Monday, October 18, 2021

Add News

लखीमपुर-खीरी हत्याकांड: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खेल, किसी को भी गोली लगने का नहीं है जिक्र

ज़रूर पढ़े

पीड़ित किसान परिवारों ने लखीमपुर खीरी के तिकुनिया की हिंसक घटना में मारे गये किसानों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खेल किए जाने का आरोप लगाते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था। इसके साथ ही लखीमपुर खीरी में तनाव पैदा हो गया था। यह सूचना मिलते ही लखनऊ रेंज की आईजी लक्ष्मी सिंह धौरहरा के किसान नक्षत्र सिंह के गांव पहुंचीं और परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए राजी करने की कोशिश में जुट गयी थीं। जिसके बाद बताया जा रहा है कि 8 लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

पीड़ित किसानों का आरोप है कि नानपारा बहराइच के किसान गुरविंदर सिंह की मौत गोली लगने से हुई थी लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने का जिक्र भी नहीं किया गया है। किसानों का आरोप है कि कि राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लीपापोती की गई है। बता दें कि लखीमपुर खीरी के चौखड़ा फार्म निवासी किसान लवप्रीत सिंह का शव पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सोमवार शाम को उसके घर पहुंच गया था। मंगलवार को सुबह 10 बजे उसका अंतिम संस्कार होना था। लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा हुआ तो किसानों में गुस्सा भड़क उठा। धौरहरा में भी नक्षत्र सिंह के परिजन ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था।

जब किसानों ने शवों का अंतिम संस्कार करने से इन्कार तो इसको देखते हुए जिलाधिकारी डॉ अरविंद कुमार चौरसिया, आईपीएस अधिकारी, अजय शर्मा कई सीओ कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गए थे।
हालात एक बार फिर माहौल तनावपूर्ण होते ही किसान नेता सीएम सिंह, पंजाब के किसान नेता रूल्दू सिंह मानसा, कांग्रेस नेता सैफ अली नकवी, पूर्व एमएलसी आरएस कुशवाहा, राम नरेश यादव, अनिता यादव और भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अजित सिंह मौके पर पहुंच चुके थे। बताया जा रहा है कि सरकार और किसानों के बीच मध्यस्थता कराने वाले राकेश टिकैत के भी जल्द ही मौके पर पहुंच सकते हैं।

चारों किसानों के परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि गुरविंदर की मौत गोली मारे जाने से हुई। नाराज किसान मृतक गुरविंदर का पांच डॉक्टर्स की टीम से पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे थे।

किसानों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली का जिक्र नहीं

3 अक्टूबर के जनंसहार की घटना में मारे गये तीन बीजेपी कार्यकर्ता हरिओम (35), श्याम सुंदर (40) और शुभम मिश्रा (30) और एक स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप (28) की भी मौत हो गई थी। भाजपा कार्यकर्ताओं का पोस्टमॉर्टम रविवार रात ही हो गया था और सोमवार को इनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

जबकि चारों किसानों के शव का पोस्टमॉर्टम सोमवार को जिला मुख्यालय में किया गया और इसके बाद उनके शव परिजनों को सौंप दिए गये। ये चार किसान हैं दलजीत सिंह (32), गुरविंदर सिंह (20), लवप्रीत सिंह (30) और नक्षत्र सिंह (65) । इन सभी के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि किसी की मौत घसीटने से तो किसी की लाठी-डंडों की पिटाई से हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली लगने की बात नहीं कही गई है। सभी के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर एक नज़र –

1. लवप्रीत सिंह (किसान) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनकी मौत घिसटने से हुई । उनकी शरीर पर चोट के निशान मिले हैं तथा शॉक और ब्रेन हेमरेज मौत की मुख्य वजह बनी।

2. गुरविंदर सिंह (किसान) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया हि कि उनकी शरीर पर दो चोट और घिसटने के निशान मिले हैं जो कि किसी धारदार या नुकीली चीज से आई हैं। उनकी मौत शॉक और ब्रेन हेमरेज के चलते हुयी है।

3. दलजीत सिंह (किसान) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि उनकी शरीर पर कई जगह घिसटने के निशान हैं। यही उनकी मौत की वजह बनी।

4. छत्र सिंह (किसान) की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें मौत से पहले शॉक, ब्रेन हेमरेज और कोमा। शरीर पर घिसटने के भी निशान मिले हैं।

5. शुभम मिश्रा (बीजेपी नेता) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी मौत लाठी-डंडों से हुई पिटाई से हुयी। उनके शरीर पर दर्जन भर से ज्यादा जगहों पर चोट के निशान मिले हैं।

6. हरिओम मिश्रा (अजय मिश्रा का ड्राइवर) की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी  लाठी-डंडों से पिटाई से हुयी है जिसकी चोट के निशान उनकी शरीर पर कई जगह मिले हैं। मौत से पहले शॉक और हेमरेज ।

7. श्याम सुंदर (बीजेपी कार्यकर्ता) की मौत भी लाठी-डंडों से पिटाई से होना बताया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में घिसटने से दर्जनभर से ज्यादा चोटें मिली हैं।

8. रमन कश्यप (स्थानीय पत्रकार) की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी शरीर पर पिटाई के गंभीर निशान मिले हैं। शॉक और हेमरेज से हुई मौत हुयी।

मोदी की चुप्पी पर सवाल, रौंदने का उत्सव मनाने मोदी लखनऊ आये

आज सोशल मीडिया पर 3 अक्तूबर की घटना के कई वीडियो वॉयरल हुये हैं। विरोधी तो विरोधी अब सहयोगी भी सरकार को घेरने लगे हैं। भाजपा सांसद वरुण गांधी ने किसानों पर गाड़ी चढ़ाने का वीडियो साझा करते हुये कहा है कि “लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ियों से जानबूझकर कुचलने का यह वीडियो किसी की भी आत्मा को झकझोर देगा। पुलिस इस वीडियो का संज्ञान लेकर इन गाड़ियों के मालिकों, इनमें बैठे लोगों और इस प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार करे।”

वहीं बिहार सरकार में भाजपा की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने सरकार को घेरते हुए कहा, “जो वीडियो वायरल हो रहा है वो ब्रिटिश काल की याद दिलाता है। जब कानून व्यवस्था सिर्फ़ नाम मात्र की थी। केरल में जब पहली बार सोशलिस्ट सरकार बनी थी तब मजदूर आंदोलन में गोली चली थी तब जेपी ने मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांग लिया था। मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। मैं उम्मीद करता हूं कि जांच सही होगी। किसान संगठन चाहते थे कि राकेश टिकैत वहां आएं और प्रशासन से बात करें”।

वहीं शिवसेना सांसद संजय राउत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुये कहा है कि “बहुत दुखद घटना है। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई मौकों पर भावुक होते देखा है। लालकिले की हिंसा पर वो भावुक हुए थे। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर मौन क्यों हैं?”

उन्होंने आगे कहा कि “प्रियंका गांधी को रोककर सरकार ने गलत किया, वो इंदिरा गांधी की पोती हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के दो दुकड़े कर दिए थे। अगर यही घटना किसी और राज्य में हुई होती तो अब तक बीजेपी के लोग कोहराम मचा रहे होते। अगर कोई किसानों के दुखों में शरीक होना चाहता है तो सरकार उसको क्यों रोकना चाहती है? लोकतंत्र में ये अधिकार है सबको। किसी की भी आवाज़ उठाई, किसानों की आवाज़ उठाई तो उसको रोका क्यों जा रहा है?”

आज मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में थे। उनके दौरे पर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि मोदी जी, क्या आजादी और संविधान, दोनों को जीप के टायरों के तले रौंदने का उत्सव मनाने लखनऊ जा रहे हैं? या फिर मनीष गुप्ता के हत्यारों को ना पकड़े जाने का? हिम्मत है तो लखीमपुर खीरी जाएं, देश के गृह राज्य मंत्री को बर्खास्त करें, दोषियों को गिरफ़्तार करें। यही आज़ादी का धर्म है।”

घटना के वीडियो को साझा कर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने घटना को सत्ता का दुरुपयोग बताते हुये इसकी तुलना ‘जलियांवाला कांड’ से की है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, ‘जलियांवाला बाग में जैसी स्थिति थी, वैसी ही आज यूपी में हो गई है। किसान ये भूलेगा नहीं। केंद्र सरकार को असंतोष का सामना करना पड़ेगा। बीजेपी सरकार के काफिले ने किसानों की हत्या की है। किसानों की हत्या के लिए यूपी सरकार और केंद्र सरकार जिम्मेदार हैं। पवार ने इस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की कमेटी से करवाने की मांग की है।

घटना का वीडियो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कई अन्य नेताओं ने भी वीडियो साझा करते हुए निशाना साधा है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि क्या इसके बाद भी कुछ प्रमाण चाहिए? देखिए सत्ता के अहंकार में चूर गुंडे ने किसानों को अपनी गाड़ी के नीचे रौंदकर मार दिया। ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास ने वीडियो शेयर करके लिखा कि यह है राज्य प्रायोजित लखीमपुर नरसंहार का सबसे दिल दहला देने वाला सबूत। सबसे दुखद वीडियो।

जनसंहार का वीडियो वॉयरल

लखीमपुर में हुई हिंसा के आज कई वीडियो सामने आये । एक वीडियो में एक गाड़ी किसानों को रौंदते हुए जाती दिख रही थी। जबकि दूसरी गाड़ी उसके पीछे पीछे चल रही है।

एक दूसरे वीडियो में किसानों को टक्कर मारने वाली गाड़ी ‘थार’ को रोककर कुछ लोग भागते हुए नजर आ रहे हैं। थार जहां रुकी है, उसके पिछले पहिये के पास एक शख्स घायल हालत में पड़ा है। वायरल हो रहे वीडियो में एसयूवी ‘थार’ में सवार दो लोग किसानों को कुचलने के बाद वाहन से भागते हुए नज़र आ रहे हैं। बता दें कि किसानों ने शुरुआत से ही केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर कार में होने का आरोप लगाया था। एक और वीडियो में प्रदर्शनकारी एक गाड़ी को घेरकर ‘बीजेपी मुर्दाबाद’ के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी एक ब्लैक स्कॉर्पियो को घेरकर खड़े हैं और हाथ में काला झंडा लिए बीजेपी मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। यह वीडियो लखीमपुर में हुई हिंसा से कुछ देर पहले का है। ब्लैक स्कॉर्पियो में जो बैठे हैं, वो बीजेपी के ब्लॉक प्रमुख पवन गुप्ता हैं। जो कि सदर विधानसभा सीट से उम्मीदवार माने जा रहे हैं।

ताजा हालात

प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। लखीमपुर खीरी में अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहां 6 अक्तूबर तक RAF और SSB की दो-दो कंपनियां तैनात रहेंगी। किसानों और सरकार के बीच समझौता कराने वाले किसान नेता राकेश टिकैत ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने कार्रवाई के लिए जो वक्त दिया है, अगर उस वक्त में कार्रवाई नहीं हुई तो महापंचायत की जाएगी।

पिता पुत्र की आपराधिक पृष्ठभूमि

किसानों को धमकाने वाले एक सप्ताह पुराने अपने वीडियो में केंद्रय मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने कहा था कि विधायक और सांसद बनने से पहले मैं क्या था, इसको भी जान लें। तो बता दें कि अजय मिश्रा की तिकुनिया थाने में हिस्ट्री शीट भी खोली गई थी। लखीमपुर खीरी में किसानों का जनसंहार कराने वाले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी पर हत्या, मारपीट, धमकी देने जैसी तमाम घटनाओं में 4 मुक़दमे दर्ज हुये थे। दो मुक़दमों में अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा ( मोनू) भी नामजद रहा है।

5 अगस्त 1990 को तिकुनिया थाने में अजय मिश्रा के साथ 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज़ हुआ था। उन पर हथियारों से लैस होकर मारपीट का आरोप लगाया गया था। 8 जुलाई 2000 को प्रभात गुप्ता की हत्या में अजय मिश्रा समेत चार लोग नामजद किया गया था। 31 अगस्त 2005 को ग्राम प्रधान ने अजय मिश्रा समेत चार लोगों पर घर में घुसकर मारपीट और दंगा फसाद का मुक़दमा दर्ज़ कराया था। जबकि 24 नवंबर 2007 को अजय मिश्रा समेत तीन लोगों पर घर में घुसकर मारपीट का चौथा मुकदमा दर्ज हुआ था।

इसके अलावा अजय मिश्रा पर 2005 और 2007 के मारपीट के मुकदमों में अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू भी नामजद था।

प्रभात गुप्ता हत्याकांड में 29 जून 2004 को सुनवाई करने वाले जज ने अजय मिश्रा की हत्या के मुकदमों में बरी किया और 30 जून को जज साहब का रिटायरमेंट हो गया। परिवार ने इस फैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपील दायर की तो वर्तमान में अजय मिश्रा हाई कोर्ट से जमानत पर हैं। 12 मार्च 2018 से हाई कोर्ट ने भी इस मामले में सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर रखा है। बीते 3 सालों से फैसला सुरक्षित रखने पर हाई कोर्ट डबल बेंच में अपील दायर की है जिस पर अक्तूबर महीने में सुनवाई होना है। लखीमपुर हिंसा के बाद केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर एक और मुक़दमा दर्ज़ किया गया है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

‘पिंक’ से तुलना न करें तो देखने लायक है ‘रश्मि रॉकेट’

'सूर्यवंशम' जैसी फ़िल्म की शुरुआत में एक महिला के लिए जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया वह...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.