजपा मतदाताओं में ये धारणा बनाने की कोशिश करती है कि विपक्षी दल करप्ट हैं और भाजपा पाक-साफ।

तमिलनाड़ु में आयकर विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन डीएमके के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार ईवी वेलु (E V Velu) के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इससे एक दिन पहले बृहस्पतिवार को आयकर विभाग के अधिकारियों ने ई वी वेलु से जुड़े अलग-अलग ठिकानों पर छापे मारे थे।

द्रमुक ने छापेमारी को सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक और उसके गठबंधन साझेदार भाजपा ‘राजनीतिक चाल’ और सत्ता का ‘दुरुपयोग’ करार देते हुए इसकी निंदा की थी।

इससे पहले 17 मार्च बुधवार को आयकर विभाग ने कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मैय्यम के कोषाध्यक्ष ए चंद्रशेखर सहित कई विपक्षी नेताओं के ठिकानों पर छापे मारे थे। चंद्रशेखर के घर पर हुई छापेमारी में आठ करोड़ रुपए नकद मिलने की रिपोर्टिंग आयकर विभाग के हवाले से की गई थी। उनके मदुरै और तिरुपुर में दफ्तरों पर भी ईडी टीम ने छापामारी की थी।

आयकर विभाग ने तमिलनाडु के 5 शहरों में 20 ठिकानों पर छापों में 400 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता लगाने का दावा किया था। 11 मार्च से तमिलनाडु के कोयंबटूर, सेलम, विरुधुनगर और थेनी में आयकर विभाग द्वारा कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान कृषि वस्तुओं की ख़रीद-फ़रोख्त की आड़ में विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से 100 करोड़ रुपए से अधिक की नकदी जमा होने की जानकारी आयकर विभाग द्वारा दी गई थी।

आयकर विभाग ने इसके अलावा विदेशी संस्था से डिबेंचर के माध्यम से पर्सनल खातों में 150 करोड़ रुपए जमा करने, मसाले आयात के जरिए 25 करोड़ रुपए अर्जित करने, चेन्नई व अन्य शहरों में सर्किल रेट से कम कीमतों पर संपत्तियां खरीदने का भी खुलासा किया था। छापों में 50 लाख रुपए की नकदी, तीन करोड़ रुपए की ज्वैलरी, 25 से अधिक लक्जरी कारें जब्त की गई थी।

चुनाव प्रचार में विपक्षी दलों व उम्मीदवारों को कमजोर करने की साजिश

जाहिर है जिस तरह से चुनावो में निर्धारित सीमा से अधिक पैसा खर्च किया जाता है। इलेक्टोरल बांड तो वैसे ही चुनावों में अवैध और सीमा से अधिक धन खर्च करके जनमत प्रभावित करने का जरिया बन गया है। ऐसे में आयकर विभाग का इस्तेमाल करके विपक्षी उम्मीदवार को आर्थिक मोर्चे पर पस्त कर देना चुनावी बढ़त लेने का एक राजनीतिक रणनीति है। तो एक नये चलन के रूप में ये चीजें बार बार चुनावी राज्यों में देखने को मिल रही है।

कई बार इस तरह की छापेमारी करके विपक्षी दलों और विपक्षी उम्मीदवारों को आर्थिक स्तर पर कमजोर करके चुनावी बढ़त लेने की मंशा के चलते भी ये कार्रवाई की जाती है। गौरतलब है कि आयकर विभाग केंद्र सरकार के अधीनस्थ काम करता है।

पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ छापेमारी

पश्चिम बंगाल में में सीबीआई व आयकर विभाग ने मिलकर जनवरी, फरवरी, मार्च में ताबड़तोड़ छापेमारी का एक पूरा चक्र चलाया था। इसी मामले में CBI ने शुक्रवार को राज्य के पुरुलिया, बांकुड़ा, बर्धमान और कोलकाता में 13 जगहों पर छापेमारी की थी। ये छापेमारी युवा तृणमूल कांग्रेस के नेता विनय मिश्रा, व्यवसायी अमित सिंह और नीरज सिंह के ठिकानों पर हुई थी। छापे के दौरान कोई भी घर पर मौजूद नहीं था।

इसके पहले 11 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हुगली, कोलकाता, उत्तर 24 परगना, आसनसोल, दुर्गापुर, बर्धमान में छापेमारी की थी। कोयला घोटाले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बहू रुजिरा बनर्जी व भतीजे अभिषेक से जुड़े लोगों के घर व दफ़्तरों पर 19 फरवरी शुक्रवार को राज्य के पुरुलिया, बांकुड़ा, बर्धमानऔर कोलकाता में 13 जगहों पर छापेमारी की थी।

इससे पहले 14-15 जनवरी को आयकर विभाग ने कोलकाता में फाइनेंसिंग, ऑटोमोबाइल और रियल इस्टेट से जुड़े एक व्यवसायिक घराने पर छापेमारी करके 450 करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन और डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा की नगदी बरामद करने का दावा किया था।

इसके बाद 1 फरवरी को आयकर विभाग ने लोहा, स्टील और चाय के कारोबार से जुड़े कोलकाता के एक कारोबारी समूह के परिसरों पर छापेमारी के दौरान कथित तौर पर 300 करोड़ रुपये की बेनामी आय का पता लगाया था।

इसके बाद 17 मार्च को एक ही रात सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल में कई स्थानों पर छापेमारी में आयकर विभाग ने करीब एक करोड़ रुपये नगद व कई दस्तावेज भी जब्त किए थे। मंगलवार की रात सिलीगुड़ी और दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालूरघाट शहर में कई बड़े कारोबारियों के ठिकाने पर छापेमारी की गई। उप आयकर निदेशक (अन्वेषण) सिलीगुड़ी यूनिट की टीम ने यह अभियान चलाया। जब्त रुपये का संबंध हवाला कारोबार से जोड़ा गया।

इससे पहले लोकसभा चुनाव के पहले  29 मार्च 2019 में भी आयकर विभाग ने पश्चिम बंगाल में कालाधन रोधी अभियान के तहत अवैध लॉकरों की तलाशी कर कुल 22.53 करोड़ का कालाधन जब्त किया था। इसमें 10.4 करोड़ की नकदी और 12.13 करोड़ रुपए के गहने शामिल थे। तब भी कोलकाता के आलावा सिलीगुड़ी व बालूरघाट में यह छापेमारी की गई।

इससे पहले  03 नवंबर 2020 को बिहार विधानसभा में दूसरे चरण के मतदान के ठीक 4 दिन पहले 31 अक्टूबर को आयकर विभाग ने शुक्रवार को पटना के प्रमुख चार ठेकेदारों की कंपनियों पर एक साथ छापेमारी की। विभाग की छापेमारी में इनके ठिकानों से 75 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा हुआ है। दूसरी तरफ नल-जल योजना से संबंधित एक ठेकेदार के यहां से 2.28 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे।

(सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं।)

This post was last modified on March 28, 2021 8:38 pm

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