विदेशी धरती से वापस होते ही साहिबे हिंद ने मातृ प्रेम में डूबे भीगे शब्दों में जो टिप्पणी की वह देश में हंसी ठट्ठा का विषय बन गया है। क्योंकि देशवासियों को भली-भांति यह ज्ञात हो चुका है कि उनकी दिवंगत माताजी को जो अपशब्द कांग्रेस के खाली मंच से जिस शख्स ने कहे उसे बिहार पुलिस ने पकड़ लिया है और वह भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का नेता है। हो सकता है, इस पकड़-धकड़ में नीतीश कुमार जी का हाथ हो। क्योंकि बिहार में चली वोट अधिकार यात्रा विभिन्न व्यवधानों के बीच शानदार तरीके से अपने उद्देश्य में कामयाब रही। मुद्दा विहीन भाजपा ने लगता है इसे क्रियेट किया है। इसीलिए विदेश से आते ही साहिब जी ने इसे लपक लिया।
इतनी महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर दो शब्द नहीं बोले। सीधी मातृ प्रेम की दुहाई देकर आंखें डबडबाकर लोगों की संवेदना प्राप्त करने की कोशिश पूरी नौटंकी के साथ की गई।
ध्यान देने की बात ये है कि एक ऐसा शख़्स अपने को मिली गाली को सभी मां बहनों को दी गाली बता रहा है। उसने सरेआम राहुल गांधी की मां को कितने अपशब्द कहे। साथ ही शशि थरूर की पत्नी को 50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड कहा। अन्तर्राष्ट्रीय महिला पहलवान पर यौनाचार करने वाले को गले लगाया। मणिपुर में महिला अस्मिता के हनन पर आज तक जो मौन हो। स्मृति और कंगना आपके बारे में जो कह रही हैं वह सब क्या है? मां की गाली देने पर आपके मुंह से तमाम मां बहनों के अपमान की बात कहना उन्हें भ्रमित करने का चुनावी तरीका है।
दूसरी बात गाली कांग्रेस ने नहीं दी आपके अपने भाजपाई कार्यकर्ता से कांग्रेस के उस मंच पर दिलाई गई जहां से राहुल गांधी भाषण कर निकल चुके थे। ये कांग्रेस नहीं आपकी बिहार पुलिस कह रही है। इस मामले को उलझाने की कोशिश हो रही है।
सत्य को असत्य बनाकर अब तक आपने ख़ूब यश लूट लिया।अब बिहार की भाजपा महिला मोर्चा से बिहार बंद करवाने का ऐलान हुआ है नीतीश कुमार ने महिलाओं को 12,000 देने का अभी से जो वादा किया है उसे इस बंद में भुनाने का प्रयास होगा। मजमा जमाया जाएगा। प्रचार प्रसार खूब होगा।
जबकि मातृ प्रेम की आपकी असलियत तेजी से उजागर होनी शुरू हो गई है। लिखा जा रहा है कि ऐसा अनूठा मातृप्रेम आज तक नहीं देखा कि मां के जेवर चुराकर लाडला भाग जाए। जवान तीन-तीन पट्ठे होते हुए मां दूसरों के घर के जूठे बर्तन धोती रही। साहिब तो मां को छोड़कर हिमालय चले गए। कैसा मां से प्रेम होगा। फिर चाय बेची वडनगर में जब स्टेशन नहीं था। शादी हुई तो औरत को छोड़ भाग खड़े हुए। स्त्री के प्रति ये रवैया उनका वह प्रेम बता रहा है जो आज एक गाली पड़ने पर बहनों को झकझोर रहे हैं। फिर संघम शरणं गच्छामि और फिर स्त्री जाति से घृणा का खूब पाठ पढ़ा। घर परिवार छोड़ा।
मुख्यमंत्री बने फिर पीएम हुए। साल में एक बार जन्मदिन मनाने मां के पास बरामदे में बैठकर आशीष देते अखबारों की सुर्खियां बटोरी। साल के एक दिवसीय प्रेम को इवेंट बनाया जाता रहा। कभी कोई बात नहीं। घर प्रवास नहीं। एक दिन मां हीराबेन चल बसीं। साहिब ने कंधा दिया इवेंट बनाया गया और अग्नि संस्कार करने के बाद सीधे वन्देभारत ट्रेन को झंडी दिखाने पहुंच गए। गजब का प्रेम था मां से। पत्नी जसोदा बेन को परिवार के दुख में शामिल नहीं होने दिया। उनके निवास को पुलिस ने घेर रखा था। पत्नी मां के क्रियाकर्म में भी शामिल ना हो पाई। ये कैसा मां से प्रेम था।
स्त्री के प्रति घोर नफ़रत का पाठ संघ में पढ़ने के कारण उन्होंने विधानसभा चुनाव में कभी भी पत्नी के नाम का उल्लेख नहीं किया। लोकसभा चुनाव में पूरी जानकारी के अभाव में फ़ार्म कहीं रिजेक्ट ना हो जाए इस चक्कर में पहली बार पत्नी के कालम में जसोदाबेन का नाम दर्ज़ हुआ। देश ने नाम जाना किंतु वे साहिब के साथ कभी नज़र नहीं आईं। स्त्री के प्रति उनका रवैया इतना कठोर था। वह कैसे किसी स्त्री से प्रेम कर सकता है इतना ही नहीं अपनी नब्बे वर्षीय मां को नोटबंदी के दौरान लाइन में लगवाकर उसकी फोटो जारी करवाकर, मां के प्रति प्रेम का जो बेहतरीन नमूना प्रकट किया। वाह साहिबे हिंद वाह! ऐसा कौन करता है। मां की गाली का प्रचार भी बहुत दुखद है।
इसलिए जब साहिब जी ने मां की गाली पर नाटकीय प्रतिक्रिया दी तो सबको यही लगा कि यह सब बिहार में चुनाव प्रचार का एक मुद्दा जबरिया बनाया जा रहा है। मुद्दों की तलाश में भटकते साहिब को रोने का एक सुअवसर मिला। देखना यह है कि ये नकली आंसू बिहार में वोट चोर गद्दी छोड़ पर कितना असर डालते हैं। लगता तो यही है कि यह भी सिंदूर आपरेशन, ट्रम्प नमस्कार की तरह पूरी तरह फ्लॉप हो जाएगा। क्योंकि झूठ की उम्र छोटी होती है।
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)