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सोनभद्र मामले में प्रशासनिक साजिश का हुआ खुलासा,प्रत्यक्षदर्शी ने बताया-समझौता न करने पर कांस्टेबल ने दी थी अनहोनी की चेतावनी

नई दिल्ली। सोनभद्र नरसंहार में प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से एक सनसनीखेज खबर आ रही है जिसमें बताया गया है कि पास के पुलिस थाने के एक कांस्टेबल ने एक ग्रामीण को फोनकर जमीन विवाद मामले में समझौता करने की बात कही थी। ऐसा न होने पर उसने कुछ भी घटित होने की चेतावनी दी थी। रामराज नाम के इस प्रत्यक्षदर्शी ने यह भी दावा किया कि हमले की दृढ़ आशंका को देखते हुए उसने एसपी सलमान ताज जफरताज पाटिल को फोन कर उनसे सहायता मांगी। लेकिन उसको पुलिस थाने से संपर्क करने के लिए कहा गया।

रामराज ने बताया कि घोरावल पुलिस स्टेशन के कांस्टेबल सत्यजीत ने उसको फोन कर बताया कि एसएचओ उससे मिलकर जमीन विवाद मामले में बातचीत करना चाहते हैं। रामराज ने बताया कि “उन्होंने कहा कि अगर मैं नहीं आता हूं और कुछ होता है तो उसके लिए मुझे प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। इसका मतलब है कि उन्हें इस बात का पता था कि कुछ होने वाला है। पड़ोसी गांवों के कुछ लोगों से मैंने सुना था कि मूर्तिया गांव का प्रधान (जिसने फायरिंग की अगुआई की) ट्रैक्टर और आदमी इकट्ठे कर रहा है।”

पाइप जिसमें लोग जान बचाने के लिए छुपे थे। साभार- इंडियन एक्सप्रेस

रामराज ने बताया कि उसने एसपी पाटिल को फोन किया और उन्हें बताया कि प्रधान यज्ञदत्त कुछ योजना बना रहा है। रामराज का कहना था कि “एसपी ने मुझे बताया कि पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर मामले को हैंडल करेगा।” रामराज ने बताया कि हमले के बाद उसने 11 से लेकर 11.30 बजे तक 100 के इमरजेंसी नंबर और 1076 समेत कई जगहों पर ढेर सारे फोन किए। घोरावल पुलिस स्टेशन से घटनास्थल तक पहुंचने में पुलिस ने एक घंटे का समय लिया जो महज 30 किमी की दूरी पर था। तब तक यज्ञदत्त और उसके आदमी वारदात को अंजाम देकर भाग चुके थे।

हालांकि एसपी ने रामराज के यहां से इस तरह के किसी फोन के आने की बात से इंकार किया है। पाटिल ने बताया कि “मैं नहीं जानता वह इस तरह के आरोप क्यों लगा रहा है। मैं उससे इस मसले पर बात करूंगा।” आपको बता दें कि सत्यजीत को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं। आगे उन्होंने बताया कि “अगर कांस्टेबल विवाद में पक्ष लेने की गलती करता हुआ पाया जाएगा तो हम उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

आपको बता दें कि 17 जुलाई की यह घटना जमीन विवाद को लेकर हुई। जिसमें गोंड जाति के लोगों पर प्रधान यज्ञदत्त के आदमियों ने हथियारों से हमला कर दिया था जिसमें 10 लोगों की मौत हो गयी थी और 23 के करीब लोग घायल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज घटनास्थल पर जाने की घोषणा की है।

घटनास्थल पर पुलिस।

पुलिस ने इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है और 17 दूसरे लोगों की तलाश जारी है। मुख्य अभियुक्त यज्ञदत्त गिरफ्तार कर लिया गया है।

घटना की शुरुआत के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने देखा कि 10.45 बजे ढेर सारे आदमी मुख्य सड़क पर इकट्ठा हो रहे हैं। 35 वर्षीय बसंत लाल गोंड ने बताया कि “हम लोगों ने सोचा कि कुछ अधिकारी बातचीत के लिए आए हैं। हम लोग विवादित जमीन की तरफ गए। तभी हम लोगों को पता चला कि प्रधान यज्ञदत्त 20 ट्रक्टरों में 100 लोगों के साथ आया है। वे सभी हथियारबंद थे और 11 बजे उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। हम उनका जवाब नहीं दे सके क्योंकि उनके पास 10-12 बंदूकें थीं।”

अपने बाल-बाल बचने की घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि “अगर मैं सामने होता तो मेरी भी हत्या हो जाती। वे अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे।” 40 वर्षीय रामबली ने बताया कि बहुत सारे घिसटते हुए पास स्थित एक बड़ी पाइप में घुस गए थे। कीचड़ में पड़े खून के धब्बों को दिखाते हुए रामबली ने बताया कि “प्रधान ने पाइप के एक सिरे पर एक शख्स को खड़ा कर रखा था और दूसरे पर एक समूह मौजूद था। समूह दूसरे सिरे से लोगों को लाठियों से  धकेलता था। और दूसरी तरफ खड़ा आदमी जो बाहर निकलता था उसे गोली मार देता था।”

51 वर्षीय फूलपत्ती ने बताया कि जब वह भाग रही थी तो एक बुलेट उसकी जांघ को रगड़ते हुए निकली। उसने बताया कि “भागे नहीं होते तो अभी गड़े होते जमीन में।”

राजबली ने बताया कि हमला तकरीबन एक घंटे चला। तकरीबन 100 गोलियां फायर की गयीं। ट्रैक्टर पर खड़ा एक शख्स लगातार गोलियों को लोड कर रहा था और उन्हें फायरिंग करने वाले लोगों को थमाता जा रहा था जो निहत्थे लोगों को निशाना बनाकर उन पर दाग रहे थे।

रामराज ने बताया कि पुलिस उस समय दोपहर के करीब आयी जब सब कुछ खत्म हो गया था। नौ लोग पहले ही मर चुके थे और बाद में एक और शख्स की अस्पताल में मौत हुई।

(पूरी रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस से साभार ली गयी है।)

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This post was last modified on July 21, 2019 11:05 am

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