हब्बा खातून का जीवनकाल 1554 से 1609 तक का था। लगभग यही कार्यकाल मुग़ल बादशाह अकबर का… Read More
संस्कृति-समाज
ये लो कर लो बात। भगवा भाइयों के राज में भी ऐसा अत्याचार हो रहा है। छत्तीसगढ़… Read More
खबर है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की अगले महीने बंगलूरू में होने वाली बैठक… Read More
ध्रुवीकरण इनकी मजबूरी है। न करें तो और क्या करें? और कुछ आता भी तो नहीं इसके… Read More
इस देश में एक ऐसा परिवार है, जो पहले बीपीएल कार्ड रखता था। अब वह बड़े करदाताओं… Read More
नई दिल्ली। साहित्योत्साव के पांचवें दिन ‘भारत की अवधारणा’ पर विचार-विमर्श के साथ ही प्रख्यात लेखक मोहन… Read More
वाराणसी। बनारस यानी काशी, जो भारतीय साहित्य और संस्कृति की आत्मा है, जहां तुलसी ने रामचरितमानस की रचना… Read More
हमारी सांस्कृतिक धरोहरों में, होली ने साझी खुशी, दिल्लगी और आपसी सौहार्द्र का जो रंग प्राचीन साहित्य… Read More
हिन्दू धर्म, सामाजिक व्यवस्था और परम्परा में शूद्रों और महिलाओं को एक समान माना गया है। अतिशूद्रों… Read More
स्मृति शेष : ‘दुनिया के संकट को हल करने की चाबी साम्यवाद में है’ शायर और डायलॉग राइटर अख़्तर-उल-ईमान
अख़्तर-उल-ईमान अपने दौर के संज़ीदा शायर और बेहतरीन डायलॉग राइटर थे। अक्सर लोग उन्हें फ़िल्मी लेखक के… Read More