झारखंड के गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत श्यामसिंह-नावाडीह गांव में मार्क्सवादी समन्वय समिति के संस्थापक कॉमरेड ए. के. राय की पुण्यतिथि के अवसर पर भारत ज्ञान विज्ञान समिति, मनरेगा मजदूर मंच और रोजी-रोटी अधिकार अभियान के संयुक्त तत्वावधान में 23 जुलाई को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस श्रद्धांजलि सभा में गिरिडीह जिले के देवरी, तिसरी, बिरनी, बेंगाबाद, गिरिडीह और जमुआ प्रखंडों के सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने सबसे पहले उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और अपने-अपने उद्बोधन में कॉमरेड ए. के. राय के सादगीपूर्ण जीवन, झारखंड और कोयलांचल में उनके संघर्षों और उपलब्धियों पर चर्चा की।
उल्लेखनीय है कि कॉमरेड ए. के. राय का पूरा नाम अरुण कुमार राय था। उनका जन्म तत्कालीन पूर्वी बंगाल के राजशाही जिले के सपुरा गांव में 15 जून 1935 को शिबेश चंद्र राय और रेणुका राय के घर हुआ था। उनके माता-पिता दोनों स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और जेल भी गए। उनके पिता शिबेश चंद्र राय पेशे से वकील थे।
राय ने अपनी प्राथमिक शिक्षा 1951 में राजशाही के नौगांव स्थित एक स्थानीय स्कूल से पूरी की और बाद में बेलूर रामकृष्ण मिशन स्कूल से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज से विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और 1959 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से रासायनिक अभियांत्रिकी (केमिकल इंजीनियरिंग) में स्नातकोत्तर किया।
उन्होंने कोलकाता के एक औद्योगिक घराने में अपने करियर की शुरुआत की और दो वर्ष तक वहाँ सेवा देने के बाद तत्कालीन एकीकृत बिहार के धनबाद के सिंदरी में प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड में केमिकल इंजीनियर के रूप में कार्य किया। वहाँ उन्होंने मजदूरों की बदहाली देखी और उनके हक के लिए लड़ाई शुरू करने हेतु 1966-67 में इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े थे, लेकिन मजदूरों के आंदोलन में पार्टी से सहयोग न मिलने के कारण उन्होंने सीपीआई (एम) छोड़कर मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) का गठन किया और इसके बैनर तले मजदूरों की लड़ाई शुरू की। उनका मजदूर संगठन “बिहार कोलियरी कामगार यूनियन” सीपीआई (एम) के मजदूर संगठन सीटू से संबद्ध था।
कॉमरेड ए. के. राय के बारे में बताना सूरज को दीपक दिखाने के समान है। फिर भी, यह उल्लेखनीय है कि तीन बार सांसद और तीन बार विधायक रहने के बावजूद उन्होंने न तो सांसदी का पेंशन लिया और न ही विधायकी का। उनका कहना था, “जब मैं जनता का प्रतिनिधि नहीं रहा, तब जनता के पैसे का उपयोग करने का मेरा कोई अधिकार नहीं है।” 21 जुलाई 2019 को लंबी बीमारी के बाद धनबाद में उनका निधन हो गया।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने बताया कि कॉमरेड राय विशेष रूप से कोयला खान मजदूरों के हक और अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के गिरिडीह जिला अध्यक्ष और मनरेगा मजदूर मंच के राज्य समन्वयक मोहम्मद आलम अंसारी ने कहा कि कॉमरेड राय के जीवन से आज के राजनेताओं को सीख लेनी चाहिए कि राजनीति और जनसेवा कितनी सादगी, त्याग और समर्पण के साथ की जानी चाहिए।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति के जिला सचिव बैजनाथ प्रसाद वर्मा ने कहा कि 2003 में क्षेत्रीय विकास और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए क्षेत्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले 14 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया गया था। उस दौरान कॉमरेड राय का मार्गदर्शन हमारे लिए बहुत उपयोगी रहा, और आज हमारा क्षेत्र पिछड़े इलाकों की सूची से बाहर निकलने की दिशा में अग्रसर है।
रोजी-रोटी अधिकार मंच के योगेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि कोयला खान मजदूरों के हित में आवाज उठाने वाले भारतीय संसद में एकमात्र सांसद कॉमरेड ए. के. राय थे। उनके निरंतर प्रयासों से वेतन बोर्ड का गठन हुआ, जिससे कोयला मजदूरों को उचित मजदूरी मिली। उन्होंने कोलियरी मजदूर यूनियन का गठन किया और धनबाद के कोयला माफियाओं को कड़ी टक्कर दी।
प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी दिल मोहम्मद अलगुंदिया ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक बार उनसे मिलने का अवसर मिला, तब उन्होंने कहा था, “स्वयं समाज का नेतृत्व करो। झारखंड और देश को युवा नेतृत्व की सदा आवश्यकता रहेगी।” आज हम उनके इस सुझाव के साथ युवाओं को नेतृत्वकारी भूमिका में लाने में सफल हो रहे हैं।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड के राज्य महासचिव विश्वनाथ सिंह ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनाने में झारखंड मुक्ति मोर्चा को जो श्रेय प्राप्त है, उसमें राय दा की भूमिका को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इतने महान व्यक्तित्व के नाम पर झारखंड में न तो कोई शैक्षणिक संस्थान है और न ही कोई चिकित्सा सेवा संस्थान।
विश्वनाथ सिंह ने झारखंड सरकार से मांग की कि जिस तरह कॉमरेड राय ने केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की और नौकरी छोड़कर झारखंड की जनता की बदहाली दूर करने तथा अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए संघर्ष किया, उनके सम्मान में झारखंड में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और इंजीनियरिंग संस्थान की स्थापना की जाए। विशेष रूप से, उन्होंने सुझाव दिया कि धनबाद का इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, जो अब आईआईटी बन चुका है, का नामकरण कॉमरेड ए. के. राय के नाम पर किया जाए। यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और सम्मान होगा।
कार्यक्रम में अजय विश्वकर्मा, अनिल कुशवाहा, हेमलाल दास, किशोर मूर्मू, रवि राना, रामप्रसाद राना, अजय वर्मा और मनीष वर्मा ने भी अपने-अपने वक्तव्य दिए और उनके जीवन चरित्र को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन दिवस कुमार ने किया, और धन्यवाद ज्ञापन नुनदेव रविदास ने किया।
(झारखंड से विशद कुमार की रिपोर्ट)