Friday, March 1, 2024

इज़राइल-हमास के बीच 7 दिनों से जारी युद्ध-विराम का खात्मा, हवाई हमले में 54 लोग हताहत

इजरायली सेना ने आज सुबह से ही उत्तरी गाजापट्टी में हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, ताजा खबर के मुताबिक सुबह से अब तक इन हमलों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या 54 हो चुकी है। आज सुबह 7 बजे तक युद्ध-विराम की समय-सीमा खत्म होते ही हवाई हमलों की शुरुआत हो चुकी थी, और पहले हमले में दर्जन से अधिक लोगों के हताहत होने की खबर थी।  

पिछले कुछ दिनों तक इजराइल-हमास के बीच चला युद्धविराम आज खत्म हो गया, जब आज शुक्रवार को गाजा पर इजराइल ने फिर से हमला बोलकर दर्जनों फिलिस्तीनियों की हत्या कर दी है। फिलस्तीन के स्वास्थ्य विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी गाजा के कई हिस्सों में पर्चे गिराकर लोगों को तत्काल इस इलाके को खाली करने की चेतावनी जारी की थी।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युद्ध-विराम की मध्यस्थता में शामिल क़तर, मिस्र और संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से लगातार युद्ध-विराम के लिए जोर दिया जा रहा था, जिसकी मियाद यहां के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 7 बजे तक ही थी। 

7 अक्टूबर से जारी इस खूनी संघर्ष में अब तक गाजा में 15,000 से अधिक फिलिस्तीनियों के मारे जाने की खबर है, जबकि 30,000 से अधिक लोग घायल बताये जा रहे हैं। मृतकों में बच्चों, महिलाओं और बूढ़ों की संख्या सबसे अधिक है।  

इस प्रकार कहा जा सकता है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से जिस बात की बार-बार घोषणा की जा रही थी, चीजें उसी दिशा की ओर एक बार फिर से मुड़ चुकी हैं। इजराइल अपने 1,400 नागरिकों की मौत का बदला 10 गुना से भी ज्यादा निहत्थे फिलिस्तीनियों को मारकर भी अधूरा मानता है, और हमास के खिलाफ उसकी यह जंग कहीं न कहीं फिलिस्तियों को पूरी तरह से गाजापट्टी से बाहर कर देने की है।

इजराइली सिविल डिफेंस के बयान में भी कहा गया है कि गाजापट्टी के पास दक्षिणी इजराइल में याद मोर्देचाई और नेटिव हतारा बस्तियों में हवाई हमलों के सायरन की आवाज सुनाई दी है। 

अल-ज़जीरा की खबर में कहा गया है कि हालांकि लेबनानी-इजराइली सीमा पर युद्ध-विराम के बाद से कोई हलचल नहीं हुई है, और वहां पर सब शांत नजर आ रहा है। उधर हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य इज्ज़त अल-रिशेक ने अपने बयान में कहा है कि इजराइल जिस लक्ष्य को पहले 50 दिन के हमले में हासिल नहीं कर सका, वह युद्ध-विराम के बाद एक बार फिर से आक्रमण करने के बावजूद हासिल नहीं करने जा रहा है। हमारे लोगों की दृढ़ता और हमारे बहादुराना प्रतिरोध के साथ, हम दुश्मन के अपराधों, उसके नाजी आक्रमण और इसके नागरिकों को निशाना बनाने का जमकर मुकाबला करते रहेंगे।”

इसके साथ ही इजराइल ने गाजा के पास के क्षेत्रों में कृषि संबंधित गतिविधियों पर पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इजराइली आर्मी रेडियो के अनुसार संघर्ष के हालात के मद्देनजर गाजापट्टी की सीमा के 7 किमी तक के दायरे को इसके तहत रखा गया है।

उधर गाजा स्थित फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों में द अल-क़ुद्स ब्रिगेड्स की ओर से भी दावा किया गया है कि सुबह ज़िओनिस्ट दुश्मन के द्वारा हमारे लोगों के खिलाफ अपराधों के जवाब में हमारी ओर से इजराइल की सीमा के भीतर राकेट दागे गये।  

दक्षिणी गाजा के नास्सेर अस्पताल में दसियों हजार लोगों ने शरण ले रखी है

जैसे ही इजराइल की ओर से सैन्य अभियान की शुरुआत हुई, खान यूनिस के एक निवासी मंसूर शौमन ने अल ज़जीरा के साथ अपनी बातचीत में कहा है कि दसियों हजार की संख्या में लोगों ने भागकर नासिर मेडिकल हॉस्पिटल में पनाह ली। उन्होंने आगे बताया कि वे खुद फिलहाल प्रसूतिगृह के पास एक तंबू में रह रहे हैं, जबकि मेरे सामने ही 10 से अधिक मारे जा चुके लोगों को अम्बुलेंस में लाया गया। 

शौमन का कहना था, “आम नागरिकों के बीच में आम चिंता की बात यह है कि आगे क्या होने जा रहा है, उसको लेकर सभी अनजान हैं। उन्हें अभी भी भरोसा है कि अभी भी वार्ता जारी है, और अगले कुछ घंटों में युद्ध-विराम हो सकता है। फिलहाल बाहर निकलना बेहद खतरनाक है, इसलिए जो जहां है वहीं पर शरण लिए हुए है।”

लेकिन इसके साथ ही शौमन का यह भी कहना था कि, “इन सभी चुनौतियों के बावजूद, यहां फिलिस्तीनी अपनी जमीन पर जमे हुए हैं, और वे 1948 या 1967 को दोहराने नहीं देंगे। हम अपनी भूमि को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले, कब्जे की सभी कोशिशों के खिलाफ हम पूरी ताकत के साथ कोशिश करते रहेंगे।”

उधर क़तर के विदेश मंत्रालय ने गाजा पर इजराइल के एक बार फिर से बमबारी की शुरुआत पर गहरा अफ़सोस जताते हुए कहा है कि इसकी वजह से मध्यस्थता की कोशिशें जटिल हो रही हैं और “गाजापट्टी में मानवता की तबाही में इजाफा होता है।” इसके साथ ही कतरी मंत्रालय ने हिंसा रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है।

उधर इजराइल का आरोप है कि हमास ने इजराइली सीमा पर मिसाइल दागकर युद्धविराम का उल्लंघन किया था, जिसके जवाब में उसकी ओर से कार्रवाई की गई। जबकि हमास का कहना है कि इजराइल ने हवाई हमले में मारे गये एक इजराइली परिवार की मृत देह और बंदियों की रिहाई के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

हमास ग्रुप की ओर से एक बयान में कहा गया है, “हमने बिबास परिवार के शवों को सौंपने का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत उनके पिता को रिहा किया जाना शामिल था, ताकि वे उनके दाह-संस्कार में शामिल हो सकें। इसके साथ-साथ हमने दो इजराइली बंदियों को भी रिहा करने की बात कही थी। लेकिन इजराइल ने इन सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया है क्योंकि इसने गाजापट्टी के खिलाफ अपने आपराधिक दुस्साहस को एक बार फिर से शुरू करने के अपने पहले के फैसले पर आगे जाने का मन  बना लिया था।” 

उधर संयुक्त-राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने भी एक बार फिर से गाजा में इजराइली हमले पर अफ़सोस जताते हुए अपने बयान में कहा है, “मुझे इस बात का गहरा अफसोस है कि गाजा में एक बार फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई है। मैं अब भी उम्मीद करता हूं कि जो विराम स्थापित हुआ था, उसे फिर से बहाल करना संभव हो सकता है। शत्रुता की और एक फिर से वापसी से यही पता चलता है कि सच्चे अर्थों में मानवीय युद्धविराम होना कितना महत्वपूर्ण  है।”  

फ्रांस ने गाजा में दोबारा संघर्ष-विराम को लागू करने का आह्वान किया है 

फ़्रांस की सरकार ने अपने बयान में कहा है कि इजराइल और हमास के बीच संघर्ष विराम ख़त्म होने का उसे बेहद अफ़सोस है। विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना ने आज दुबई में हो रही सीओपी-28 की बैठक में युद्ध-विराम को “जरुरी” करार देते हुए कहा है कि, “संघर्ष विराम का टूटना बेहद बुरी खबर है, यह अफसोसजनक है, क्योंकि यह कोई समाधान नहीं लाता है और जो भी सवाल उठ रहे हैं, उनके समाधान को जटिल बनाता है।”

फ़्रांस के विदेश मंत्री ने कहा है, “55 दिनों से अत्यंत कठिन परिस्थितियों में रह रहे बंधकों को मुक्त कराना भी आवश्यक है, ताकि इसके एवज में ज्यादा मानवीय सहायता पहुंचाई जा सके और गाजा पट्टी के भीतर वितरित किया जा सके, जहां पर नागरिक आबादी पीड़ित है।”

जर्मनी ने भी गाजा युद्धविराम को कायम रखने का अनुरोध किया है 

जर्मनी के विदेश मंत्रालय का कहना है कि गाजा में संघर्ष विराम जारी रखने को सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जितना संभव है, उसे वो सब कुछ करना चाहिए। विदेश मंत्रालय की ओर से एक्स पर कहा गया है, “इस बात को सुनिश्चित करने के लिए हमास इजराइल के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न न करे, और फिलिस्तीनियों एवं इजराइलियों की पीड़ा को खत्म करने के लिए इसे शस्त्र-हीन करना आवश्यक है। बेशक, इसका मतलब यह है कि हमास को अपने हथियार डाल देने होंगे। केवल इसी के माध्यम से  2-स्टेट समाधान  के लिए राजनीतिक क्षितिज खुल सकता है, जो इजराइल और फिलिस्तीनियों दोनों के लिए सुरक्षा मुहैया करा सकता है।”

सीओपी-28 में इज़राइल की उपस्थिति के खिलाफ ईरानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा सम्मेलन का बहिष्कार 

बैठक में इजराइली प्रतिनिधियों की उपस्थिति के विरोध में ईरानी प्रतिनिधि ने आज दुबई में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता सीओपी-28 का बहिष्कार कर दिया है। समाचार एजेंसी आईआरएनए ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे ऊर्जा मंत्री अली अकबर मेहरबियन के हवाले से कहा है कि ईरानी पक्ष ने COP-28 में इज़राइल की उपस्थिति को “सम्मेलन के लक्ष्यों और दिशानिर्देशों के विपरीत” मानते हुए सम्मेलन के बहिष्कार का फैसला लिया है। उधर इज़राइल इस बात का दावा कर रहा है कि हमास के पास अभी भी 137 बंधक हैं।

इज़राइली सरकार के प्रवक्ता इलोन लेवी ने संवाददाताओं के साथ अपनी बातचीत में कहा है कि, “हमास के पास अभी भी अक्टूबर के हमलों के 137 बंधकों के अलावा चार अन्य लोग हैं, जो युद्ध से पहले इजराइल से लापता हो गए थे। इन बंधकों में चार और 10 महीने की उम्र के दो बच्चे भी शामिल हैं, जिनके बारे में अब हमास की ओर से दावा किया जा रहा है कि वे मर चुके हैं।

इसके अलावा कुल 117 पुरुष बंधक अभी भी गाजा में बंदी हैं, जिनमें दो बच्चों सहित 20 महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें से 126 बंधक इजराइली हैं जबकि 11 अन्य विदेशी नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में आठ थाई, एक नेपाली, एक तंजानियाई, एक फ्रांसीसी और मैक्सिकन नागरिक हैं। इन बंधकों में से दस लोग 75 वर्ष और उससे अधिक उम्र के हैं। हमास ने अब तक 110 बंधकों को रिहा किया है, जिसमें 86 इजराइली और 24 विदेशी नागरिक बताये जा रहे हैं।

इजराइल-हमास युद्ध का दूसरा चरण भिन्न रहने वाला है: तुर्की विशेषज्ञ

अल ज़जीरा ने बड़ा खुलासा करते हुए तुर्की के सेवानिवृत्त कर्नल यूसुफ अलबार्डा के हवाले से कहा है कि इज़राइल के द्वारा लड़ाई के दूसरे चरण को युद्धविराम से पूर्व वाली स्थिति से अलग करके देखना चाहिए।

अलबार्डा ने अल जज़ीरा के साथ अपनी बातचीत में दावा किया है कि “इज़राइली पक्ष के लिए युद्ध को जारी रखने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। इसे देखते हुए, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार यह दिखावा करने की कोशिश में लगी हुई है कि उसका लक्ष्य उत्तरी क्षेत्र से हमास को नेस्तनाबूद करने का है, और वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रति कटिबद्ध हैं, लेकिन हकीकत इससे अलग है।” उन्होंने कहा, “नेतन्याहू अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने की कोशिश में हैं, न कि इजराइल के लक्ष्य से उनका सरोकार है।” 

इज़राइल लगातार हमास को नष्ट करने की अपनी प्रतिज्ञा को दोहरा रहा है, लेकिन अलबार्डा का मानना है कि यह “संभव नहीं” है, क्योंकि हमास संघर्ष की वजह नहीं है बल्कि यह संघर्ष तो वर्षों के कब्जे का “परिणाम” है। उनका कहना था कि इज़राइल अपनी सुरक्षा की गारंटी चाहता है, लेकिन “जब तक आप फिलिस्तीनियों की हत्या करते हैं, उन लोगों को उनके घरों से निकालते हैं, लोगों की जमीन पर कब्जा करते हैं, वेस्ट बैंक में लोगों को उनके खेतों में मारते हैं, तब तक वहां पर सभी इजराइलियों के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं रहने वाला है।

रूस टीवी ने भी इजराइल द्वारा गाजा में मौजूद 500 किमी सुरंगों और हमास के खात्मे के मिशन पर अपने लेख में उन तमाम कारकों को गिनाते हुए इस मिशन को असंभव बताया है। 7 दिनों के युद्ध-विराम के बाद इजराइल की ओर से एक बार फिर से खूनी खेल को दोहराने की हरकत ने साफ़ कर दिया है कि बेंजामिन नेतन्याहू और उसके जिओनिस्ट मंत्रिमंडल को न तो दुनियाभर में शांतिपूर्ण ढंग से रह रहे लाखों यहूदियों की चिंता है, न ही उसे इजराइल और उसमें रहने वाले बहुसंख्यक देशवासियों की ही चिंता है, और न ही वैश्विक बिरादरी की वह कोई परवाह करता है।

ऐसा कहा जा रहा है कि इजरायली सेना यदि गाजापट्टी में यदि हमास का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म भी कर दे, उसके बावजूद हमास का तीन-चौथाई हिस्सा सुरक्षित रहने वाला है। 

गाजापट्टी में मौजूद सुरंगों की कहानी 2007 से शुरू हुई है, जिसका एक सिरा मिस्र के सिनई तो कुछ सिरे गाजापट्टी से निकलकर इजराइल की घरती में खुलते हैं। बेंजामिन नेतन्याहू के द्वारा एक तरफ 20 लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को 4 किमी x 2 किमी के बेहद सीमित दायरे में खुले असमान के नीचे भूखे-प्यासे घायल और मरणासन्न अवस्था में मार डालने के प्रयासों को सारी दुनिया खुली आंखों से कितने दिन और देखेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।  

(रविंद्र पटवाल जनचौक की संपादकीय टीम के सदस्य हैं।)

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