इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अप्रैल में नोएडा में मजदूर आंदोलन के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र, थिएटर कलाकार और कार्यकर्ता आकृति चौधरी की रासुका के तहत हिरासत आदेश को रद्द कर दिया और तुरंत रिहाई का आदेश दिया।
लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा- आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक ‘गढ़ी हुई कहानी’ पर आधारित थी। अगर किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने आकृति को 5 लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह रकम नोएडा डीएम मेधा रूपम के वेतन से देने को कहा है।
आकृति को अप्रैल में हिरासत में लिया गया था और पुलिस ने 13 मई को उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने की घोषणा की।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि एफआईआर से पहले शांति भंग की नोटिस दी गई थी या नहीं। इससे पूर्व मंगलवार को कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से वीडियो प्रमाण मांगा था जिसमें आकृति प्रदर्शनकारियों को पथराव या वाहन जलाने के लिए उकसा रही थी।
13 अप्रैल 2026 को यूपी के नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन हुआ था, जिसमें पथराव हुआ था और कुछ वाहनों को क्षति पहुंचाई गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया था। पुलिस के अनुसार आकृति को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि कैंपेन फॉर द रिलीज़ ऑफ़ वर्कर्स एंड एक्टिविस्ट्स ऑफ़ नोएडा का आरोप है कि अकृति को सृष्टि गुप्ता, मनीषा चौहान और रुपेश रॉय के साथ 11 अप्रैल की शाम बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से सादे कपड़ों में नोएडा पुलिस ने हिरासत में लिया था।
योगी सरकार ने कोर्ट में कहा कि आकृति चौधरी को 12 अप्रैल सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत नोटिस भी दिया। आरोप है कि आकृति ने मजदूरों की भीड़ को आगजनी और पथराव के लिए उकसाया था।
इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने पूछा कि क्या आकृति को इससे पहले बीएनएनएस की धारा 126 के तहत नोटिस दिया गया था। सरकार ने इससे इनकार किया। बीएनएनएस की धारा 126 शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी है। जज ने कहा कि धारा 130 के तहत कार्रवाई से पहले धारा 126 की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
कोर्ट ने पुलिस की सामान्य डायरी में दर्ज जानकारी भी देखी। इसके बाद कोर्ट ने सरकार के उस दावे में सवाल उठाए, जिसमें बताया गया था कि पहले नोटिस दिया गया और उसके बाद गिरफ्तारी हुई।
कोर्ट ने कहा- ऐसा लग रहा है कि पहले आकृति को गिरफ्तार किया गया और बाद में नोटिस की कार्रवाई की गई। कोर्ट ने मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोपों पर भी सवाल उठाए।
इस पर सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के लिए लोग 11 अप्रैल को ही जुटने लगे थे। इस पर जस्टिस श्रीधरन ने पूछा कि अगर 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी, तो उस दिन आकृति ने ऐसी कौन-सी हिंसा भड़काई थी? यानी जो हिंसा हुई, वह आकृति की गिरफ्तारी के बाद हुई।
उल्लेखनीय है कि 25 वर्षीय आकृति अप्रैल में न्यूनतम वेतन वृद्धि समेत विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के दौरान गिरफ्तार उन मजदूर कार्यकर्ताओं में शामिल हैं, जिन पर पुलिस ने “साजिश” का आरोप लगाया था। इनमें पत्रकार सत्यम वर्मा, इंजीनियर आदित्य आनंद, ऑटो चालक रूपेश रॉय, मनीषा चौहान, छात्र हिमांशु ठाकुर और योगेश मीणा, कलाकार सृष्टि गुप्ता शामिल थे। 13 मई को पुलिस ने आकृति और सत्यम पर रासुका लगाने की घोषणा की थी।
(जनचौक ब्यूरो)