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Thursday, August 5, 2021

आजमगढ़: क्या यूपी में दलित महिलाएं मजे के लिये होती हैं? योगी को बुलाने पर अड़ीं पीड़ित महिलायें

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रामराज्य वाले उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के पलिया गांव की एक दलित महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वॉयरल हुआ है। वीडियो में दलित महिला ने योगी के हिंदुत्ववादी यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाये हैं। वीडियो में महिला ने बताया है कि, पुलिसकर्मी ने उससे कहा रात में मजा नहीं दिया, इसलिए दिन में मजा लेने आया हूं, और पुलिसकर्मियों ने घर में घुसकर मेरे साथ मारपीट की और मेरे कपड़े फाड़ दिए, साथ ही उसने कहा कि छोटी जाति की औरतें सिर्फ़ मजा लेने के लिए होती हैं। 

क्या है पूरा मामला

29 जून को, आजमगढ़ जिले के पलिया गांव में छेड़छाड़ की एक घटना की जांच करने दो पुलिस वाले आये। आरोप है कि उन्होंने ग्राम प्रधान मुन्ना पासवान को थप्पड़ मार दिया। जवाब में प्रधान पक्ष से कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों से मारपीट की। ग्रामीणों का आरोप है कि जवाबी कार्रवाई में रात में दबिश देने आई पुलिस ने JCB से मुन्ना पासवान और पासी समाज के कुछ मकानों को तहस नहस कर दिया और उनके जेवर और कीमती सामान लूट ले गये। ग्रामीणों ने पुलिस पर महिलाओं के साथ अभद्रता करने का भी आरोप लगाया है। 

गांव में तनाव के बाद से पासवान समाज के पुरुष घर से भागे हुए हैं। वहीं, महिलाएं अपने साथ हुई बदसलूकी के ख़िलाफ़ धरने पर बैठ गई हैं। आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी यहां आयें। दलित महिला विरोधी आरोपी पुलिसवालों पर कार्रवाई हो। 

मंगारी बाजार में 29 जून को दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। आरोप है कि जानकारी मिलने पर पहुंचे कुछ पुलिसकर्मियों की गांव वालों ने पिटाई कर दी थी। इसके बाद पुलिस की टीम ने गांव में पहुंचकर ग्राम प्रधान मुन्ना पासवान समेत तकरीबन 10 से 12 घरों के दरवाजे-खिड़की उखाड़ते हुए तोड़फोड़ की थी। महिलाओं के साथ भी बदसलूकी का आरोप है।

महिला बताती हैं कि गांव के एक विवाद में पुलिस ने जबरन वहां के प्रधान को थाना ले जाने की कोशिश की और उनसे मारपीट की। जिससे प्रधान के नाक से खून आ गया। इसके बाद प्रधान और उनके समर्थकों में हल्की झड़प हुई। कुछ देर बाद पुलिस ने आकर प्रधान और उनके आसपास के घरों में तोड़फोड़ की। 

गांव की महिला बताती हैं कि पुलिस ने घर में तोड़फोड़ के दौरान उनसे गाली गलौच और बदतमीजी की। उन्होंने बताया कि एक पुलिस अफसर ने उन पर जातिवादी टिप्पणी की और डंडे से उन्हें पीटा भी। जब घर की बुजुर्ग महिला उनके बचाव में आईं तो पुलिस ने उन्हें भी मारा। वो आगे बताती हैं कि रात की तोड़फोड़ के बाद पुलिस का एक जत्था सुबह फिर आया। उस जत्थे में से एक पुलिस अफ़सर ने कहा “कल रात मजा नहीं आया इसलिए आज और मजा लेने आए हैं। ”

पुलिस का पक्ष

आजमगढ़ पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अपने बचाव के लिए खुद ही घर पर जेसीबी चलवा ली है। आजमगढ़ पुलिस के ट्विटर हैंडल पर वहां के एसपी सुधीर कुमार सिंह ने वीडियो वक्तव्य में कहा है कि- प्रधान मुन्ना पासवान अपने साथियों के साथ बाजार में लड़कियों के साथ छेड़खानी कर रहा था। लिट्टन विश्वास नाम का युवक उसकी वीडियो बना रहा था। इस पर पासवान ने अपने साथियों के साथ मिलकर लिट्टन से मारपीट की। उसको गंभीर चोटें आईं। इस संबंध में मुन्ना पासवान और उसके 11 साथियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज़ हुआ है। सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि मौके पर मुखराज यादव और विवेक त्रिपाठी नाम के दो हेड कॉन्स्टेबल गये थे।  इन कॉन्स्टेबल्स के साथ भी मारपीट की गई।  विवेक त्रिपाठी को गहरी चोटें आईं हैं और उनके सिर का ऑपरेशन भी करना पड़ा है। घटना के बाद से आरोपी फरार हैं। वहीं, उन्हें गिरफ्तारी से बचाने के लिए महिलाओं द्वारा प्रदर्शन कराया जा रहा है और पुलिस पर आरोप लगाए जा रहे हैं। 

पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में तीन FIR दर्ज़ की हैं। पहली लिट्टन विश्वास पर हमले की। दूसरी पुलिस पर हमले की और तीसरी कथित रूप से मुन्ना पासवान के घर अज्ञात लोगों द्वारा तोड़फोड़ की। पुलिस ने बताया कि जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। 

पुलिस का कहना है कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए इन लोगों ने खुद ही अपने घरों में तोड़फोड़ की, ताकि पुलिस पर दबाव बनाया जा सके और मारपीट वाले मुक़दमे में कोई कार्रवाई न हो। आजमगढ़ पुलिस ने ट्वीट कर दावा किया है कि प्रधान और उनके साथियों ने दो पुलिसकर्मियों को बुरी तरह पीटा और वर्दी भी फाड़ दी। उसी मारपीट के केस से बचने के लिए पुलिस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और दबाव बनाया जा रहा है। 

आजमगढ़ जिले के पलिया गांव में दलित के मकान को जेसीबी से गिरा देने के मामले की अब मजिस्ट्रेट जांच होगी। डीआईजी सुभाष दुबे ने मीडिया को बताया है कि जब तक जांच का नतीजा सामने नहीं आता तब तक किसी भी तरह की कार्रवाई गांव वालों पर नहीं की जाएगी। वहीं एसचओ रौनापार को लाइन हाजिर कर दिया गया है। 

राजनीतिक प्रतिक्रियायें

पलिया गांव की घटना पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भीम आर्मी सेना ने योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। 

बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष व राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पलिया गांव की घटना पर ट्वीट करते हुये लिखा है कि – “आजमगढ़ पुलिस द्वारा पलिया गाँव के पीड़ित दलितों को न्याय देने के बजाय उन पर ही अत्याचारियों के दबाव में आकर खुद भी जुल्म-ज्यादती करना व उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाना अति-शर्मनाक। सरकार इस घटना का शीघ्र संज्ञान लेकर दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई व पीड़ितों की आर्थिक भरपाई करे। साथ ही, अत्याचारियों व पुलिस द्वारा भी दलितों के उत्पीड़न की इस ताजा घटना की गंभीरता को देखते हुए बीएसपी का एक प्रतिनिधिमण्डल गया चरण दिनकर, पूर्व एमएलए के नेतृत्व में पीड़ितों से मिलने शीघ्र ही गाँव का दौरा करेगा।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने घटना को सरकारी अमले की दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक बताया है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है कि, “आजमगढ़, रौनापार के पलिया गांव में यूपी पुलिस द्वारा दलित परिवारों पर हमला करने की खबर आ रही है। वहां कई मकानों को तोड़ा गया, सैकड़ों पर मुकदमा दर्ज किया। यह सरकारी अमले की दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक है। तत्काल दोषियों के ऊपर कार्रवाई हो और पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए।”

ASP अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद ने आजमगढ़ के पलिया में हुए जाति उत्पीड़न मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर उन पर FIR दर्ज करने की मांग की है। 

रौनापार एसएचओ पर आरोप लगाती गांव की महिला का वीडियो साझा करते हुये उन्होंने ट्विटर पर लिखा है- हम अपनी मां बहनों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि रौनापार SHO सहित थाने के सभी दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर उन पर FIR दर्ज की जाए और मुन्ना पासवान को घर तोड़ने के एवज में ₹5 करोड़ की क्षतिपूर्ति दी जाए।

साथ ही उन्होंने यूपी पुलिस और महिला आयोग पर सवाल उठाते हुये लिखा है – “छोटी जाति की औरतें मजा लेने के लिए होती हैं। जातिवादी मानसिकता से कुंठित आजमगढ़ पुलिस की भाषा सुनिए। इन पर कार्यवाही करने की बजाए पुलिस महिला को ही दोषी बता रही है। पहले मुन्ना पासवान का घर तोड़ा और अब औरतों के साथ गाली गलौच करना शर्मनाक है। क्या महिला आयोग जिंदा है?

दलित विचारक चंद्र भान प्रसाद ने एक ट्वीट में कहा कि रुतबे वाले एक दलित परिवार को टारगेट किया गया है। मुन्ना पासी ने मनु विरोधी घर बनाया, इसके पास 4 ट्रैक्टर हैं, एक वैन, एक जीप, एक राइफल, एक बोर गन, एक ईंट की फैक्ट्री, हाल ही में लिया पेट्रोल पंप। वो काफी लोकप्रिय हैं, जाति के वर्चस्ववादी इनसे डरते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुलिस थानों ने गांव में रेड मारी।

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता, शंकर यादव पीड़ितों से मिलने गांव पहुंचे और घरों का जायजा लिया। यादव ने इसके बाद कहा, “पुलिस पर हाथ उठाने की निंदा करता हूं, और पुलिस ने जो गांव के लोगों के साथ किया उसकी भी निंदा करता हूं। मैं योगी आदित्यनाथ से मांग करता हूं कि CBI जांच बैठाई जाए और जो लोग इस मारपीट में शामिल थे, उनके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई हो। “

क्या महिला आयोग जिंदा है?

राष्ट्रीय महिला आयोग और यूपी राज्य महिला आयोग पूरे मामले पर खामोश है मानो उन्हें सांप सूंघ गया हो। न ही इनके अध्यक्ष रेखा शर्मा और विमला बाथम द्वारा घटना पर कोई बयान दिया गया है न ट्वीट। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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