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दिल्ली दंगों को लेकर अकाली-भाजपा गठबंधन में दरार हुई और चौड़ी

दिल्ली दंगों को लेकर अकाली-भाजपा गठबंधन में दरार और चौड़ी हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल ने दंगों की तीखी आलोचना की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राजधर्म’ निभाने की नसीहत दी है तो वहीं दिल्ली दंगों की जांच के लिए सर्वोच्च सिख संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने अपने तईं एक कमेटी गठित कर दी है। हासिल जानकारी के मुताबिक एसजीपीसी (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) में भी बाकायदा प्रस्ताव लाया जा रहा है कि सिख समुदाय के जिन लोगों ने दंगों के दौरान मुफीद भूमिका निभाई और दोनों संप्रदायों के लोगों को बचाने के लिए खुद को दांव पर लगाया, उन्हें विशेष तौर पर सम्मानित किया जाएगा।     
अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल ने दिल्ली दंगों की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह की बेलगाम हिंसा बेहद अफसोसनाक है और इससे इंसानियत शर्मसार हुई है। इन दंगों की जितनी निंदा की जाए कम है। बादल ने यह भी कहा है कि दिल्ली के कुछ हिस्से गहरी साजिश के तहत हिंसा का शिकार हुए हैं और इसके पीछे जो गुनहगार हाथ हैं उनको बेनकाब करना और सजा दिलवाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए। यही राजधर्म है। बादल यहां तक बोले कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म निभाना ही चाहिए। बादल के कथन के संकेत पानी की मानिंद साफ हैं।
शिरोमणि अकाली दल के राज्यसभा सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा और सुखदेव सिंह ढींडसा ने भी दिल्ली दंगों में केंद्र सरकार की लापरवाही पर इशारों में तंज कसा है। सूत्रों के मुताबिक प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर हालात का जायजा लेगा और प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात करेगा। शिरोमणि अकाली दल के भीतर से दिल्ली दंगों में केंद्रीय स्तर की सरकारी शह को मुद्दा बनाकर भारतीय जनता पार्टी से गठजोड़ तोड़ने की सुगबुगाहट भी जोर पकड़ रही है। शिरोमणि अकाली दल अपने तौर पर दिल्ली दंगों के पीड़ितों की राहत व सहयोग के लिए अपने वालंटियर भी पंजाब से भेज रहा है।
राज्य भाजपा इस पर खामोश है। पंजाब भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इस संवाददाता से कहा, “हमें जानकारी नहीं है कि हालिया दिल्ली दंगों के बारे में शिरोमणि अकाली दल का आधिकारिक स्टैंड क्या है। लेकिन कोई भी कदम उठाने या बयान देने से पहले शिरोमणि अकाली दल को हमें विश्वास में लेना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।”
उधर शिरोमणि अकाली दल के एक सिरमौर नेता ने कहा, “गठबंधन धर्म की मजबूरियों के चलते अब तक हम भाजपा का समर्थन करने को मजबूर होते रहे हैं। सीएए के मुद्दे पर हमारा अलग स्टैंड हो गया है और दिल्ली दंगों पर केंद्र सरकार की संदेहास्पद भूमिका तथा कमोबेश खामोशी हमें बेचैन कर रही है। दिल्ली से हमें जो सूचनाएं मिल रही हैं वे साफ बताती हैं कि केंद्रीय शासन व्यवस्था में बैठे लोग जानबूझकर इतने दिन खामोश रहे और पुलिस को कुछ नहीं करने दिया गया। बल्कि पुलिस की भूमिका एक तरफा भी रही।” बता दें कि जिन भी अकाली नेताओं से बात होती है वे भाजपा के साथ साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नीयत और नीति पर भी बड़े सवाल खड़ा करते हैं।
उधर, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दिल्ली दंगों की जांच के लिए 6 सदस्य कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब को पूरे हालात की रिपोर्ट तय समय सीमा में सौंपेंगी। इस कमेटी में वरिष्ठ वकील एचएस फूलका, पंजाबी विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर जसपाल सिंह, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन तरलोचन सिंह, डीएसजीपीसी की वाइस चेयरपर्सन बीबी रणजीत कौर और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनिंदर सिंह सिरसा को शामिल किया गया है। वरिष्ठ अकाली नेता नरेश गुजराल तथा डीएसजीपीसी के महासचिव हरमीत सिंह खालसा भी इस कमेटी को सहयोग करेंगे। बता दें कि शिरोमणि अकाली दल के भीतर इस बात को लेकर गए गहरी नाराजगी है कि दिल्ली दंगों के दौरान नरेश गुजराल की दिल्ली पुलिस-प्रशासन द्वारा अनदेखी की गई और बचाव के लिए की गई उनकी गुहार एकदम हाशिए पर डाल दी गई।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार हरप्रीत सिंह के मुताबिक गठित कमेटी दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी और तमाम प्रभावित लोगों से विस्तार से बातचीत के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी के सदस्य दोनों समुदायों के लोगों के बीच शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।गौरतलब है कि पंजाब से कुछ संगठन दिल्ली के दंगा पीड़ित इलाकों में पुनर्वास में हाथ बंटाने के लिए भी के लिए भी जा रहे हैं।

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल जालंधर में रहते हैं।)

This post was last modified on March 1, 2020 11:36 pm

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