लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावे में सामने आए गोलमाल के आरोपों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के जो तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और योगदान से जुड़े इस मामले को दबाने या महज भाजपा के अंदरूनी विवाद के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। यह जन आस्था, सार्वजनिक जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता का प्रश्न है। यदि किसी अन्य संस्था या संगठन पर ऐसे आरोप लगे होते, तो अब तक सीबीआई/ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियां सक्रिय हो चुकी होतीं। लेकिन यहां भ्रष्टाचार के आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के बावजूद एफआईआर तक दर्ज न होना पूरे मामले को संदेहास्पद बनाता है।
भाकपा (माले) नेता ने कहा कि भाजपा वर्षों से स्वयं को शुचिता, नैतिकता और पारदर्शिता की प्रतीक बता कर उसकी माला जपती रही है, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवादों ने उसके इन दावों की पोल खोल दी है। सच्चाई को कितना भी छिपाने की कोशिश की जाए, लेकिन “लाख छुपाओ, छुप न सकेगा”। इस मामले में खुद का बचाव करने के लिए भाजपा नेताओं और मंत्रियों की खोखली आक्रामकता देखते बन रही है। लेकिन जनता जानना चाहती है कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान की राशि का उपयोग किस प्रकार हुआ और आरोपों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सुधाकर यादव ने कहा कि यदि ट्रस्ट के पदाधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच में संदिग्ध पाई जाती है, तो उन्हें किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। इस संदर्भ में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियो की भूमिका पर उठ रहे सवालों का भी स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब दिया जाना चाहिए। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अब समय आ गया है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
भाकपा (माले) राज्य सचिव ने मांग की कि पूरे मामले की न्यायिक अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और जन आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को कठोर से कठोर सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर राजनीति करने वालों को यह समझना होगा कि श्रद्धालुओं की आस्था किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)