Saturday, January 22, 2022

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विपक्ष भी आया स्टेन स्वामी के समर्थन में, हेमंत सोरेन ने कहा- आज स्वामी हैं कल हमारी बारी होगी

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भीमा कारेगांव मामले में एनआईए द्वारा 83 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी के खिलाफ जहां झारखंड सहित देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन जारी है, वहीं विपक्षी नेताओं ने भी आज स्टेन स्वामी के साथ एकजुटता दिखाते हुए उनकी गिरफ़्तारी पर विरोध दर्ज किया है। स्वामी की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “आज स्वामी की बारी है, कल हमारी बारी होगी। सोरेन ने कहा कि आज जब लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात कह रहे हैं तो उनको गिरफ्तार किया जा रहा है, प्रताड़ना दी जा रही है उम्र का लिहाज किये बिना। कल यदि यही आंदोलन कोई और रूप ले ले तो केंद्र की एनडीए सरकार न कुछ सुनेगी, वह सीधे गोली मार देगी।”

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की तरफ से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावा किया कि केंद्र सरकार हाशिये पर खड़े समुदाय के लोगों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में एकता, ईमानदारी और लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज केंद्र में राजग की सरकार है– यह उन लोगों की आवाज दबा रही है जो आदिवासियों, दलितों और हाशिये के लोगों के लिए आवाज उठा रहे हैं, यह गैर भाजपा शासित राज्यों को प्रताड़ित कर रही है, आज हमारे देश में विभिन्न संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।’’ 

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी के इस आयोजन में लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी, डी राजा समेत कई नेता और एक्टिविस्ट शामिल हुए। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के द्वारा UAPA का गलत उपयोग किया जा रहा है, स्टेन स्वामी और वरवर राव की गिरफ्तारी पूरी तरह से गलत है। सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि संसद में यूएपीए (UAPA) को लेकर चर्चा हुई लेकिन सरकार ने किसी सुझाव को नहीं माना। अगर कोई आतंकी गतिविधि या देशविरोधी गतिविधि में शामिल है तो उस पर एक्शन होना चाहिए, लेकिन इस तरह कानून का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। 

डी राजा ने कहा कि उन्होंने संसद में प्राइवेट बिल पेश किया था, जो राजद्रोह की धारा को हटाने के लिए था लेकिन कुछ नहीं हुआ। आज छात्रों पर भी देशद्रोह का मुकदमा थोप दिया जा रहा है। वेबिनार में एनसीपी ने सुप्रिया सुले और डीएमके की नेता कनिमोझी ने भी हिस्सा लिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी आयोजन में हिस्सा लेकर अपनी बात रखी।

बता दें कि इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेशलेट ने भारत में ‘‘मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर विदेशी अनुदान लेने के संबंध में लगाए गए प्रतिबंध’’ को लेकर मंगलवार को चिंता व्यक्त कर चुकी हैं।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेशलेट ने भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर विदेशी अनुदान लेने के संबंध में लगाये गये प्रतिबंध को लेकर मंगलवार को चिंता व्यक्त की। बेशलेट ने भारत सरकार से अपील की कि वह मानवाधिकार रक्षकों एवं एनजीओ के अधिकारों और अपने संगठनों की ओर से अहम काम करने की उनकी क्षमता की रक्षा करे। इस क्रम में उन्होंने झारखंड से स्टेन स्वामी समेत कई लोगों को इस कानून के तहत आरोपी बनाने पर चिंता जताई है।

बता दें कि भीमा कोरेगांव मामले में 83 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी की एनआईए द्वारा 8 अक्तूबर, 2020 को गिरफ्तारी पर राष्ट्रव्यापी आक्रोश उठा है। पार्किंसंस रोग और अन्य बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद वे आज भी जेल में हैं। इसी तरह 80 वर्षीय लेखक और कवि वरवर राव दो सालों से अधिक समय से जेल में हैं। गंभीर रूप से बीमार होने और कोरोना ग्रस्त होने पर उन्हें अस्पताल में कुछ समय के लिये भर्ती किया गया, पर उन्हें जमानत देने से भी इनकार किया जा रहा है। इन दोनों के अलावा, वर्तमान में इस मामले में पांच अन्य ऐसे लोग हैं जो बुजुर्ग हैं, गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त हैं, और 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा से कोसों दूर होने पर भी जेलों में कैद हैं।

(कवि और पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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