Thursday, December 9, 2021

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इलाज का गुजरात मॉडल! गलत इलाज देकर लूटा, विरोध करने पर यौनशोषण किया

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इलाज का गुजरात मॉडल देख सुनकर आप होठों तले अंगुली दबा लेंगे। गलत इलाज देकर पहले लूटा, विरोध करने पर यौन शोषण किया, फिर बाउंसर बुलाकर बाहर फेंक दिया, पुलिस में नहीं होने दी सुनवाई, कोर्ट में खड़ा कर दिया सीबीआई लॉयर।

34-उमा पार्क घोड़सर अहमदाबाद की माधवी ठक्कर उम्र 62 वर्ष को घुटने में तकलीफ़ थी। बावजूद इसके वो कई किलोमीटर चल लेती थीं। उनकी बेटी बंसरीबेन प्रकाश चंद्र ठक्कर उन्हें लेकर शैलबी हॉस्पिटल डॉ विक्रम शाह एसजी हाईवे गई। वहां उन्हें बताया गया कि दोनों पैरों का घुटना प्रत्यारोपण (knee replacement) करवाना पड़ेगा। बंसरीबेन बताती हैं कि दर्द होता था बावजूद इसके वो 20 किलोमीटर तक पैदल चलती थीं।

बंसरीबेन बताती हैं कि उन्होंने डॉ विक्रम शाह से कहा कि हम दोनों पैरों का घुटना प्रत्यारोपण एक साथ नहीं करवा पायेंगे। जो अभी ज़्यादा ज़रूरी हो उसका करवा लीजिये दूसरा 4-5 साल बाद करवाएंगे। डॉ विक्रम शाह ने बंसरीबेन को बताया कि दायें पैर में ज़्यादा समस्या लग रही है इसका पहले करवा लीजिये। बायां 5-7 साल बाद करवा लीजियेगा।

बंसरीबेन बताती हैं कि हमने खर्चा पूछा तो उन्होंने बताया कि एक पैर का 3 लाख रूपये लगेगा। हमने उनसे 8-10 दिन का समय लिया। क्योंकि मिडिल क्लास परिवार से हैं तो पैसों की व्यवस्था में कुछ वक़्त तो लगता है।

बंसरीबेन बताती हैं कि पैसों की व्यवस्था करके वो अपनी मां को लेकर अस्पताल गईं। वहां 12 अप्रैल 2021 को उनके दायें पैर के घुटने का ऑपरेशन हो गया लेकिन टांके प्रॉपर तरीके से नहीं लगे थे जिसके चलते उसी समय से उसमें खून और मवाद आ रहा था। बंसरीबेन ने डॉ विक्रम शाह से सवाल किया कि वह इससे संतुष्ट नहीं हो पा रही हैं ये नहीं आना चाहिये। तब डॉ विक्रम शाह ने उनसे कहा कि ये पोस्ट ऑपरेटिव नॉर्मल होता है।

बंसरीबेन बताती हैं कि वो चिकित्सा के क्षेत्र में 13 साल से हैं और वो डॉ के उस कारण से संतुष्ट नहीं हो पाईं। वह कहती हैं –“उस वक्त मेरी मां बहुत ज़्यादा तकलीफ़ में थी, न उनके पेट में कुछ जा रहा था, न ही वो उठ बैठ पा रही थी। दो दिन के अंदर हमें 8 बार बेडशीट बदलनी पड़ी। 3-4 घंटे के अंदर सॉल्व हो जायेगा ये कहकर 15 अप्रैल को असपताल से डिस्चार्ज कर दिया।

बंसरीबेन आगे बताती हैं कि 16 अप्रैल को भी यही स्थिति बनी रही। हमने डॉ को कॉल किया और बताया कि ब्लड और पस बहुत ज़्यादा आ रहा था। उन्हें बहुत तकलीफ थी और वो उठ नहीं पा रही थी। डॉ ने फिर से वहीं बात दोहराई कि पोस्ट ऑपरेटिव नॉर्मल है। हमने गुजारिश की कि आप किसी को भेजकर मरीज को चेक करवा लीजिये। अस्पताल से महेश ब्रदर नाम का एक लड़का आया। उसने बताया कि मैडम यह सर्जरी कभी सक्सेजफुल नहीं होगी क्योंकि टांके प्रॉपर तरीके से नहीं लगे हैं। 17 को भी स्थिति वैसी की वैसी ही रही हमने डॉ को कॉल करके गुजारिश किया कि स्थिति सुधर नहीं रही, मरीज बहुत तकलीफ में है, हम अस्पताल आ रहे हैं आप चेक कर लीजिये। उन्होंने अगले दिन के लिये बुलाया। 18 अप्रैल को अपनी मां को लेकर बंसरीबेन अस्पताल पहुंची।

जहां उन्हें फिर से भर्ती कर लिया गया। और 18 अप्रैल से 18 मई तक वो अस्पताल में रहीं। इस दौरान उनकी 10-12 सर्जरियां की गईं। कभी किसी की तो कभी किसी की। लेकिन तबीयत में सुधार नहीं आया। इस दौरान पहले उनसे 2.5 लाख रुपये लिये गये। फिर 11 लाख रुपये और मांगा गया। फिर 39 लाख रुपये की डिमांड की गई।

बंसरीबेन जनचौक को बताती हैं कि उन्होंने डॉ विक्रम शाह से कहा कि हमारे मरीज के स्वास्थ्य में कोई सुधार तो हो नहीं रहा आप सिर्फ़ बिल बढ़ाते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपके माताजी का इन्फेक्शन ट्रीटमेंट किया।

जब उनके सारे टेस्ट करवाये सब रिपोर्ट निगेटिव आया। तब डॉ विक्रम शाह ने बंसरीबेन को बताया कि आपकी माताजी को पायोडर्मा गैंगोरिज्म (Pyoderma gangrenosum) नामक दुर्लभ बीमारी है।

बंसरीबेन जनचौक को बताती हैं कि उन्होंने मुंबई में कई सालों तक हेल्थकेयर सेक्टर में काम किया है। तो वो कन्वेंस नहीं हो पायीं । उन्हें लगा डॉक्टर विक्रम शाह उन्हें बेवकूफ बना रहा है।

बंसरीबेन आगे बताती हैं कि फिर उन्होंने डॉक्टर विक्रम शाह से बायोप्सी करवाने की गुजारिश किया। बॉयोप्सी कराने के बाद बोला कि पायोडर्मा गैंगोरिज्म है और स्टीरॉयड स्टार्ट करना पड़ेगा। और स्टीरॉयड शुरु कर दिया।

बंसरीबेन बताती हैं कि मैंने वही बॉयोप्सी अनीता बोर्जेस, असल रहेजा अस्पताल मुंबई भेजा। सेंटर फॉर ऑन्को पैथोलॉजी और सेंटर फॉर ऑल इंडिया मेडिकल के चेयरपर्सन के पास भेजा। वहां मुझे पता चला की स्लाइड ही इंटरचेंज हो चुकी है। जब किसी का स्लाइड ही इंटरचेंज हो जाता है तब उसका रिजल्ट कैसे सही हो सकता है। इस चीज में उसने स्टीरॉयड दिया। स्टीरॉयड देने के बाद में जो इन्फेक्शन होता है वो नॉर्मल इन्फेक्शन था और मुझे डॉ विक्रम शाह ने पायोडर्मा बताया। तो वह और बदतर हो जाता है और वो हुआ।

बंसरीबेन बताती हैं कि मुझे धोखाधड़ी का अहसास हुआ, मैंने आवाज़ उठायी तो मेरी मां का इलाज बंद कर दिया गया, अस्पताल में मुझे मोलेस्टेट किया गया। बाउंसर बुलाकर हमें मारा पीटा गया।

बंसरी बेन का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी माता जी अस्पताल में अंडरसेप्सस थे। जिसको फिट फॉर डिस्चार्ज नहीं बोलते। बावजूद इसके उन लोगों ने फिट फॉर डिस्चार्ज लिखकर मेरी मां को डिस्चार्ज कर दिया। किसी भी मरीज का इलाज स्टेराइल एटमॉस्फियर (जीवाणुहीन वातावरण) में होना चाहिये। लेकिन उन लोगों ने हद दर्जे की लापरवाही बरती। जिससे मेरी मां को इनफेक्शन हो गया। और अपनी गलती को छुपाने के लिये उन्होंने इसे पायोडर्मा का नाम दे दिया। वो अपनी मां को कई अस्पतालों में लेकर गईं। लेकिन स्टीरॉयड के दुष्प्रभाव के चलते 23 जुलाई को उनकी मां गुज़र गईं। 

बंसरी बेन बताती हैं कि अहमदाबाद पुलिस ने उनका एफआईआर नहीं दर्ज़ किया। क्योंकि अहमदाबाद में विक्रम शाह का पॉवर चलता है। वो मोदी-शाह की राजनीति से जुड़ा हुआ है। यह गुंडागर्दी है। वो बताती हैं कि उनकी मां का मामला और शेल्बी अस्पताल में उनके साथ हुये मॉलेस्टेशन का मामला मीडिया में कवर होने के बाद मीडिया की एक लड़की के साथ भी मॉलेस्टेशन हुआ।

बंसरीबेन बताती हैं कि उन्होंने अपनी मां के इलाज के लिये कुल 35 लाख रुपये खर्च किए। लेकिन वो अपनी मां को प्रॉपर इलाज तक नहीं दिलवा पायीं। अतः उन्होंने अपनी मां को न्याय दिलाने के लिये अहमदाबाद में 13 दिन भूख हड़ताल किया। इस दौरान दो बार पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया। पुलिस ने मॉलेस्टेशन का केस नहीं दर्ज किया। बल्कि बुलाकर धमकाया कि केस वापस ले लो नहीं तो तुम्हारे ऊपर कार्रवाई होगी। क्योंकि उसके पीछे के कॉरिडोर का शीशा टूटा है।

(लेखक जनचौक में विशेष संवाददाता हैं।)

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