Friday, January 21, 2022

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पीएम मोदी ने संपादकों से बात ज़रूर की लेकिन प्रकाशित करने के लिए नहीं बल्कि ख़बरों को छुपाने के लिए

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नई दिल्ली। लॉक डाउन की घोषणा से पहले सरकार ने भले ही कोई तैयारी न की हो लेकिन उसने एक बात की तैयारी ज़रूर की थी कि कैसे लॉक डाउन से जुड़ी  नकारात्मक ख़बरों को दबाया जाए। इस सिलसिले में घोषणा से 24 घंटे पहले पीएम मोदी ने देश के तक़रीबन 24 प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मालिकों और अखबारों से निजी तौर पर बात की थी। और उन्हें कोरोना से जुड़ी सकारात्मक ख़बरों के प्रकाशन और प्रसारण की सलाह दी थी। 

इसमें देश की 11 भाषाओं से जुड़े मीडिया हाउस शामिल थे। जिसमें इंडियन एक्सप्रेस समूह, हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और पंजाब केसरी प्रमुख हैं। इन सभी से उन्होंने निजी तौर पर बात की थी। मोदी के आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पीएम मोदी ने भाग लेने वाले लोगों से सरकार और लोगों के बीच इस तरह के संपर्क सूत्र के तौर पर काम करने के लिए कहा जो जनता के बीच से फीडबैक दे सके। कारवां ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिये हुई यह बातचीत तक़रीबन 1.30 घंटे चली थी। पीएम मोदी ने कहा कि “अवसाद, नकारात्मकता और अफ़वाहों को नियंत्रित करने की ज़रूरत है। नागरिकों को इस बात के लिए आश्वस्त करना ज़रूरी है कि सरकार कोविद-19 के प्रभावों से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है”।

वेबसाइट में बताया गया है कि बातचीत के दौरान मोदी ने ख़ुद नोटबुक और पेन ले रखा था और बातचीत में शामिल लोगों की तरफ़ से आने वाले सुझावों को वह ख़ुद नोट कर रहे थे। पूरी क़वायद ऐसी लग रही थी जैसे पत्रकार सरकार के हिस्से हों। जो बिल्कुल उस मान्यता और नैतिकता के ख़िलाफ़ जाती है जिसे पत्रकारिता के तौर पर जाना जाता है। क्योंकि उसका काम सरकार से सवाल पूछना और फिर उसकी कमियों को उजागर करना होता है।

वेबसाइट इस बात को भी उजागर करती है कि पीएम मोदी को उपस्थित पत्रकारों ने उत्साहित करने वाली सकारात्मक स्टोरी प्रकाशित और प्रसारित करने का भरोसा दिलाया। 

बैठक के बाद मीटिंग में हिस्सा लेने वाले कुछ संपादकों और मालिकों ने ट्विटर पर पीएम मोदी को इस बातचीत में उन्हें शामिल करने के लिए धन्यवाद दिया। जबकि दूसरे कुछ ने पीएम मोदी के साथ अपनी वीडियो कांफ्रेंसिंग की फ़ोटो के साथ रिपोर्ट प्रकाशित की।

इस कांफ्रेंस के बाद कारवां ने 9 संपादकों और मालिकों से बात की। इसमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों मीडिया समूह शामिल थे। जिसमें सारे इस बात को लेकर बेहद अभिभूत थे कि पीएम मोदी ने उनके विचारों को महत्व दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या पीएम मोदी के कोरोना पर सकारात्मक स्टोरी प्रकाशित करने का सुझाव उनके संपादकीय फ़ैसले को प्रभावित करेगी उनमें से केवल दो ने कहा कि बातचीत के बावजूद आलोचनात्मक स्टोरी प्रकाशित की जाएगी। तीन ने कहा कि वो ऐसा नहीं करेंगे लेकिन उसके पीछे कारण बातचीत नहीं बल्कि कुछ और है। एक ने कहा कि इस बातचीत का हवाला देने के दौरान इस सवाल को हटा दीजिएगा। जबकि दूसरों ने इस पर जवाब देने से इंकार कर दिया।

लेकिन अभी तक मुख्यधारा की मीडिया में कोरोना से जुड़ी ख़बरों को देखकर ऐसा लगता है कि मोदी की यह बातचीत असर कर रही है। क्योंकि मीडिया कोरोना को लेकर सरकार के काम काज पर कोई भी नकारात्मक टिप्पणी नहीं कर रहा है। इसमें इस महा संकट के मौक़े पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उचित योजना का अभाव तथा लॉ़क डाउन को घातक तरीक़े से लागू करने के मसले पर पूरा मीडिया मौन है। इसके साथ ही इस महामारी का सामना करने से जुड़ी तैयारी तथा डब्ल्यूएचओ के निर्देश के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों को जीवन रक्षा किट मुहैया न कराए जाने पर भी उसने सरकार पर कोई सवाल नहीं उठाया।

इंडियन एक्सप्रेस समूह के प्रबंध निदेशक विवेक गोयनका भी इस बातचीत के हिस्से थे। उन्होंने पीएम के साथ हुई बातचीत को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इसके पहले कोई भी प्रधानमंत्री आम लोगों से इस तरह से नहीं जुड़ा और न ही उनसे  इस तरह से बातचीत की। इसलिए निश्चित तौर पर वह अगुआ मोर्चे पर लीड कर रहे हैं।

अंग्रेज़ी अख़बारों के बीच तुलनात्मक रूप से इंडियन एक्सप्रेस ने लॉक डाउन के चलते ग़रीबों की होने वाली मौतों की रिपोर्टों को ज्यादा स्थान दिया है। लेकिन कवरेज में लॉक डाउन से पहले सरकार की पूर्व योजना पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है। इसकी बजाय इन मौतों के बारे में भी उसका कहना था कि लॉक डाउन के बाद यह अवश्यंभावी थीं या ऐसी मौतें थीं जिन्हें चाहकर भी सरकार नहीं रोक सकती थी। जैसे यूपी के लिए जाने वाले प्रवासी मज़दूरों के बारे में रिपोर्ट में यह कहीं नहीं बताया गया है कि सरकार इन मज़दूरों के लिए पहले क्या कर सकती थी। रिपोर्ट इसे मानवीय संकट बताती है और उसमें भी सरकार द्वारा सहायता कैंप और यातायात की व्यवस्था किए जाने पर उसकी सराहना की गयी है।

बैठक के बाद हिंदू समूह की को चेयरपर्सन मालिनी पार्थ सारथी ने एक ट्वीट में कहा कि हम प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधि के तौर पर पीएम मोदी से बातचीत का यह विशेष मौक़ा था। उनकी यह प्रतिबद्धता की भारत कोरोना के सामने नहीं झुकेगा सराहनीय है। वह कैसे आगे बढ़ेंगे इस बात को लेकर उनकी दृष्टि बिल्कुल साफ़ है। हम निश्चित तौर पर सही हाथों में हैं।

इसी तरह से लोकमत के रिषि डर्डा ने भी ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट की गयी कई पोस्टों में कभी पीएम को बोलते हुए तो कभी उनको सुनते हुए फ़ोटो दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कांफ्रेंसिंग का वीडियो भी ट्वीट किया।

उसके बाद जो रिपोर्ट आई हिंदू में कोरोना से संबंधित वह भी गौर करने के लायक़ है। उसमें एक स्टोरी है जिसमें बताया गया था कि विदेशी यात्रियों की स्क्रीनिंग में कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है। अमेरिका ने 64 देशों के लिए 174 मिलियन डॉलर की सहायता की घोषणा की है जिसमें 2.9 मिलियन डॉलर भारत के लिए है। 

पार्थसारथी ने कारवां से पीएम मोदी से हुई बातचीत के मसले पर बात करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह ऑफ दि रिकार्ड था वह सार्वजनिक करने के लिए नहीं था। 

कारवां ने टाइम्स ऑफ इंडिया के एडिटोरियल डायरेक्टर जयदीप बोस से भी संपर्क किया जो इस बातचीत में शामिल थे। लेकिन उन्होंने इस पर कोई बात करने से इंकार कर दिया। इस बीच टाइम्स आफ इंडिया में आई प्रमुख रिपोर्टों में अक्षय कुमार द्वारा कोरोना से निपटने के लिए दी गयी सहायता और कराची में लॉकडाउन के दौरान हिंदुओं को भोजन न मुहैया कराए जाने की ख़बरें शामिल हैं।

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