साहेबगंज। ‘पहले कभी हमें घुसपैठिए और बांग्लादेशी नहीं कहा गया। यह मामला इस साल हुए लोकसभा चुनाव के बाद से शुरू हुआ है’। यह कहना है उधवा ब्लॉक के पलाशगाछी पंचायत की रहने वाली अनारस बीबी का, जो एक आशा वर्कर हैं।
झारखंड के दो चरणों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में संथाल परगना की सभी 18 सीटों पर 20 नवंबर को मत डाला जाएगा। जिसके लिए भाजपा ने बांग्लादेशियों के घुसपैठ का मुद्दा बनाया है।
जिससे पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे जिले पाकुड़, साहेबगंज और दुमका में रहने वाली मुस्लिम आबादी को टारगेट किया जा रहा है। चौक-चौराहों पर लगे बड़े बैनर में साफ लिखा है ‘घुसपैठियों को बसाना है या आदिवासियों को बचाना है’।

वह आगे बताती हैं ‘हमें बांग्लादेशी कहने का सिलसिला इसी साल लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ है। इसकी चर्चा हुई तो पुलिस द्वारा हमारे दस्तावेजों और घरों की जांच हुई। लेकिन कुछ मिला नहीं। अब एक बार फिर चुनाव होने वाला है इसलिए हमलोग बांग्लादेशी बन गए हैं।
इसी साल रांची हाईकोर्ट के आदेश पर साहेबगंज जिले के चार प्रखंड के 10-10 गांवों का सर्वे किया गया है। जिसमें बरहेट, राजमहल, उधवा के अलग-अलग टोला और गांवों में इसकी जांच हुई है। इसका एक हिस्सा पश्चिम बंगाल के मालदा शहर से सटा हुआ है।
संख्या में बदलाव
एक स्थानीय पत्रकार ने नाम न लिखने की शर्त पर बात करते हुए कहा कि ‘संथाल परगना में बंगाली मुसलमानों की संख्या पिछले कुछ समय में बढ़ी है। इसकी वजह है मनुष्य एक स्थान से दूसरी जगह जाकर बसता है। यहां भी लोग आकर बस ही रहे हैं’।
वह आगे कहते हैं ‘पाकुड़ और साहेबगंज के इलाके में पहले आदिवासी और अन्य समुदाय के लोग रहते थे। लेकिन समय के साथ-साथ लोग कमाने-खाने के लिए बाहर चले गए और मुस्लिम एक जगह एकत्र होकर रहने लगे।
जमीन को लेकर पीछे विवाद भी हुआ था। जिसके बाद ही घुसपैठियों वाला नैरेटिव ज्यादा चलने लगा और बीजेपी ने आज झारखंड में इसे अपना राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। जिस पर वह पूरे संथाल परगना में चुनाव लड़ रही है’।

मैंने संथाल परगना के पाकुड़ और साहेबगंज जिले की यात्रा की। यहां आमतौर पर लोगों के जहन में घुसपैठियों का मामला पहुंचाने में भाजपा सफल रही है। भाजपा के चुनाव प्रचार के होर्डिंग में भी सिर्फ बांग्लादेश घुसपैठ का मामला दिखाई दे रहा है।
सीमा सुरक्षा केंद्र के हाथ में
संथाल परगना के देवघर में पीएम मोदी ने घुसपैठियों के मामले को उठाते हुए कहा कि ‘इन घुसपैठियों ने प्रदेश के लोगों की नौकरी और रोटी छीन ली है। इस चुनाव में रोटी, बेटी और माटी की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। जिसकी भाजपा रक्षा करेगी’।
वहीं गिरिडीह में गृहमंत्री अमित शाह ने मुसलमानों पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘ये घुसपैठिए झारखंड राज्य में आते हैं और हमारी बेटियों से दूसरी, तीसरी शादी करके उनकी जमीन हड़प रहे हैं। हम ऐसा कानून बनाएंगे जिससे घुसपैठिए गिफ्ट के जरिए हमारे आदिवासियों की जमीन न ले पाएं’।
बीजेपी के आरोपों का जवाब देते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की है।
उन्होंने कहा कि ‘झारखंड राज्य अपनी सीमा अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ साझा नहीं करता है। सीमा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के हाथ में है। अगर सरकार वहां अच्छा प्रबंधन नहीं दे पा रही तो वह नाकाम है। अपनी नाकामी को छुपाने के लिए राज्य सरकार पर उंगली उठाई जा रही है’।
भाजपा कार्यकर्ता घुसपैठ मुद्दे से नाराज
भाजपा के नेता लगातार इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं कि उनकी सरकार आई तो घुसपैठियों की जांच होगी। जबकि चुनाव से कुछ महीने पहले हुई जांच में प्रशासन के हाथ कुछ नहीं लगा।
इब्राईल शेख उधवा प्रमंडल में भाजपा कार्यकर्ता हैं और मुसलमानों को घुसपैठी कहे जाने से दुखी हैं। वह बताते हैं ‘जमीन पर घुसपैठ कोई मुद्दा नहीं है यह सिर्फ राजनीति से प्रेरित है। जिसके कारण मुसलमानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है’।

वह आगे कहते हैं ‘बहुत दुख होता है जब कोई हमें घुसपैठी कहता है। लोग मेरे पिताजी और मुझे आकर कहते हैं आपलोगों की पार्टी हम सबको घुसपैठिया कह रही है। यह सुनकर थोड़ी तकलीफ होती है। हमलोग अपने समुदाय के लोगों को ही जवाब नहीं दे पाते हैं’।
घुसपैठ के मामले में उधवा का नाम सबसे ज्यादा है। इसी ब्लॉक का आखिरी हिस्सा पश्चिम बंगाल से सटा हुआ है। मैं उसी हिस्से के लोगों से जाकर मिली। यह क्षेत्र पूरी तरह से बांग्ला भाषा और संस्कृति में ढला हुआ है। जहां खेती बाड़ी के अलावा बीड़ी बनाने का काम किया जाता है।
जमीन है बड़ा मुद्दा
कच्ची सड़क के रास्ते हम पूर्वी प्राणपुर पहुंचे जहां गंगा नदी को पार करते ही पश्चिम बंगाल शुरू हो जाता है। यही सरकारी स्कूल के हेडमास्टर मोहम्मद इरफान अली घुसपैठ से इतर यहां की सबसे बड़ी समस्या के बारे में बताते हैं।
उनके अनुसार घुसपैठ तो एक चुनावी मुद्दा है जबकि दियारा क्षेत्र की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पूर्वी प्राणपुर के लोग दो राज्यों के बीच चल रहे जमीन विभाजन की समस्या से परेशान हैं।

वह कहते हैं ‘यह क्षेत्र गंगा का किनारा है। बंगाल विभाजन के बाद यह जमीन बंगाल के हिस्से में चली गई। अब नक्शे के हिसाब से हम झारखंड में है। हमारे प्रमाणपत्र सब झारखंड के हैं लेकिन जमीन की रजिस्ट्री पश्चिम बंगाल के मालदा की है। हम यहां सारा काम कर सकते हैं लेकिन जमीन की रजिस्ट्री उस तरफ ही होती है।
मैं साल 2013 से इसे झारखंड में कराने का प्रयास कर रहे हैं। कई नेता और मंत्रियों से मिला लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया और अब हमें घुसपैठिया घोषित कर दिया गया है।
बंगाल में भाजपा को मिला फायदा
बीजेपी ने पिछले दस सालों में हिंदू मुसलमान के ध्रुवीकरण को अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीकों से इस्तेमाल किया है।बीजेपी ने घुसपैठ का मामला पश्चिम बंगाल में साल 2014 के लोकसभा चुनाव में हिंदू सेंटीमेंट के साथ शुरू किया। यहीं से पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए हिंदू मुसलमान मुद्दा बन गया।
जिसका नतीजा यह हुआ कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बांग्लादेशी घुसपैठ का मामला उठाकर बॉर्डर की 18 सीटों पर जीत दर्ज की। जिसमें बांग्लादेश के अलावा अन्य राज्यों से सीमा साझा करने वाली सीटें भी शामिल है। हाल में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा की सीटें कम होकर 12 हो गई। लेकिन बॉर्डर की सीटों पर बीजेपी का परचम लहराया।

झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा यह मुद्दा दूसरे चरण में इस्तेमाल कर रही है। ताकि 38 सीटों पर होने वाले चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीत सकें। इसमें जेएमएम के गढ़ दुमका पर भी नजर है। जिसे झारखंड की उपराजधानी भी कहा जाता है।
संथाल परगना में संथाल जनजाति सबसे ज्यादा है। जो पूरे झारखंड की जनजाति का 31.89 प्रतिशत है। इसके अलावा ओबीसी और मुस्लिम आबादी निर्णयक भूमिका में रहती है। बंगाल से सटे जिलों में पाकुड़ में मुस्लिमों की आबादी तीन लाख 22 हजार है। साहेबगंज जिले में तीन लाख 48 हजार है।
महिलाओं को नहीं है जानकारी
लेकिन यहां की मुस्लिम महिलाएं घुसपैठिया मामले की बहुत जानकारी नहीं है। पूर्वी प्राणपुर में कुछ महिलाएं बीडी बना रही थी। मैंने उनसे पूछा आपलोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया कहा जा रहा है। महिलाओं ने तुरंत जवाब दिया हमलोग बांग्लादेशी नहीं है। न ही हमें पता है कि भाजपा हमें घुसपैठिया कह रही है।
पलाशगछी की सरचंप नफीसा खातून को यह जानकारी नहीं है कि उऩ्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया कहा जा रहा है। वह कहती हैं ‘हमारे यहां लोगों के घरों में पानी नहीं, स्कूल में टीचर नहीं है, कोई बीमार पड़ जाए तो अच्छा अस्पताल नहीं है। अच्छे इलाज के लिए हम मालदा जाते हैं। इन मुद्दों को छोड़ हमें घुसपैठिए कह जा रहा है। यह सब राजनीति है।

हमने इस मामले में स्थानीय पत्रकार शाहिद अनवर से बातचीत की, वह बताते हैं ‘बीजेपी ने मुसलमानों को टारगेट करने के लिए आदिवासी लड़कियों की शादी और बांग्लादेशी घुसपैठ को मुद्दा बनाया है। जिसके तहत वह लगातार मुसलमानों को टारगेट कर रही है। जबकि यहां पर लोगों के पास 1932 का खातियान भी है’।
वह आगे कहते हैं कि जहां तक शादी की बात है आदिवासी लड़कियों की शादी सिर्फ मुसलमानों के साथ नहीं हुई है। बल्कि हिंदू लड़कों के साथ भी हुई है। लेकिन बात सिर्फ मुसलमानों की हो रही है।
मैंने इस मामले में काम करने वाली बीजेपी की जिला अध्यक्ष रेणू मुर्मू से बातचीत की। फिलहाल वह जेएमएम में शामिल हो गई हैं और इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से कतरा रही हैं।
उन्होंने मुझसे फोन पर बात करते हुए कहा कि ‘शादी सबकी निजी इच्छा है। वह जिससे चाहे कर सकता हैं। फिर आदिवासी लड़कियों को इस मामले में क्यों घसीटा जा रहा है’।
एक स्थानीय पत्रकार ने हमें बताया कि यहां बसे सभी लोग बांग्लादेशी नहीं है। अगर कोई है भी तो उसकी पहचान कर पाना बहुत मुश्किल है। सब के पास प्रमाणपत्र है। ऐसे में किसी को भी घुसपैठिए कह पाना आसान नहीं है।
वहीं शाहिद का कहना है पुराने जमाने यह बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। जिसमें मुसलमान नवाबों का राज था। उधवा में ही सिराजुद्दौला को मारा गया था। यहां के मुसलमान उन्हीं के वंशज हैं। वह सवाल करते हैं जब हमारे पूर्वज यहां से थे हमलोग घुसपैठिए कैसे हो गए?

इतिहास के अनुसार साल 1717 से 1880 तक बंगाल में नवाबों का शासन रहा है। प्लासी के युद्ध और बक्सर के युद्ध बाद 1764 में अंग्रेजों ने बंगाल पर कब्जा कर लिया।
शाहिद जिस नवाब सिराजुद्दौला की बात कर रहे थे वह बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब थे। जिसे उनके ही सेनापति मीर जाफर ने युद्ध में धोखा दिया। जो नवाब की मौत का कारण भी बना। यही कारण है कि बंगालियों में मीर जाफर धोखे के प्रतीक बन गया।
बीजेपी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज करना है। फिलहाल सात आरक्षित सीटों पर जेएमएम का कब्जा है।
(पूनम मसीह की ग्राउंड रिपोर्ट)
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