मंगलवार (4 अगस्त) को संसद को बताया गया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 1,080 हो गई है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। इसके साथ ही, पिछले पांच वर्षों में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत ईडी द्वारा दर्ज कुल मामलों की संख्या 4,622 हो गई है। हालांकि, इसी अवधि में दोषसिद्धि की दर केवल 43 थी।
यह जानकारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद वी शिवदासन के एक सवाल के लिखित जवाब में दी गई। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि ईडी ने इस साल 30 जून तक पीएमएलए के प्रावधानों के तहत विशेष अदालतों में 2,444 मामलों में अभियोजन शिकायतें दायर की हैं।
मंत्री ने कहा, “ये मामले सुनवाई के विभिन्न चरणों में हैं। ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 1,243 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।” विचाराधीन कैदियों की संख्या के बारे में मंत्री ने कहा कि जो लोग अभी जेल में हैं – जिनमें से कुछ को किसी अन्य एजेंसी ने गिरफ्तार किया है – उनके आंकड़े “केंद्रीय रूप से नहीं रखे जाते हैं”।
आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले सबसे अधिक मामले 2021-22 में दर्ज किए गए थे, जब एजेंसी ने पीएमएलए के तहत कुल 1,116 मामले दर्ज किए थे। यह संख्या 2022-23 में घटकर 953 और 2023-24 में 698 हो गई थी, लेकिन फिर 2024-25 में बढ़कर 775 और 2025-26 में 1,080 हो गई।
दोषसिद्धि की संख्या 2021-22 में तीन और 2022-23 में नौ थी; अगले वर्ष यह बढ़कर 13 हो गई, लेकिन फिर 2024-25 और 2025-26 में घटकर नौ रह गई। चार साल की अवधि में कुल 43 मामलों में सज़ा सुनाई गई, जिनमें दोषी ठहराए गए लोगों की संख्या 104 थी। सबसे ज़्यादा 38 लोगों को 2024-25 में दोषी ठहराया गया, इसके बाद 2022-23 में 24, और 2023-24 व 2025-26 में 19-19 लोगों को दोषी ठहराया गया।
मंत्री ने इनकम टैक्स विभाग के मामलों के बारे में भी जानकारी दी। पिछले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) में इनकम टैक्स विभाग ने कुल 2,127 मुक़दमे (प्रॉसिक्यूशन केस) दायर किए, जिनमें सबसे कम 432 मामले 2025-26 में दर्ज किए गए। 2024-25 में 611, 2023-24 में 502 और 2022-23 में 387 मुक़दमे दायर किए गए थे।
चौधरी ने कहा, “इनकम टैक्स मामलों में, जांच पूरी होने और ज़रूरी तथ्यों को दर्ज करने के बाद, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 279(1) के तहत सक्षम अधिकारी से मंज़ूरी मिलने पर ही मुक़दमे की शिकायतें दायर की जाती हैं।”
2025-26 में इनकम टैक्स विभाग द्वारा दोषी ठहराए गए मामलों की संख्या बढ़कर 47 हो गई, जबकि बरी किए गए मामलों की संख्या चार साल के उच्चतम स्तर 293 पर पहुंच गई।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दायर किए गए मुक़दमों की संख्या और दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने के आंकड़ों के बीच सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि दोषी ठहराए जाने या बरी किए जाने के मामले अलग-अलग वर्षों में दायर किए गए मुक़दमों से संबंधित हो सकते हैं।
हाल के वर्षों में पीएमएलए से जुड़े कई घटनाक्रम हुए हैं, जिनमें न्यूज़क्लिक जैसे समाचार संगठनों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच, तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से जुड़े मामले और राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई पैक) से जुड़े मामले शामिल हैं।
इस साल मई में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) जैसे विशेष कानून के तहत सुनवाई के मामले में भी, किसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले का संज्ञान लेने से पहले अदालत को आरोपी का पक्ष सुनना होगा।
यह आदेश तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ईडी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि पीएमएलए की स्पेशल कोर्ट को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ के तहत बताई गई सामान्य आपराधिक प्रक्रिया का पालन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। बेंच ने पीएमएलए कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी का पक्ष सुने बिना ही अपराध का संज्ञान लिया गया था।
(जनचौक ब्यूरो)