दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि हाल ही में सत्य निकेतन में पीजी गिरने की घटना में जान गंवाने वाले युवा छात्रों के सपने और उम्मीदें अधिकारियों के “लापरवाह और आपराधिक” रवैये के कारण “टूट” गए। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने आकर्षण दानवीर राठी की ओर से दायर नई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।
याचिका में दिल्ली नगर निगम को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है जिसमें दिल्ली में हॉस्टल सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी हो।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी रिपोर्ट का ज़िक्र किया, जिसमें इस घटना में जान गंवाने वाले पांच युवा छात्रों की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा, “आपको (‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी पूरी रिपोर्ट पढ़नी चाहिए… उन छात्रों के बारे में जिन्होंने इस घटना में जान गंवाई। यह बहुत दुखद है। हर किसी को इसे पढ़ना चाहिए।”
चीफ जस्टिस ने आगे कहा, “यह कोई आम दुर्घटना नहीं है। ये छात्र छोटे शहरों से बहुत उम्मीदों और सपनों के साथ आपकी राजधानी में आते हैं। अधिकारियों के ऐसे लापरवाह और आपराधिक रवैये से वे सब टूट गए हैं।
शहर में हॉस्टल की समस्याओं के बारे में कौन नहीं जानता? यह लंबे समय से चल रहा है। छात्र उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। यह कम-से-कम पिछले 20 से 25 सालों से हो रहा है। वे इस उम्मीद में आते हैं कि वे अपना करियर बनाएंगे। देखिए क्या हुआ है।”
एएसजी ने कहा कि यह वाकई एक दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद घटना है। आखिरकार कोर्ट ने इस याचिका को ऐसी ही दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया, जिन पर 25 सितंबर को सुनवाई होनी है।
कोर्ट ने हाल ही में नगर निगम को निर्देश दिया कि वह इस मामले को अपने सबसे ऊँचे एग्जीक्यूटिव लेवल पर उठाए और इस बात की जांच करवाए कि जो इमारतें गिरीं, क्या वे सही मंज़ूरी के साथ बनाई गईं या नहीं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह पाया जाता है कि निर्माण सही मंज़ूरी के बिना किया गया तो नगर निगम को इस चूक के लिए दोषी अधिकारी या कर्मचारियों की ज़िम्मेदारी तय करनी चाहिए।
(जनचौक ब्यूरो)