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Friday, August 6, 2021

पैराडाइज़ पेपर में सैकड़ों नामचीन शामिल, लेकिन दो कदम भी नहीं बढ़ पायी जांच

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले कहा था कि वह सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर विदेशों में रखे देश का 80 लाख करोड़ रूपये वापस लाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि यह धन वापस आने से प्रत्येक देशवासी के खाते में 15 लाख रुपये पहुंच जाएंगे। मोदी सरकार को सत्ता में आए 7 साल से अधिक हो चुके हैं किंतु कालेधन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।पैराडाइज़ पेपर, लीक टेंस्टाइन बैंक, एचएसबीसी बैंक और उसके बाद पनामा पेपर्स में करीब 2000 लोगों के नाम सामने आए, किंतु मोदी सरकार ने अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की। आईसीआईजे के आफशोर लीक्स में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह का भी नाम आया था किंतु उस मामले में भी अभी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इन मामलें में अभी तक एक प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा था कि पनामा दस्तावेजों की जांच कर रहा बहु-एजेंसी समूह (एमएजी) पैराडाइज दस्तावेजों की जांच की निगरानी करेगा लेकिन अभी तक प्रगति शून्य है।

पनामा पेपर्स के बाद अब पैराडाइज पेपर्स ने बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन को विदेशों में काला धन छिपाने वालो की लिस्ट में शामिल किया है। इन पेपर्स में खुलासा किया गया है कि अमिताभ बच्चन भारत के उन 714 लोगों में शामिल हां जिन्होंने टैक्स हैवेन (वो देश जहां टेक्स कम लगता है) में फर्जी कंपनियों में पैसा लगाया। इस लिस्ट में कई रसूखदारों के नाम है लेकिन सवाल उठ रहा है कि खुद को हर बार पाक साफ कहने वाले अमिताभ बच्चन का नाम ही बार बार ऐसी लिस्ट में क्यों आता है?

पैराडाइज़ पेपर्स अब तक का सबसे बड़ा फाइनेंशियल लीक है, जिसने खुलासा किया है कि कैसे बरमूडा की एप्पलबी और सिंगापुर की एशियासिटी ट्रस्ट ने दुनिया भर के अमीरों और ताकतवर लोगों को अपना पैसा विदेश भेजने में मदद की। अमेरिका स्थित इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) द्वारा जारी किए गए पैराडाइज दस्तावेज से यह खुलासा हुआ था कि मोदी सरकार के मंत्री, बीजेपी और गैर बीजेपी दलों के सांसदों, बॉलीवुड हस्तियों और कई मीडिया घरानों समेत कुल 714 भारतीयों के नाम इसमें शामिल हैं।

तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, बिहार से बीजेपी के सांसद आर के सिन्हा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद वीरप्पा मोईली के बेटे हर्ष मोइली, पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम, बॉलीवुड स्टार और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त और भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के भी नाम इस दस्तावेज में हैं। इस डेटा में कुल 180 देशों के नाम हैं। इनमें से भारत का स्थान 19वां है। यहां के कुल 714 लोगों का नाम इस डेटा लिस्ट में है।

पनामा पेपर की तर्ज पर लीक हुए पैराडाइज पेपर में इसी संगठन ने पिछले साल पनामा दस्तावेजों का खुलासा किया था जिसने दुनिया भर की राजनीति में तूफान पैदा किया था। इंडियन एक्सप्रेस आईसीआईजे का सदस्य है और उसने भारत से जुड़े हुए सभी दस्तावेजों की पड़ताल की है।

पैराडाइज़ पेपर में बिहार के इस बीजेपी सांसद का भी नामहै। दो विदेशी कंपनियों से संबंध, चुनाव आयोग के हलफनामे में नहीं किया जिक्र। पैराडाइज पेपर्स में जयंत सिन्हा का नाम है। चुनाव आयोग, लोकसभा सचिवालय और पीएमओ को नहीं बताई एक कंपनी में डायरेक्टर होने की बात। अभिनेता संजय दत्त की पत्नी मान्यता (दिलनशीं संजय दत्त) का नाम भी पैराडाइज पेपर्स में है। मान्यता संजय दत्त से शादी करने से पहले प्रकाश झा की फिल्म गंगाजल (2003) के एक ऑयटम सॉन्ग से चर्चा में आई थीं। वो संजय दत्त प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड की सदस्य हैं। अपने पति की कंपनी के अलावा भी मान्यता कई अन्य कंपनियों के बोर्ड में हैं जिनमें द (Diqssh) एनर्जी, स्पार्कमैटिक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, दिक्सश रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, ब्रिक बाई ब्रिक रियल्यटर्स प्राइवेट लिमिटेड, डूटो कमॉडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, दीक्षस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, सेवंटी एमएम मूवीज प्राइवेट लिमिटेड और ट्रांसपरेंसी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड इत्यादि शामिल हैं।

पनामा पेपर की तर्ज पर लीक हुए पैराडाइज पेपर में बिहार से बीजेपी के राज्यसभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा का भी नाम है। सिन्हा साल 2014 में बिहार से राज्यसभा सांसद चुने गए हैं। वो संसद के ऊपरी सदन में सबसे अमीर सांसदों में एक हैं। सिन्हा एक पूर्व पत्रकार हैं, जिन्होंने सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (एसआईएस) नाम से प्राइवेट सिक्योरिटी सर्विस फर्म की स्थापना की है।

फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के 2000-02 में प्रसारित पहले संस्करण के बाद बरमूडा की एक डिजिटल मीडिया कंपनी के शेयरधारक बने थे। साल 2004 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिबरलाइज्ड रिमिटेंस स्कीम शुरू करने से पहले तक सभी भारतीयों को विदेश में किए गए निवेश की जानकारी आरबीआई को देनी होती थी। ये साफ नहीं है कि अमिताभ बच्चन ने ये जानकारी आरबीआई को दी थी या नहीं।

टैक्स चोरों के स्वर्ग देशों में शुमार किए जाने वाले देश बहामा में पंजीकृत कंपनी नासजे कंपनी लिमिटेड में दिलनशीन संजय दत्त को अप्रैल 2010 में डायरेक्टर, मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रेसिडेंट और ट्रेजरर नियुक्त किया था। मान्यता ने कंपनी के कागजात पर दस्तखत किए हैं और उन्होंने अपना पता बांद्रा वेस्ट मुंबई दिया है। मान्यता ने संजय दत्त से साल 2008 में शादी की थी। साल 2010 में कंपनी की कुल पूंजी पांच हजार डॉलर (आज की दर से करीब 32 लाख रुपये) बतायी गयी थी।

एक जर्मन अखबार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग को बरमूडा की कंपनी ऐपलबी, सिंगापुर की कंपनी एसियासिटी ट्रस्ट और कर चोरों के स्वर्ग समझे जाने वाले 19 देशों में कराई गई कार्पोरेट रजिस्ट्रियों से जुड़े करीब एक करोड़ 34 लाख दस्तावेज मिले थे। जर्मन अखबार ने ये दस्तावेज इंटरनेशनल कॉन्सार्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आईसीआईजे) के साथ साझा किया।

पैराडाइज पेपर के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबियों से जुड़ी कंपनी के साथ कारोबारी संबंध हैं जबकि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने विदेशों में टैक्स से बचाव करने वाले स्थानों पर निवेश किया हुआ है। इसमें यह भी खुलासा किया गया है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडू के लिए कोष जुटाने वाले और वरिष्ठ सलाहकार स्टीफन ब्रॉन्फमैन ने पूर्व सीनेटर लियो कोल्बर के साथ मिलकर विदेशों में कर पनाहगाहों में करीब 6 करोड़ डॉलर का निवेश कर रखा है।

पैराडाइज पेपर्सके मामले में आईसीआईजे की इस पड़ताल में 45 देशों के सैकड़ों पत्रकार शामिल थे। फरवरी 2015 में इस रिपोर्ट को सार्वजानिक किया गया।इसमें एचएसबीसी प्राइवेट बैंक (स्विस), जो कि बैंकिंग जाएंट की सहायक कंपनी है, पर फ़ोकस था। लीक हुई फ़ाइलों में 2007 तक के ख़ातों की जानकारी थी, जो 200 से ज़्यादा देशों के एक लाख लोगों और क़ानूनी संस्थाओं से संबंधित थे। आईसीआईजे ने कहा कि सब्सिडियरी ने उन्हें फ़ायदा पहुंचाया, जो बदनाम हुकूमतों के करीबी थे या फिर जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने नकारात्मक माना था।

पैराडाइज पेपर्स बड़ी संख्या में लीक दस्तावेज़ हैं, जिनमें ज़्यादातर दस्तावेज़ आफ़शोर क़ानूनी फर्म ऐपलबी से संबंधित हैं। इनमें 19 तरह के टैक्स क्षेत्र के कारपोरेट पंजीयन के पेपर भी शामिल हैं। इन दस्तावेज़ों से राजनेताओं, सेलिब्रेटी, कारपोरेट जाइंट्स और कारोबारियों के वित्तीय लेनदेन का पता चलता है।

इंडियन एक्सप्रेस का दावा था कि पैराडाइज़ पेपर्स के रिकॉर्ड में नेटवर्क 18 मीडिया ग्रुप का भी नाम है। 2007 में अमेरिकी कंपनी वायाकॉम के साथ राघव बहल की कंपनी नेटवर्क 18 ने ज्वाइंट वेंचर वायाकॉम 18 शुरू किया था। इस ग्रुप ने कई सहायक कंपनियां लॉन्च कीं जो कि एप्पलबी और दूसरी कंपनियों से जुड़ीं। नेटवर्क 18 के मैनेजिंग एडिटर राघव बहल थे, जिन्होंने 2014 में इसका मालिकाना रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेच दिया था। रिकॉर्ड के मुताबिक, नेटवर्क 18 का नाम चार पुरानी आफशोर कंपनियों से जुड़ रहा है। इस खुलासे में सुभाष चंद्रा के जी मीडिया समूह का भी नाम आया था। एस्‍सेल समूह के मालिक और भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुभाष चंद्रा की कंपनी के प्रमोटर ने आफशोर रूट से फंड हासिल किए।

एप्पलबी कंपनी के रिकॉर्ड में भारत का सन बिजनेस ग्रुप दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। सन ग्रुप के नंद लाल खेमका का नाम 17 संस्थानों के लाभार्थी/अधिकारी के रूप में दर्ज है, जबकि उनके बेटे शिव विक्रम 104 संस्थानों के अधिकारी हैं। उदय हर्ष खेमका का नाम 102 ऑफशोर कंपनियों के अधिकारी के तौर पर दर्ज है। जिन अन्य भारतीयों के नाम इसमें हैं, उसमें सन टीवी-एयरसेल-मैक्सिस मामला, एस्सार-लूप 2जी मामला, एसएनसी-लवालीन से जुड़े नाम शामिल हैं।

पैराडाइज पेपर में कहा गया है कि अमिताभ बच्चन 2000 – 2002 के बीच काला धन सेट कराने वाली फर्मों की मदद से बरमूडा नामक देश में एक फर्जी मीडिया कंपनी में शेयरधारक बने थे। ये वो ही समय था जब अमिताभ ने केबीसी का पहला शो होस्ट किया था और वो आर्थिक तंगी से उबर चुके थे। अमिताभ ने जलवा नामक इस मीडिया कंपनी में पैसा लगाया औऱ उसमें उनके साथ साझीदार थे सिलिकॉन वैली के वेंचर इन्वेस्टर नवीन चड्ढा। 2000 में खुली ये कंपनी 2005 में बंद हो गई।

अमिताभ का नाम आने से स्पष्ट हो रहा है कि अमिताभ ने अपनी कमाई पर टैक्स देने से बचने के लिए अपना पैसा बरमूडा की उस जाली कंपनी में लगाया जो शायद कभी अस्तित्व में नहीं रही। ये वो दौर था जब अमिताभ अपनी आर्थिक तंगी से उबर चुके थे और उनके पास केबीसीएल की तरफ से अच्छा खासा पैसा आ गया था और वो फिर लाइमलाइट में आ गए थे।

हालांकि अमिताभ बच्चन ने हमेशा ही ऐसे आरोपों का खंडन किया है। पेपर्स खुलासे से एक दिन पहले ही ब्लॉग लिखकर अमिताभ ने कहा कि पनामा पेपर्स में भी मेरा नाम आया था और मुझसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। बदले में हमने आरोपों का खंडन करते हुए मेरा नाम इस्तेमाल करने का जवाब मांगा था जो कभी नहीं मिला।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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