Tuesday, January 18, 2022

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उर्मिलेश

लालचौकःएक किताब जिसमें कश्मीर का समकालीन इतिहास और पत्रकारिता दोनों है

दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में किसी दिन फोन पर आवाज आईः ‘सर, मैं रोहिण कुमार हूं—लालचौक नाम से कश्मीर पर एक किताब लिखी है। आपको भेजना चाहता हूं। आपका डाक-पता चाहिए था।’ उस समय तक मेरी रोहिण से कभी...

अकबर इलाहाबादी से अकबर प्रयागराजी तो अमरूद इलाहाबादी कैसे!

जब से हमारे इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया गया, तब से मैं सोचता रहा हूं कि वहां के अमरूदों का नाम क्यों नहीं बदला गया? क्या इलाहाबाद के नागरिकों के मुकाबले अमरूदों की तरफ से ज्यादा कड़ी प्रतिक्रिया की...

निर्वाचन प्रणाली में दो बड़े सुधारों के बगैर दांव पर है चुनावों की विश्वसनीयता

हमारे शीर्ष सत्ताधारी नेताओं, बड़े नौकरशाहों और योजनाकारों ने कुछ बेहद सुंदर और सकारात्मक शब्दों के अर्थ बदल दिये हैं। ये सकारात्मक की जगह बेहद नकारात्मक बन चुके हैं। यह सब मौजूदा सत्ताधारियों के दौर की कहानी नहीं है।...

कृषि-कानून वापसी के बाद यूपी की चुनावी राजनीति में भाजपा के बड़े मंसूबे

दोहरे दबाव में कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अब आगे की रणनीति क्या है? यह बात सबको मालूम है कि इन कारपोरेट-पक्षी और किसान-विरोधी कानूनों को दो तरह के दबावों-किसान आंदोलन...

सावरकर के राष्ट्रवाद को अम्बेडकर ने भारत के लिए ख़तरनाक क्यों कहा था?

देश के मौजूदा सत्ताधारी जब कभी मौका पाते हैं, स्वतंत्रता आंदोलन के खास कालखंड के एक विवादास्पद चरित्र-विनायक दामोदर सावरकर के महिमा-मंडन के लिए कोई न कोई नयी कथा रचते नजर आते हैं। देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के...

1857 की क्रांति, उर्दू पत्रकारिता और भारतीय पत्रकारिता का पहला शहीद

सबसे पहले तो इस किताब के शीर्षक में ‘क्रांति’ शब्द पर ध्यान जाता है। अपने देश में सन् 1857 के ब्रिटिश हुकूमत-विरोधी जन-विद्रोह को तरह-तरह की संज्ञाओं और विशेषणों से नवाजा जाता है। तब भारत में ब्रिटिश कंपनी-ईस्ट इंडिया...

बाइडेन-मोदी चर्चा में ट्रस्टीशिप के मायने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका-दौरे में महात्मा गांधी का भी कई संदर्भों में उल्लेख आया। सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जोसेफ रॉबिनेट बाइडेन ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के शीर्ष नेता महात्मा गांधी के कुछ राजनीतिक मूल्यों की चर्चा की। बीते...

उत्तराखंड डायरी-2: उत्तराखंडी राजनीति का ‘बाम्हन-ठाकुर फ्रेम’और पचपन फीसदी सबाल्टर्न आबादी

तीन-चार दिनों के उत्तराखंड-प्रवास में राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलने की बजाय मैंने समाज के कुछ जागरूक और सक्रिय लोगों से मुलाकात पर ज्यादा जोर दिया। एक पत्रकार के लिए यह कोई अच्छा फैसला नहीं था। वह भी...

उत्तराखंड डायरी-1: दो शताब्दियों की यादें, गिर्दा की कोठरी और पहाड़ के नये-पुराने दोस्त

फरवरी, 2020 के बाद यह पहला मौका था, जब मेरे जैसा घुमक्कड़ अपने घर-शहर से बाहर निकला। कोविड-19 के प्रकोप और आतंक ने मनुष्यता को जितना सताया और डराया है, वह अभूतपूर्व है। साढ़े छह दशक के अब तक...

स्व-श्रेष्ठता के दंभ में हर किसी को खारिज करने के खतरे

अभी हाल की बात है, एक दिन मैंने अपने फेसबुक पेज पर दक्षिणपंथी खेमे के एक वरिष्ठ संपादक की असमय मौत पर दुख प्रकट करते हुए संक्षिप्त श्रद्धांजलि-लेख लिखा। इस पर कुछ ‘वामपंथी’ और ‘समाजवादी’ किस्म के बुद्धिजीवी खासे...

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भारत के 98 अरबपतियों के पास 55.5 करोड़ लोगों के बराबर संपत्ति, 84 प्रतिशत परिवारों की आय घटी: ऑक्सफैम रिपोर्ट

जहां एक ओर आरएसएस-भाजपा ने पूरे देश में एक धार्मिक उन्मादी माहौल खड़ा करके लोगों को हिंदू-मुसलमान में बुरी...