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‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-2: दो संघर्ष, दो जीवन, दो लालसाएं, दो महत्वाकांक्षाएं, दो ज़िदें, दो अरमान

और इस संस्मरण में मानो अलग-अलग विधाएं ऐसे ही बैठ गई हैं आकर जैसे तार पर कुछ… Read More

‘मदर मेरी कम्स टू मीट’-1: ये है मेरी यातना और मेरी अपार ख़ुशी

(अरुंधति रॉय के लेखन की सबसे बड़ी ख़ूबियां उसकी सच्चाई और उसकी मौलिकता हैं। ये खूबियां उन्हें… Read More

ग्राउंड रिपोर्ट : “हुजूर ! जमीन हमारी मां है, सौदा मत कीजिए; नोटों से खेत बिकेंगे तो बच्चों का भविष्य कहां उगेगा?”

वाराणसी। बनारस जिसे वाराणसी और काशी भी कहा जाता है, जहां धर्म और संस्कृति की गूंज होती… Read More