Thu. Feb 20th, 2020

पूर्व आईएएस कन्नन ने किया सीएए विरोधी आंदोलन को तेज करने की अपील, कहा-अब जनता के आखिरी धक्के की जरूरत

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पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन।

वाराणसी। इलाहाबाद में भाषण देने से रोक दिए गए पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन को आखिरकार पीएम मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में मौका मिल गया। उन्होंने आज शास्त्री घाट कचहरी पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी जी ने जनता से पूछा कि काले धन को पकड़ा जाए तो जनता ने कहा हां। आज नोटबन्दी के बाद कितना काला धन पकड़ा गया इसका उनके पास कोई जवाब नहीं है।

अब मोदी जी पूछ रहे हैं कि घुसपैठियों को बाहर निकाला जाए तो जनता समझ गयी है कि घुसपैठियों के नाम पर अल्पसंख्यक, महिलाएं, घुमंतू जातियां, भूमिहीन खेत-मज़दूर किसान आदि लोगों को ही निकाला जाएगा। इसी कारण पूरे देश में CAA और NRC का जनता विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता नेताओं से सवाल पूछती है न कि नेता जनता से।

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उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने पहले कहा था कि सभी लोग कान खोलकर सुन लें एनआरसी पूरे देश में लागू किया जाएगा। लेकिन उसके दो हफ्ते बाद ही वह अपने बयान से पलट गए। उन्होंने रामलीला मैदान में कहा कि उन्होंने एनआरसी का कभी नाम तक नहीं लिया। गोपीनाथन ने कहा कि अगर इसी तरह से जनता का दबाव बना रहा तो दो हफ्ते बाद वह यह भी कह सकते हैं कि ये अमित शाह कौन है उसे मैं नहीं जानता।

उन्होंने कहा कि अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून को अपने इगो का प्रश्न बना लिया है। लेकिन एक देश किसी के व्यक्तिगत इगो से नहीं चलता है लिहाजा उन्हें अपनी जिद छोड़नी चाहिए और इस काले कानून को वापस लेना चाहिए। और अगर उनके स्तर पर ऐसा नहीं हो पाता है तो पीएम मोदी को अपना गृहमंत्री बदल देना चाहिए।  

स्वराज अभियान के मुखिया योगेंद्र यादव ने कहा कि CAA कुछ नहीं बल्कि सीधे तौर पर देश की सीमा पर एक साइन बोर्ड टांग देना है। जिस पर लिखा हो कि मुसलमानों का स्वागत नहीं। उन्होंने सवाल किया कि अफगानिस्तान तो कभी भी भारत का अंग नहीं रहा तब वहां के नागरिकों के लिए CAA क्यों? जबकि कई शरणार्थी बौद्ध श्रीलंका से भाग कर भारत आये हैं। इसका सीधा मतलब है कि सरकार को शरणार्थियों की मदद कम देश के अंदर हिंदू-मुसलमान को बांटने का एक बहाना चाहिए।

भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. राम जी राय ने कहा कि 1857 की लड़ाई में जिस बहादुर शाह जफर ने अपने दोनों बेटों के कलम हुए सर देखने के बाद भी घुटने नहीं टेके उनकी विरासत को आज हिन्दू-मुसलमान में वे लोग बांट रहे हैं जिनका देश की आज़ादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून विरोधी आंदोलन में युवाओं और महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका को आने वाले समय में भारत की राजनीति में एक नई ऊर्जा और दिशा का द्योतक बताया।

सम्मेलन को एसपी राय, रामजनम, मनीष शर्मा, हारून नक्शबंदी, मुफ्ती बातिन प्रतिभा गोंड, इश्तियाक अहमद, बोदा अंसारी, सतीश सिंह, कुसुम वर्मा, आंकाक्षा आजाद, छेदी लाल निराला, जयशंकर सिंह, विनय शंकर राय, लक्ष्मन प्रसाद, आबिद शेख, आशुतोष, शशांक ने भी संबोधित किया।

सम्मेलन का आयोजन भगतसिंह-अंबेडकर विचार मंच, इंसाफ मंच, नागरिक प्रयास मंच, स्वराज इंडिया भाकपा-माले, भाकपा, बीसीएम, आइसा, ऐपवा, एआईएसएफ प्रलेस आल इंडिया सेकुलर फोरम, किसान संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन, पूर्वांचल किसान यूनियन युनाइटेड अगेंस्ट हेट,एनएपीएम, पीएस-4 के संयुक्त बैनर के तहत किया गया था।

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