उर्मिलेश

सावरकर के राष्ट्रवाद को अम्बेडकर ने भारत के लिए ख़तरनाक क्यों कहा था?

देश के मौजूदा सत्ताधारी जब कभी मौका पाते हैं, स्वतंत्रता आंदोलन के खास कालखंड के एक विवादास्पद… Read More

उत्तराखंड डायरी-2: उत्तराखंडी राजनीति का ‘बाम्हन-ठाकुर फ्रेम’और पचपन फीसदी सबाल्टर्न आबादी

तीन-चार दिनों के उत्तराखंड-प्रवास में राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलने की बजाय मैंने समाज के कुछ… Read More

उत्तराखंड डायरी-1: दो शताब्दियों की यादें, गिर्दा की कोठरी और पहाड़ के नये-पुराने दोस्त

फरवरी, 2020 के बाद यह पहला मौका था, जब मेरे जैसा घुमक्कड़ अपने घर-शहर से बाहर निकला।… Read More

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता-वापसीः अमेरिका की मजबूरी, समर्पण या किसी नये षड्यंत्र का प्रकल्प?

अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी को लेकर कुछ भारतीय मीडिया प्लेटफार्म्स और कथित सामरिक विशेषज्ञ… Read More

मीडिया संस्थानों पर छापेमारी के भारी विरोध के बीच संकीर्णता की कुछ आवाजें

गुरुवार की सुबह, दैनिक भास्कर समूह के दफ्तरों और उसके मालिकों के घरों पर सरकारी एजेंसियों की… Read More

कुछ चुनाव-रणनीतिकार अगर सीएम-पीएम बनाने लगें तो बचे-खुचे लोकतंत्र का क्या होगा?

नेताओं और दलों को ‘चुनाव रणनीति’ बताने और बनाने वालों के ‘बाजार’ के किसी ‘कामयाब कारोबारी’ को… Read More