पटना। ‘बदलो सरकार-बदलो बिहार’ और ‘चुनाव चोर गद्दी छोड़’ के नारे के साथ भाकपा-माले का पटना महानगर सम्मेलन आज से दारोगा राय पथ स्थित स्वतंत्रता सेनानी भवन में शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब मताधिकार पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बूथ स्तर पर जाकर यह पता लगाएँ कि SIR (विशेष मतदाता सूची संशोधन) के दौरान पहले चरण में काटे गए 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों की सच्चाई क्या है। इस प्रक्रिया की जल्दबाजी से कई सवाल उठ रहे हैं।
कुणाल ने कहा कि इस बार बिहार से भाजपा-जदयू की विदाई तय है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से 20 वर्षों के कुशासन से बिहार को मुक्त करने के लिए अभी से कमर कसने को कहा। उन्होंने पटना नगर में शहरी गरीबों, छात्र-नौजवानों, और कर्मचारियों के बीच पार्टी संगठन का विस्तार करने पर जोर दिया।
उद्घाटन सत्र में का. महबूब आलम ने कहा कि पटना शहर में फुटपाथी दुकानदारों और शहरी भूमिहीन गरीबों को लगातार परेशान किया जा रहा है। अतिक्रमण के नाम पर उनकी दुकानें तोड़ी जा रही हैं या उन्हें विस्थापित किया जा रहा है। इसके खिलाफ जनता का जोरदार प्रतिवाद आंदोलन खड़ा करना होगा।
का. केडी यादव ने पटना में शहरी गरीबों के पुराने आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार फिर वैसा ही आंदोलन जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 वर्षों की भाजपा-जदयू सरकार में शहरी गरीबों के लिए एक भी कॉलोनी नहीं बनाई गई। स्मार्ट सिटी के नाम पर गरीबों को विस्थापित किया गया है। यह कैसा विकास है, जिसमें गरीबों का कोई स्थान नहीं?
ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि बिहार की महिलाएँ कर्ज के बोझ तले कराह रही हैं। उन्हें संगठित कर सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा बनाना होगा। उन्होंने कहा, “हमें कर्ज नहीं, स्थायी रोजगार चाहिए। इस सरकार में कंपनियों को इतनी छूट दी गई है कि गाँव के गाँव उजड़ गए हैं। कर्ज आज लोगों के गले की फाँस बन चुका है।”
विधान पार्षद शशि यादव ने याद दिलाया कि चुनाव से एक महीने पहले सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं के लिए 3,000 रुपये मानदेय की घोषणा की, जबकि यह समझौता दो साल पहले हुआ था। उन्होंने कहा कि स्कीम वर्कर्स इस झुनझुने से संतुष्ट नहीं होंगे। “हमने 3,000 रुपये की लड़ाई जीती है और आगे लड़कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा भी हासिल करेंगे।”
विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि बिहार में गुंडों और अपराधियों का राज है। फुलवारी में दो बच्चों को जिंदा जलाकर मार दिया गया। जब हमने प्रतिवाद किया और न्याय की लड़ाई लड़ी, तो हमारे खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अपराधियों को संरक्षण देने वाली सरकार को बिहार की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
सत्र को सरोज चौबे, किसान महासभा के नेता उमेश सिंह, पार्टी के मीडिया प्रभारी कुमार परवेज आदि ने भी संबोधित किया। संचालन महानगर सचिव अभ्युदय ने किया। मौके पर का. अमर, पर्यवेक्षक कमलेश कुमार, कार्यालय सचिव प्रकाश कुमार, मनमोहन कुमार, मीरा दत्त, रणविजय कुमार, अनीता सिन्हा, जितेंद्र कुमार, संजय यादव, शंभू नाथ मेहता, मुर्तजा अली सहित विभिन्न इलाकों से आए प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी वक्ताओं ने एकजुट होकर भाजपा-जदयू को हराने और पटना शहर में पार्टी के विकास का संकल्प लिया।
सम्मेलन की शुरुआत में शहीद साथियों को श्रद्धांजलि दी गई। जनसंस्कृति मंच के साथियों ने शहीद गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर इलाके का नाम का. चारू मजुमदार, मंच का नाम अशोक कुमार-तोता चौधरी, और सभागार का नाम का. राजाराम व मीना राय के नाम पर रखा गया।
(प्रेस विज्ञप्ति)