Thu. Jan 23rd, 2020

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों ने दी प्रशासन को चेतावनी, कहा- महिषासुर और रावण का अपमान बर्दाश्त नहीं

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ज्ञापन देता प्रतिनिधिमंडल।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला में आदिवासी समाज ने रावण दहन और दुर्गा के साथ महिषासुर की प्रतिमा स्थापित करने पर रोक लगाने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया है। यहां के भी आदिवासी, पिछड़े और दलित अपने सांस्कृतिक मूल्यों-मान्यताओं को लेकर अन्य आदिवासी क्षेत्रों की तरह काफी मुखर हो रहे हैं। सूरजपुर के आदिवासियों ने चेतावनी दी है कि दुर्गा पूजा और विजयादशमी के दौरान उनके आराध्य महिषासुर और रावेन (रावण) का दहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुरजपुर के आदिवासी युवाओं ने दुर्गा प्रतिमा के साथ असुर राजा महिषासुर की प्रतिमा न लगाने व रावण दहन पर रोक लगाने के लिए सुरजपुर के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समाज का कहना है कि आदिवासी, मूलनिवासियों के पूर्वज असुर राजा महिषासुर की प्रतिमा को दुर्गा के साथ रखकर दुर्गा द्वारा हिंसक दिखाकर अपमानित किया जाता रहा है। यह असुर राजा महिषासुर का ही अपमान नहीं है, बल्कि आदिवासी मूलनिवासी समाज का अपमान है। 

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ज्ञापन देने के बाद प्रतिनिधिमंडल।

संगठन के मीडिया प्रभारी विजय मरपच्ची का कहना है कि गोंडवाना सम्राट महाराजा रावण पेन की प्रतिमा बनाकर बुराई के प्रतीक मानकर हर वर्ष से जलाया जाता है, जो किसी भी तरह से न्याय संगत नहीं है। यह आदिवासी, मूलनिवासी समाज का अपमान है क्योंकि यह समाज आदि अनादि काल से अपने आराध्य पेन शक्ति के रूप में गोंगो पूजा करते आ रहे हैं। लिहाजा महाराजा रावण पेन की प्रतिमा को हर वर्ष विजयादशमी के दिन जलाना उस पूरे समुदाय का अपमान है जो उन्हें अपना आराध्य मानता है। उन्होंने प्रशासन से इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही उसका कहना था कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 में दिए गए धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान पर भेद संविधान विरोधी है।

ज्ञापन में कलेक्टर से मांग की गयी है कि असुर राजा महिषासुर की प्रतिमा को दुर्गा प्रतिमा के साथ लगाकर हिंसक दिखाने पर तत्काल रोक लगायी जाए इसके साथ-साथ महाराजा रावण (रावेन) की प्रतिमा को विजयदशमी के दिन बुराई का प्रतीक मानकर न जलाया जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि कोई संगठन, समिति जिला में असुर राजा महिषासुर की प्रतिमा को दुर्गा प्रतिमा के साथ लगाकर अगर हिंसक दिखाता है, और विजयादशमी के दिन महाराजा रावण का पुतला बनाकर बुराई के प्रतीक के तौर पर उसे जलाता है तो उसके खिलाफ प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जाती है।  

संगठन के मीडिया प्रभारी विजय मरपच्ची ने कहा कि हर साल हम इस विषय से शासन-प्रशासन को अवगत कराते रहते हैं पर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। एक बार फिर सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले हमने ज्ञापन सौंपा है। अगर इस बार कार्रवाई नहीं होती है तो हम केस दर्ज कराएंगे। इसकी व्यापक रूप से तैयारी कर ली गयी है। 

वहीं आदिवासी समाज के रघुनाथ मरकाम ने कहा है कि यहां हमारे स्वाभिमान को ठेंस पहुचाया जा रहा है। चंद बाहरी लोग बार-बार आदिवासी समुदाय की भावनाओं को ठेंस पहुचाने का काम करते हैं। अब आदिवासी समुदाय इन चीजों को बर्दाश्त नहीं करेगा और सड़कों मे उतर कर उसका पुरजोर विरोध करेगा।

इस मौके पर मुख्य रूप से आदिवासी समाज के मोती लाल पैकरा (जिला अध्यक्ष- सर्व आदिवासी समाज), विजय सिंह मरपच्ची (जिला अध्यक्ष गोंडवाना गोंड़ महासभा), रघुनाथ सिंह मरकाम( प्रदेश उपाध्यक्ष- नेशनल आदिवासी पीपुल्स फेडरेशन छत्तीसगढ़), कृष्ण नरायण प्रताप चेरवा (जिला अध्यक्ष- आदिवासी छात्र संगठन), नन्द केश्वर नेताम (उपाध्यक्ष), राज क्षितिज कुमार उईके (महासचिव), संजय सिंह पोया, बुधराम पावले, शोहित सिंह पोया, भोग नारायण पोया, अरविंद सिंह, देव शरण, शिव नरायण, बिरझु, अर्जुन सिंह, मोहन सिंह, जग साय, नेम चंद, हरिचरन, मदन मोहन, दीनदयाल शोहित पोया व भारी संख्या में संगठन के लोग उपस्थित थे। 

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