Subscribe for notification

“मैं भारत का (की) नागरिक हूँ, रिंग मास्टर की धुन पर नाचने वाला जोकर नहीं”

( कल नौ बजे नौ मिनट के दीया, मोमबत्ती या फिर मोबाइल, टार्च के जरिये प्रकाश करने के पीएम मोदी के आह्वान की एक हिस्से में बड़ी आलोचना हो रही है। उसका कहना है कि सरकार कोरोना से निपटने के लिए ज़रूरी उपाय करने के बजाय तमाम तरह के टोटकों में व्यस्त है। पहले मोदी ने ताली और थाली बजवायी और अब दीया और मोमबत्ती जलवा रहे हैं। आलोचकों का एक बड़ा हिस्सा इसे विज्ञान के ख़िलाफ़ और अंधविश्वास से जोड़कर देख रहा है। इस पूरे मसले पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ आयी हैं। यहां उनमें से कुछ प्रमुख को पेश करने की कोशिश की गयी है-संपादक )

मैं भारत का (की) नागरिक हूँ, रिंग मास्टर की धुन पर नाचने वाला जोकर नहीं!

कई देशों में लोगों को कोविड-19 से मुकाबले की तैयारियों के बारे में बताने के लिए प्रेस कांफ्रेंस होती है। प्रेस वाले प्रश्न पूछते हैं।आंकड़ों के साथ जवाब दिया जाता है।

हमसे कभी ताली बजाने तो कभी बत्ती बुझाकर दीया जलाने के लिए कहा जा रहा है।

मैं डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए पीपीई की उपलब्धता के बारे में जानना चाहता/ती हूँ ।

मैं जानना चाहता/ती हूँ कि

– कितने अस्पताल, वेंटिलेटर, आईसीयूए आदि तैयार किए गए हैं ?

– क्या कोविड-19 होने, नहीं होने की जांच सुलभ और सस्ती की जाएगी?

– दिहाड़ी मजदूरों, बेघरों, बेरोजगारों को खिलाने के लिए की गई सरकारी व्यवस्था क्या है?

– प्रवासी मजदूरों की भोजन और चिकित्सा जरूरतों को कौन और कैसे पूरा कर रहा है?

– किसान इस संकट का मुकाबला कैसे करेंगे?

– घरों में कैद महिलाएं घरेलू हिंसा से कैसे बच जाएंगी ?

– लॉक डाउन के इस अवधि में सेक्स वर्कर और मांग कर गुजर करने वाले उभय लिंगियों के लिए क्या किया जा रहा है?

मेरे पास मोदी सरकार के लिए और भी कई सवाल हैं।

सरकार इन मुद्दों पर प्रकाश डाले इस बारे में आपकी क्या राय है? ज्ञान और सूचना प्रकाश पैदा करती है और ‘रोशनी’ फैलाती है!

मैं दोहराता/ती हूँ कि मैं भारत का/की नागरिक हूँ, रिंग मास्टर की धुन पर नाचने वाला जोकर नहीं!

-सुप्रीम कोर्ट की वकील वृंदा गोवर।

आगामी नौ तारीख को रात्रि नौ बजकर नौ मिनट पर नौ श्मशानों से लाई गयी नौ चिताओं की राख को नौ अस्थि-कपालों में रखकर घर के आँगन में नौ बाँसों पर टिके छाजन तले नौ घड़ों के ऊपर, नौ आम्र-पल्लवों के साथ स्थापित करना होगा ! फिर नौ म्लेच्छों का गृहदाह करके उनका परिवार-नाश करने वाले नौ पवित्र, संस्कारी हिन्दू धर्मवीरों को नौ-नौ बाल्टी गोबर-घोल में पवित्र स्नान कराकर नौ चम्मच पंचगव्य खिलाकर नौ गिलास गोमूत्र का पान कराना होगा ! फिर नौ तोतों की गर्दन मरोड़कर हत्या कर देनी होगी और नौ कव्वों के पैरों में सोने के छल्ले पहनाने होंगे ! फिर नौ महिषों की बलि देनी होगी और हाथ में रक्त से भरा खप्पर धारण किये नौ मदमत्त, रक्तवर्णी नेत्रों वाली दुर्भाषिणी साध्वियों को नौ मिनट तक कराला-नृत्य करना होगा ! इस बीच नौ ब्राह्मण नौ सेर चन्दन की लकड़ी का नौ हवन-कुण्डों में आहुति देते रहेंगे ! फिर नौ कापालिकों को नौ सेर शूकर, अज और श्वान का मांस तथा नौ ब्राह्मणों को नौ सेर दही और नौ सेर चिउड़ा खिलाना होगा ! ध्यान रहे कि यह पूरा अनुष्ठान नौ घंटे के भीतर पूरा हो जाना चाहिए !

तदनंतर, नौ महानगरों के नौ अपार्टमेंट्स में रहने वाले नौ अंधभक्तों के परिवारों को नौ दिनों तक प्रतिदिन नौ बजे प्रातः और नौ बजे रात्रि को, नौ दीये जलाकर अपने सिरों पर नौ-नौ जूते लगाने होंगे ! फिर उन्हीं जूतों में लेकर नौ-नौ कटोरी उड़द की दाल बिना हल्दी-नमक के पीनी होगी ! फिर नौ नास्तिकों के घर जाकर उन्हें नौ बार चरण-स्पर्श करना होगा और नौ बोतल उच्च कोटि की मदिरा उपहारस्वरूप प्रदान करनी होगी !

यदि यह अनुष्ठान एकदम नियमानुसार संपन्न किया जाए तो देवि कोरोना के विकराल महाप्रकोप से भारत भूमि नौ दिनों के भीतर मुक्त हो जायेगी ! नागरिक वृन्द एक अधकचरे अघोरी की सुझाई तांत्रिक क्रियाएँ कर रहे हैं जो अपनी साधना अधूरी छोड़कर भाग गया था ! त्रुटिपूर्ण पद्धति से साधना महाविपत्तियों को आमंत्रित करने सदृश होता है ! अतः, हे भारतवासी जागो ! सही पद्धति से साधना करो ! किसी अज्ञानी, प्रवंचक, प्रपंची, शठ और छली के फैलाए मायाजाल में न फँसो !

कल्याणमस्तु !

-कविता कृष्णपल्लवी की फ़ेसबुक वाल से साभार।

भाकपा (माले) ने कोरोना आपदा से लड़ने के नाम पर पांच अप्रैल को घरों की बत्तियां बुझाकर दिया जलाने के प्रधानमंत्री के आह्वान को अवैज्ञानिक और अंधविश्वास फैलाने वाला बताया है। पार्टी ने कहा है कि कोरोना संकट का मुकाबला दिया जलाने से नहीं, बल्कि जांच, इलाज, संसाधन, सुरक्षा उपकरण, राहत मुहैया कराने और वैज्ञानिकता फैलाने के ही जरिये हो सकता है।

पार्टी के उत्तर प्रदेश के सचिव सुधाकर यादव ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों का मेडिकल परीक्षण, चिकित्सा सुविधा व मेडिकल स्टाफ के लिए सुरक्षा उपकरण की जरूरत है। लेकिन इस मामले में चिराग तले ही अंधेरा है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अधिक-से-अधिक लोगों की मेडिकल जांच कराकर महामारी को फैलने से रोका है। लेकिन हमारी सरकार इस मामले में बहुत पीछे है। हमारे डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करते हुए खुद भी संक्रमित होकर जानें गंवा रहे हैं, क्योंकि उनकी मांग के बावजूद सरकार उन्हें जरूरी सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, दस्ताने, बचाव के लिए खास तरह के बने वस्त्र (पीपीई) आदि उपलब्ध नहीं करा रही है।

इसका सबसे बड़ा एतराज़ ख़ुद पावर ग्रिड के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ़ से आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर एक साथ पूरे देश की लाइट ऑफ की जाएगी तो उससे पावर ग्रिड के फेल होने की आशंका है।

इस मामले के सामने आने के बाद और उसके दूसरे पहलुओं को लेकर #Hum_Light_Nahi_Bujhaenge का हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड हो गया। और गुजरात में स्वतंत्र विधायक जिग्नेश मेवानी से लेकर तमाम लोग इसके समर्थन में उतर आए।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on April 4, 2020 11:49 pm

Share