Tuesday, December 7, 2021

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किसानों की मांग पूरी नहीं हुई तो सत्ता में नहीं लौटेगी भाजपा सरकार : सत्यपाल मलिक

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मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र की मोदी सरकार से 10 महीने से आंदोलनरत किसानों की मांगों को पूरा करने का आग्रह करते हुये कहा है कि – “अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं की गईं, तो यह सरकार सत्ता में नहीं लौटेगी।”
राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक कार्यक्रम में शामिल होने आये राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने स्थानीय पत्रकारों से बात करते हुए अपने गृह जिले का उल्लेख कर कहा कि-” भाजपा नेता अब चुनाव वाले उत्तर प्रदेश के कई गांवों में प्रवेश भी नहीं कर सकते हैं। मैं मेरठ से हूँ। मेरे क्षेत्र में कोई भी भाजपा नेता किसी गांव में प्रवेश नहीं कर सकता है। मेरठ में, मुजफ्फरनगर में, बागपत में, वे प्रवेश नहीं कर सकते।” 
पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या वह किसानों के साथ खड़े होने के लिए अपना पद छोड़ देंगे, राज्यपाल मलिक ने कहा कि वह किसानों के साथ खड़े हैं और वर्तमान में अपने पद को छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर वह ऐसा भी करेंगे।

बिना एमएसपी के कुछ नहीं होगा

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में आगे कहा कि – “केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी के लिए क़ानून बनाना चाहिए। इसके बाद ही किसानों का मुद्दा हल होगा।  यदि केंद्र सरकार एक क़ानून के माध्यम से एमएसपी गारंटी देती है तो तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन को हल किया जा सकता है। जब किसानों की एक ही मांग है तो केंद्र इसे क्यों नहीं पूरा कर रहा है? किसान एमएसपी से कम पर समझौता नहीं करेंगे।  एक बात है, जो इसका समाधान करेगी। आप एमएसपी की गारंटी दें, मैं किसानों को समझाऊंगा कि तीन कानून ठंडे बस्ते में हैं, अब इसे छोड़ दें। उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी होनी चाहिए। अगर यह नहीं है तो वे बर्बाद हो जाएंगे। इससे कम पर वे कोई समझौता नहीं करेंगे।”
उन्होंने आगे मध्यस्थता का प्रस्ताव देते हुये कहा कि -” अगर सरकार उनसे पूछे तो वह केंद्र और किसानों के बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि वह किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार से लड़ाई लड़ चुके हैं और अगर ज़रूरत पड़ी तो वह किसानों के लिए राज्यपाल का पद तक छोड़ देंगे। 

उसी दिन होना चाहिये था अजय मिश्रा का इस्तीफ़ा 

लखीमपुर खीरी तिकुनिया जनसंहार कांड के बारे में पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा को लखीमपुर खीरी की घटना के बाद इस्तीफा देना चाहिए था के जवाब में राज्यपाल मलिक ने कहा कि-” विडंबना है कि अब तक केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा का इस्तीफा नहीं लिया गया। इस प्रकरण की सही जांच होनी चाहिए।” 
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आगे कहा कि, “यह निश्चित रूप से ग़लत है। यह (इस्तीफा) उसी दिन हो जाना चाहिए था। वैसे भी वह मंत्री बनने के काबिल नहीं हैं।”

पहले भी किसानों के हक़ में उठायी है आवाज़ 

इससे पहले 29 अगस्त 2021 को मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज पर मुख्यमंत्री खट्टर की आलोचना करते हुये उनसे किसानो से माफी मांगने और एसडीएम को बर्खास्त करने की मांग उन्होंने की थी।आयुष सिन्हा को लेकर उन्होंने कहा था कि वो एसडीएम के पद के काबिल नहीं हैं। उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्तर पर हुए किसान आंदोलन में अब तक 600 किसानों की मौत हो चुकी है लेकिन सरकार की तरफ से अब तक एक भी सांत्वना के शब्द नहीं आएं हैं।

मोदी-शाह गलत राह पर

इससे पहले 24 अप्रैल 2021 को  सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार से चल रहे संकट को हल करने का आग्रह करते हुये किसानों के समर्थन में कहा था कि उनका अपमान नहीं किया जा सकता है। 
हरियाणा के निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान को लिखे लेटर के जवाब में सत्यपाल मलिक ने कहा था कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बताने की कोशिश की है कि वे गलत राह पर हैं और किसानों पर दबाव डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। 
उन्होंने आगे कहा कि मैं थोड़े दिनों पहले एक वरिष्ठ पत्रकार से मिला जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क़रीबी दोस्त हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं तो कोशिश कर चुका हूं लेकिन अब तुम प्रधानमंत्री मोदी को समझाओ कि किसानों का अपमान ना करें। साथ ही उन्होंने कहा था कि अब किसान दिल्ली से वापस नहीं जाएंगे और इसको 300 साल तक नहीं भूलेंगे।
बता दें कि किसान आंदोलन पर बीजेपी-जेजेपी की हरियाणा सरकार से अपना समर्थन वापस ले चुके सांगवान ने इस मुद्दे पर सत्यपाल मलिक को सबसे पहले पत्र लिखा था। उनके पत्र का जवाब देते हुए मलिक ने कहा था कि उन्होंने पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री से कहा है कि दिल्ली से किसानों को खाली हाथ नहीं भेजा जाना चाहिए। राज्यपाल मलिक ने पत्र में कहा, ”किसान आंदोलन के मुद्दे पर मैंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृह मंत्री से मुलाकात की और सुझाव दिया कि किसानों के साथ न्याय करते हुए उनकी जेनुइन मांगों को मान लेना चाहिए। मैंने बैठक में यह भी साफ कर दिया कि किसानों की आवाज दबेगी नहीं। केंद्र को उनकी मांगों को मानना चाहिए। यह भविष्य में भी जारी रहेगा। मुझसे जो भी संभव हो सकेगा, वह करूंगा।”
सत्यपाल मलिक ने आगे कहा था कि अगर ये आंदोलन ज्यादा चलता रहा तो नुक़सान बहुत होगा। साथ ही उन्होंने कहा था कि मैं सिखों को जानता हूं। जब इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार किया था तो एक महीने तक उन्होंने अपने फार्म हाउस पर महामृत्युंजय जाप करवाया था। ये जानकारी मुझे अरुण नेहरू ने दी थी। जब अरुण नेहरू ने उनसे जाप करवाने का कारण पूछा तो इंदिरा गांधी ने कहा कि मैंने सिखों का अकाल तख़्त तोड़ा है ये मुझे छोड़ेंगे नहीं। इंदिरा गांधी को इस बात का इल्म पहले ही था। इन लोगों ने तो जनरल वैद्य को पूना में जाकर मारा था।

17 मार्च 2021 को झुंझुनूं में एक निजी कार्यक्रम में राज्यपाल मलिक ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि किसान आंदोलन का इतना लंबा चलना किसी के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि कुतिया भी मर जाती है तो उसके लिए हमारे नेताओं का शोक संदेश आता है, लेकिन 250 किसान मर गए, कोई बोला तक नहीं। मेरी आत्मा को दर्द देता है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जो हल ना हो सके। बहुत दूरी नहीं है, मामला निपट सकता है
सत्यपाल मलिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एमएसपी ही मुद्दा है। यदि एमएसपी को लीगलाइज कर देंगे, तो आसानी से यह मुद्दा हल हो जाएगा। उन्होंने कि देशभर के किसानों के बीच यह मुद्दा बन चुका है। ऐसे में इसे जल्द हल करना चाहिए। एक सवाल पर मलिक ने कहा कि मैं संवैधानिक पद पर हूं। बिचौलिया बन कर काम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा मैं सिर्फ सलाह दे सकता हूं, किसान नेताओं को और सरकार के नुमाइंदों को , मेरा सिर्फ़ इतना सा ही रोल है।

किसानों को कह दूंगा कि खड़ी फसल में आग लगा दें लेकिन आपको कम कीमत पर गेहूं ना दें

किसान आंदोलन पर बात करते हुए मलिक ने 17 मार्च को झुंझुनूं में कहा था कि किसानों के उचित मूल्य ना मिलने का मुद्दा आज का नहीं है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान मंत्री रहे छोटूराम और वायसराय का किस्सा भी शेयर करते हुए कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वायसराय मंत्री छोटूराम से मिले और उनसे अनाज की मांग की, तब छोटूराम ने कहा कि दाम मैं तय करूंगा कि आपको अनाज कितने में देना है। तब वायसराय ने छोटूराम से कहा कि मैं सेना को भेजकर अनाज ले लूंगा, तो छोटूराम ने जवाब दिया कि मैं किसानों को कह दूंगा कि खड़ी फसल में आग लगा दें लेकिन आपको कम कीमत पर गेहूं ना दें।

जिस देश का किसान और जवान जस्टिफाइड नहीं होता है, उस देश को कोई बचा नहीं सकता 

इससे पहले 14 मॉर्च 2021 रविवार को मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने गृह जनपद बागपत के कस्बा अमीनगर सराय में वे अभिनन्दन समारोह में मंच से बोलते हुए देश में किसानों की हालत को खराब बताया था और कहा था कि सरकार को किसानों के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि देश का किसान बेहाल है। उन्होंने कहा था कि एमएसपी को कानून के दायरे में करा दिया जाए तो वह किसान आंदोलन को खत्म करा देंगे। उन्होंने कहा कि यकीन दिलाता हूं किसानों के मामले पर जितनी दूर तक भी जाना पड़ेगा, उतनी दूर तक जाऊंगा। क्योंकि मुझे किसान की तकलीफ मालूम है। देश में किसान बहुत बुरे हाल में हैं।
उन्होंने कहा कि “जब कोई जानवर मरता है तो भी संवेदना प्रकट की जाती है, लेकिन यहां तो 250 किसान मरे हैं, जिनके लिए अब तक किसी ने कोई संवेदना व्यक्त नहीं की।” उन्होंने आगे कहा था कि “अगर किसान आंदोलन ऐसे ही चलता रहा तो पश्चिमी यूपी, हरियाणा और राजस्थान में बीजेपी को बड़ा नुकसान होगा।”
उन्होंने आगे कहा था कि दिल्ली से किसानों को दबाव और अपमानित करके और खाली हाथ मत भेजना। क्योंकि मैं जानता हूं सरदारों को, 300 बरस तक ये कुछ नहीं भूलते हैं। जिस देश का किसान और जवान जस्टिफाइड नहीं होता है, उस देश को कोई बचा नहीं सकता है। 
उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री के एक बहुत बड़े पत्रकार मित्र से मिलकर आया हूं। उनसे जिक्र किया कि मैंने कोशिश कर ली, अब आप भी कोशिश कर लो। किसान दिल्ली से वापस जाएंगे नहीं, और चले गए तो 300 साल तक भूलेंगे नहीं। इन किसानों को ज्यादा कुछ नहीं, तो एमएसपी को कानूनी तौर पर मान्यता दे दो। मेरी जिम्मेदारी है, मैं इस मामले को यहां खत्म करा दूंगा। इंदिरा गांधी के ब्लू स्टार ऑपरेशन और उनकी हत्या का ज़िक्र करते हुये उन्होेंने कहा था कि – “जब इंदिरा गांधी ने भी ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया, तो उसके बाद एक माह तक महामृत्युंजय का यज्ञ कराया। अरुण नेहरू (इंदिरा गांधी के भतीजे) ने इंदिरा गांधी से पूछा था कि फूफी आप तो ये बात नहीं मानती थीं, तो इंदिरा गांधी ने ये कहा कि तुम्हें ये पता नहीं, मैंने इनका अकाल तख्त तोड़ा है, ये मुझे छोड़ेंगे नहीं। इसलिए ये यज्ञ करा रही हूं। ”
इससे पहले 17 मॉर्च 2021 को किसान आंदोलन पर सत्यपाल मलिक ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार को ऐसा लगता है कि मैं उनका नुकसान कर रहा हूं, तो मैं गर्वनर पद तुरंत छोड़ दूंगा। राज्यपाल के पद से हटने के बाद मैं अपनी बात खुलकर रखूंगा। सत्यपाल मलिक ने कहा था कि सरकार को किसानों से तुरंत बात करना चाहिए, इससे सरकार को भी फायदा होगा और पार्टी को भी लाभ होगा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि किसान आदोलन जितना भी लम्बा चलेगा, देश का उतना ही नुकसान होगा। साथ ही कड़े शब्दों में नेताओं को घेरते को उन्होंने कहा कि यहां एक कुतिया मर जाती है तो नेताओं का शोकसंदेश आ जाता है। लेकिन आंदोलन करते-करते हमारे 250 से ज्यादा किसान मर गए, लेकिन किसी के मुंह से एक शब्द तक नहीं फूटा। यह सरासर ह्रदयहीनता है। 

15 मॉर्च 2021 को नागौर जिले के डीडवाना में अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुये राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि पहले मैं किसान हूं उसके बाद राज्यपाल। उन्होंने  किसानों की एमएसपी से जुड़ी मांग की पैरवी करते हुए कहा था कि अगर इसको मान लिया जाता है तो आधा मसला अपने आप सुलझ जाएगा। उन्होंने कहा था कि किसी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं कि सरकार किसानों के रुख के नजदीक आए और किसान सरकार के रुख के नजदीक़ आए। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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