Thursday, October 28, 2021

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अहमदाबाद : कोरोना से बिगड़े हालात की नौकरशाहों पर गिरी गाज, राजनैतिक नेतृत्व भी सवालों के घेरे में

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अहमदाबाद। अहमदाबाद की परिस्थिति बिगड़ती जा रही है। लॉक डाउन के 40 से अधिक दिन हो जाने के बाद पिछले एक सप्ताह से अहमदाबाद में लगातार 270 से 350 के बीच कोरोना के नये मामले आ रहे हैं। कल 336 नये मामले आये थे। आज भी शाम 6 बजे तक 291 नये मामले आ चुके हैं। अब तक अहमदाबाद में 4358 कोरोना पॉज़िटिव केस दर्ज हो चुके हैं। जबकि राज्य में 5804 पॉज़िटिव केस हैं।

2011 की जन गणना के अनुसार अहमदाबाद शहर की जन संख्या 5633927 है। वहीं दिल्ली की जनसंख्या 1 करोड़ 90 लाख है। अहमदाबाद में कोरोना से 269 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जो दिल्ली की तुलना में बहुत अधिक है। एक्टिव केस और पॉज़िटिव केस की जनसंख्या की तुलना में अहमदाबाद बहुत आगे है। क्योंकि अहमदाबाद की तुलना में दिल्ली की जनसंख्या तीन गुना है। 

कल अहमदाबाद नगर निगम के म्युनिस्पल कमिश्नर विजय नेहरा को सरकार ने छुट्टी देकर घर पर क्वारंटाइन रहने को कह दिया। आज से उनकी जगह मुकेश कुमार ने संभाल ली है। कुमार पहले भी नगर निगम के कमिश्नर रह चुके हैं। विजय नेहरा ने 23 अप्रैल को ही कह दिया था। जिस तरह से कोरोना का डब्लिंग रेट (CDR) है उससे 15 मई तक अहमदाबाद की हालत यूरोप, अमेरिका जैसी हो जाएगी। यही बात राज्य सरकार को अच्छी नहीं लगी थी। नेहरा के बारे में कहा जाता है कि वह अपने काम में राजनैतिक दखलंदाजी नहीं चाहते थे। निर्णय स्वयं ही लिया करते थे। जो बात सत्ता पक्ष को ठीक नहीं लग रही थी। नेहरा के अलावा राज्य स्वास्थ्य विभाग की सचिव जयंती रवि को भी साइड लाइन कर दिया गया है।

उनकी जगह कैलाश नाथन ने चार्ज संभाल लिया है। अहमदाबाद में सुपर स्प्रेडर की भी संख्या तेजी से बढ़ रही है। आज बजरंग सुपर मार्केट के 6 कर्मचारी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए जिसके बाद सुपर मार्केट सील कर 28 कर्मचारी को क्वारंटाइन कर दिया गया है। इससे पहले अहमदाबाद के खोखरा सब्ज़ी मंडी के 21 सब्ज़ी विक्रेता पॉज़िटिव पाए गए थे। जिसके बाद नगर निगम ने मंडी से 80 सैंपल लिए थे। 80 में से 31 सब्ज़ी विक्रेता पॉज़िटिव थे। इसी प्रकार से किराना स्टोर, फ्रूट विक्रेता, सुपर मार्केट कर्मचारी पॉज़िटिव आ चुके हैं। इनके अलावा अहमदाबाद में प्रवासी मजदूरों का “आत्मसमान किचन” चलाने वाले 4 वॉलिंटियर भी पॉज़िटिव निकले। 

मुकेश कुमार ने पद भार ग्रहण करते ही सभी ज़ोन के डिप्टी कमिश्नरों के साथ मीटिंग की और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन निर्णयों में प्रमुख रूप से, 

-9 निजी अस्पतालों को निगम अपने हाथ में लेकर 1000 बेड की कोरोना अस्पताल बनाया जायेगा।

-हर ज़ोन में ऐसे 3 स्टार होटलों को कोरोना मरीजों के लिए कब्ज़े में लिया जायेगा जिसमें कम से कम 50 एसी रूम हों ताकि हर ज़ोन में 500 बेड का अस्पताल तैयार हो सके।

-48 घंटे में सभी क्लिनिक, नर्सिंग, अस्पताल खोलने पड़ेंगे। यदि कोई डॉक्टर नहीं खोलता है तो उसका लाइसेंस रद्द किया जायेगा। 

-Covid care centre पर निजी डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जायेगी। 

-सुपर स्प्रेडर को रोकने के लिए एक सप्ताह के लिए दवा स्टोर और दूध की दुकान छोड़कर सब कुछ बंद रहेगा। 

-सभी रेड ज़ोन में ATM छोड़ सभी बैंक भी बंद रहेंगे। 

ये सभी निर्णय एपिडेमिक डिसीज़ एक्ट 1897 की धारा 2, 3 और 4 के तहत लिए गए हैं। खराब परिस्थिति और भय के कारण बहुत सारे निजी क्लीनिक और अस्पताल भी बंद चल रहे थे। जिस कारण कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी शहर में मृत्यु हो रही थी। आम जनता को सामान्य बीमारियों के इलाज में भी असुविधा हो रही थी। निजी डॉक्टरों को 48 घंटे का समय दिया गया है। समाज शास्त्र के एक प्रोफेसर वर्तमान परिस्थिति पर कहते हैं, ” शहर में 60-65 प्रतिशत आबादी सिंगल रूम में रहती है। जो गरीब हैं। चिंता का विषय यही है। जो अमीरों की बीमारी गरीबों के मोहल्ले में पहुँच गई। इस आपदा के बाद स्वास्थ्य पर सरकार को उसी प्रकार से चिंतन करना होगा जैसे अठारहवीं सदी में आई महामारी के बाद यूरोप ने चिंतन किया था।”

सरकार को लगता है कि लॉक डाउन का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। जिसके चलते कोरोना केस लगातार बढ़ रहे हैं। लॉक डाउन में जनता घरों में बनी रहे इसलिए केंद्र सरकार ने राज्य में 38 पैरामिलिट्री की टुकड़ी भेजी है। राज्य के पुलिस अधीक्षक शिवानंद झा ने बताया, ” पैरा मिलिट्री के जवानों को अहमदाबाद, सूरत और बड़ौदा में लगाया जायेगा। अहमदाबाद के कोट विस्तार की किले बंदी की जायेगी।” अहमदाबाद के रेड ज़ोन के सभी मोहल्ले, गली सील बंद कर दिए गए हैं। 

एक अहम मीटिंग अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भी हुई जिसमें विजय रूपानी के बजाय नितिन पटेल उपस्थित रहे। स्वास्थ विभाग की सचिव की जगह सभी बड़े फैसले कैशनाथन ले रहे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व यह मान कर चल रहा है। कोरोना से लड़ने में विजय रूपानी का नेतृत्व फेल रहा है। मजदूरों के मुद्दे पर विपक्षी दल कांग्रेस ने राजनैतिक बढ़त हासिल की है। 

इसके अलावा विपक्ष “नमस्ते ट्रंप” के बहाने सरकार को घेरने में भी कामयाब रहा है। BJP के केंद्रीय नेतृत्व ने राजनैतिक नुकसान को देखते हुए अफसरों की अदला बदली की। बताया जा रहा है कि मामला आगे बढ़ा तो वह राजनैतिक नेतृत्व पर भी विचार कर सकता है।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीक़ी की रिपोर्ट।)

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