महाराष्ट्र के पालघर में 2020 में दो साधुओं की मॉब लिन्चिंग मामले मे आरोपी एक व्यक्ति को पार्टी में लेने के फैसले की सोशल मीडिया में आलोचना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने 24 घंटे में पीछे हटते हुए फैसले पर स्थगन लगा दिया।
काशीनाथ चौधरी को रविवार को पार्टी में शामिल किया गया था। सोमवार को पार्टी ने इस फैसले को स्थगित किया गया, जिसका कारण महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच सोशल मीडिया में पार्टी की कड़ी आलोचना होना है।
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने चौधरी के पार्टी प्रवेश पर स्थगन लगाने का निर्देश जारी किया, जिसके बाद पार्टी ने एक बयान में कहा कि आधिकारिक जांच दस्तावेज़ों के अनुसार चौधरी का नाम मामले से सम्बद्ध किसी प्राथमिकी या आरोपपत्र नहीं है और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेते समय सावधानी बरती गई थी लेकिन विषय की संवेदनशीलता देखते हुए काशीनाथ चौधरी के प्रवेश पर स्थगन लगा दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने भी कहा था कि चौधरी को पार्टी में लेने का फैसला सोच समझकर लिया गया था और चौधरी के बारे में उपलब्ध जानकारी पर विचार करने के बाद ही लिया गया था।
उन्होंने राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी (शरद पवार) के रोहित पवार की पार्टी को “वाशिंग मशीन” करार देने की आलोचना के जवाब में कहा था कि वह व्यक्ति (चौधरी) उन्हीं की पार्टी में था जो अब उसके भाजपा में आने पर आरोप लगा रहे हैं। मेरे पास सारी जानकारी है। मामले की जांच चल रही है और कई बातें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने मुझे बताया है कि चौधरी को पार्टी में शामिल करने का निर्णय समूची जानकारी जुटाने के बाद ही लिया गया है।
रोहित पवार ने कहा था कि भाजपा का नया मंत्र किन्हीं मूल्यों का पालन करना नहीं है बल्कि केवल सत्ता हासिल करना ही उनका लक्ष्य है। अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी ऐसे व्यक्ति का स्वागत नहीं करती जिस पर उसीने एक साधु की लिन्चिंग का आरोप लगाया था। जिस पर भी आरोप होते हैं, आपकी पार्टी में आते ही वह साफ सुथरा हो जाता है वाशिंग मशीन की तरह।
प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया में भी भाजपा की तीखी आलोचना हुई थी।
अप्रैल 2020 पालघर जिले में आदिवासी ग्रामीणों ने कथित रूप से दो साधुओं की मॉब लिन्चिंग हुई थी, साधुओं को बच्चे चुराने वाला समझा गया था।
भाजपा तब विपक्ष में थी और पार्टी ने मामले की केन्द्रीय जांच ब्युरो से जांच कराने की मांग की थी और इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। तत्कालीन महाराष्ट्र विकास आघाडी सरकार के मुखिया उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था। मामले में 251 लोग गिरफ्तार हुए थे और 15 नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया था।