संस्कृति-समाज

अंबेडकर जयंती पर विशेष : समकालीन दलित राजनीति- विकल्प की त्रासदी

हमारे समय के सर्वकालिक महान विचारक कार्ल मार्क्स का कथन है, “इतिहास अपने को दोहराता ज़रूर है,… Read More

जन्मदिवस विशेष : क्यों जरूरी है ज्योतिबा फुले को याद करना

आज के समय में जातिगत जनगणना और “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” जैसे विषय राजनीति… Read More

अँधेरनगरी के लोकतंत्र से राजतंत्र बनने की कहानी

अँधेरनगरी आज अगर एक खुशहाल राज्य है, और अगर यहां के नागरिक अपने रोटी-कपड़ा-मकान-रोजगार-शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी तुच्छ भौतिक… Read More

पुस्तक समीक्षा : कारपोरेट-कम्यूनल गठजोड़ का समाजवादी विकल्प बताने वाली पुस्तक

कार्ल मार्क्स ने 19वीं सदी में वैज्ञानिक समाजवाद का सिद्धांत प्रतिपादित किया था। तब से लेकर आज तक दुनिया भर… Read More